आरक्षण और समय की जरूरत

sanjay sharma editor5“संविधान में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए आरक्षण स्पष्ट और परिभाषित हैं। पिछड़े वर्ग के आरक्षण का दायरा हां जरूर विवादों में रहा है। वोट की राजनीति भी इसमें खूब काम करती है। जाटों को केंद्रीय सेवाओं में ओबीसी आरक्षण देने के यूपीए सरकार के फैसले को सर्वोच्च न्यायालय साल भर पहले खारिज कर चुका है।”

राजस्थान के नागौर में अपनी अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा के तीन दिन के सम्मेलन में आरएसएस ने फिर से आरक्षण का राग छेड़ा। राष्ट्रीय स्वयंसवेक संघ ने कहा कि संपन्न तबकों की आरक्षण की मांग सही नहीं है। संघ का यह बयान आज के माहौल में खासा अहम है। हरियाणा में ओबीसी आरक्षण के लिए जाटों के उग्र आंदोलन को अभी ज्यादा समय नहीं हुआ है। इससे पहले हार्दिक पटेल ने भी आंदोलन आरक्षण के लिए किया। ऐसे में जरूरत है कि जो लोग अभी भी विकास से वंचित और हाशिए पर हैं उन्हें ही आरक्षण का लाभ मिले।
भाजपा की हरियाणा सरकार ने आंदोलन के आगे झुकते हुए मांग पर विचार करने के लिए एक समिति गठित की थी। विधानसभा के अगले सत्र में विधेयक लाने का भरोसा भी दिया था। समिति इस महीने तक अपनी अंतिम रिपोर्ट देगी। लेकिन क्या संघ के घोषित रुख का असर जाट समुदाय की मांग से निपटने के खट्टर सरकार के तौर-तरीके पर पड़ेगा? समिति किस नतीजे पर पहुंचेगी? संघ का ताजा बयान खुद नये हालात में संघ की छवि को दिखाता है। गौरतलब है कि बिहार चुनावों में संघ प्रमुख के इन्हीं बयानों से हार का मुंह भी देखना पड़ा था। संघ प्रमुख भागवत ने जातिगत आरक्षण की प्रासंगिकता पर सवाल उठाते हुए आरक्षण की अधिक सुसंगत नीति बनाने की बात कही थी।
हालांकि हमारे संविधान में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए आरक्षण स्पष्ट और परिभाषित हैं। पिछड़े वर्ग के आरक्षण का दायरा हां जरूर विवादों में रहा है। वोट की राजनीति भी इसमें खूब काम करती है। जाटों को केंद्रीय सेवाओं में ओबीसी आरक्षण देने के यूपीए सरकार के फैसले को सर्वोच्च न्यायालय साल भर पहले खारिज कर चुका है। कोई समुदाय ओबीसी आरक्षण का हकदार है या नहीं, इसके लिए पहले राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग अपनी राय देता है। पर चाहे जाट हों या गुजरात के पाटीदार या आंध्र के कापु, इन सबने राजनीतिक दबाव डाल आरक्षण पाना चाहा। हालांकि ये समुदाय ज्यादा पिछड़े नहीं हैं। खेती के घाटे का धंधा बनते जाने के कारण इन्हें अपने पिछडऩे का एहसास हो रहा है। सरकारी नौकरियों में बेहतर आय और दूसरे लाभ सहित रोजगार की सुरक्षा भी इन्हें आरक्षण के लिए आंदोलन करने को प्रेरित करती है। ऐसे में आज जरूरत है कि आरक्षण के बारे में ठीक से मंथन किया जाए। जिन वर्गों को शिक्षा और विकास की अभी कोई सुविधा नहीं मिली है। उन तक आरक्षण के जरिए पहुंच कर मुख्यधारा में शामिल किया जाए तो बेहतर होगा।

Pin It