आर्थिक संकट से जूझता नगर निगम, अपनों पर कर रहा मेहरबानी

  • अब तक नहीं बनी २०१२-13 की बैलेंस सीट

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
Captureलखनऊ। आर्थिक संकट से जूझ रहा नगर निगम दूसरों पर मेहरबानी करने से बाज नहीं आ रहा है। वह भी तब जब खुद का कोष खाली है और कर्ज में डूबा हुआ है। फिर भी कई कर्मचारियों को अपने यहां बिना भर्ती के ही वेतन दिया जा रहा है। इसके अलावा वित्तीय वर्ष का लगभग चार माह बीतने को है लेकिन नगर निगम आज भी 2012-13 में हुई आय और व्यय टटोलने में लगा हुआ है। निगम के इस कारनामे की शुरुआत दरअसल जवाहरलाल नेहरू अर्बन योजना में अरबों रुपये खर्च करने के बाद शुरू हुई। योजना भले ही फेल साबित हुई हो लेकिन इसकी आड़ में कुछ विभागीय अधिकारियों ने अपने पद का दुरुपयोग उठाते हुए अपने नजदीकियों को खूब फायदा पहुंचाया।
दरअसल जेएनयूआरएम योजना की देखरेख और लेखा जोखा तैयार करने के लिए महिला कर्मचारी रचना रस्तोगी को योजना की निश्चित तिथि तक नियुक्त किया गया था। नियमानुसार योजना समाप्त होने के बाद कार्यकर्ता कर्मचारी को भी पदमुक्त होना था लेकिन अपनों की मेहरबानी और जोड़ तोड़ के कारण महिला कर्मचारी रचना रस्तोगी को योजना समाप्त हो जाने के बाद भी पुन: अमृत योजना के अंतर्गत डबल एंट्री सिस्टम के कार्य में लगा दिया गया। बता दें डबल एंट्री सिस्टम में निगम द्वारा हो रहे खर्च और आय दोनों प्रतिदिन रिकॉर्ड किया जाता है।
नगर निगम में पहले से ही केन्द्रीय सेवा और अकेन्द्रीय सेवा के लेखाकार मौजूद हैं। हाल ही में 11 लेखाकारों की पदोन्नति भी की गई है। सूत्र बताते हैं कि बावजूद इसके आला अधिकारियों के दबाव में महिला कर्मचारी की तैनाती जारी रखी गई। हालांकि उनके कार्य को देखें तो अभी तक डबल एंट्री सिस्टम के कार्य में उनकी कार्य शैली पर सवाल उठ रहे हैं।
महिला कर्मचारी का कार्य
नगर निगम में डबल एंट्री सिस्टम के कार्य के लिए उक्त महिला कर्मचारी को नियुक्त किया गया। इनका कार्य नगर निगम के संबंधित विभागीय कर्मचारियों को प्रशिक्षण देना था। लेकिन निगम में प्रशिक्षण एवं डबल एंट्री सिस्टम के कार्य को चलाने के लिए नियुक्त महिला कर्मचारी की ओर से न तो प्रशिक्षण दिया गया और न ही डबल एंट्री सिस्टम समय पर लागू किया गया।
चार साल से नहीं बनी बैलेंसशीट
सूत्रों की मानें तो डबल एंट्री सिस्टम में निगम को अपना बहीखाता तैयार करना होता है, जिसमें विभाग की इनकम और खजाने का लेखा-जोखा होता है लेकिन इस विभाग में कार्यरत एकाउंट अफसर रश्मि रस्तोगी की ओर से विभाग की इनकम दर्ज ही नहीं की गई बल्कि खजाने का लेखा-जोखा प्रतिदिन किया जाता रहा। यह कार्य विभाग में अनुभवी लेखाधिकारियों के होने के बावजूद योजना के अंतर्गत लाई गई चार्टेड एकाउंटेंट से ही कराया जा रहा है।

मामले की जानकारी मेरे संज्ञान में नहीं है। अगर ऐसा है तो अवश्य ही प्रकरण को देखा जाएगा।
उदय राज सिंह
नगर आयुक्त।

जेएनयूआरएम योजना के समय से डबल एंट्री सिस्टम के कार्य में लगी महिला कर्मचारी ने अभी तक न तो किसी को प्रशिक्षित किया है और न ही डबल एंट्री सिस्टम का कार्य हो पा रहा है।
आनन्द वर्मा
नगर निगम कर्मचारी संगठन।

क्या कहती है महिला कर्मी

इस मामले में जब रचना रस्तोगी से जानकारी मांगी गई तो उन्होंने अपना पक्ष रखते हुए बताया कि हम अभी तक 2012-13 की डबल एंट्री सिस्टम में फीडिंग कर चुके हैं, जो कि ऑडिट के लिए भेजी चा चुकी है। यही नहीं हर साल की बैलेंस शीट भी बनाई जा रही है। उन्होंने बताया कि वाउचर हमेशा देरी से आते हैं। विभाग के लोग ही जब देरी से वाउचर भेजते हैं तो उसे फीडिंग करने के प्रोसेस में समय लगता है। कई जोनों में कंप्यूटर की गति को लेकर शिकायतें आती है। रचना ने बताया कि हर बार लेखाधिकारी से इस बाबत शिकायत की है कि वाउचर सदैव देरी से मिलते हैं लेकिन उनके द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की जाती।

अपने रिश्तेदारों पर मेहरबानी

जेएनयूआरएम योजना समाप्त होने के बाद अपने करीबियों को फायदा पहुंचाने के लिए विभागीय अधिकारी द्वारा अमृत योजना में भी उक्त कर्मचारी से ही कार्य लिया गया जबकि पहले से चली आ रही जवाहरलाल नेहरु अर्बन योजना फ्लॉप रही। महिला पर आरोप है कि उन्होंने अपने सहायक कर्मचारियों के तौर पर अपने ही रिश्तेदारों को रख लिया, जोकि कंप्यूटर ऑपरेटर के पद पर नगर निगम में कार्यरत हैं और वहीं मृतक आश्रितों में हो रही भर्ती पर विभाग द्वारा कंप्यूटर की जानकारी में ट्रिपिल सी का सर्टिफिकेट अनिवार्य रखा गया है। निगम के लेखा जोखा और अन्य अकाउंट कार्यों के लिए एक मुख्य एवं वित्त लेखाधिकारी भी मुख्यालय में है। अब इसे अपनों की मेहरबानी ही कहेंगे जहां लेखा कार्य के लिए पहले से ही लेखाकारों की फौज खड़ी है लेकिन विभाग के आला अधिकारी की सरपरस्ती में किसी विशेष को खासा फायदे पहुंचाये जा रहे हैं। निगम के पास अपने कर्मचारियों को बांटने के लिए वेतन की कमी पड़ जाती है जबकि विभाग द्वारा रचना रस्तोगी को 55000 एवं कार्यरत रिश्तेदारों में शिवम रस्तोगी को 8000 और संदीप रस्तोगी को 14000 वेतनमान का भुगतान किया जा रहा है।

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