आय में असमानता

अध्ययन में यह तथ्य भी सामने आया है कि 2010 के बाद से दुनिया की सबसे गरीब आबादी में से 50 फीसदी की संपत्ति करीब 1,000 अरब डॉलर घटी है। यानी उनकी संपत्ति में 41 फीसदी की जोरदार गिरावट आई है। समीक्षाधीन अवधि में वैश्विक आबादी में करीब 40 करोड़ लोगों का इजाफा हुआ है।

sanjay sharma editor5गरीबी उन्मूलन के लिए काम करने वाली गैर-सरकारी संस्था ऑक्सफैम ने क्रेडिट स्विस के आंकड़ों के आधार पर ये दावा किया है कि भारत और दुनिया के अन्य देशों में आय में असमानता का फासला कम होने के बजाय और बढ़ा है। सर्वेक्षण के अनुसार दुनिया के सिर्फ 62 सबसे अमीर लोगों के पास दुनियाभर के गरीबों की 50 फीसदी आबादी के बराबर सम्पत्ति है। इससे तो सभी वाकिफ हैं कि अमीरों की सम्पत्ति में इजाफा हो रहा है और गरीबों की स्थिति दयनीय हो रही है। खास बात यह है कि इन 62 अमीरों में महिलाओं की संख्या मात्र 9 है। 2010 से इन अमीरों की संपत्ति करीब 500 अरब डॉलर बढक़र 1,760 अरब डॉलर हो गई है। यह असमानता की खाई बहुत ही खतरनाक है।
अध्ययन में यह तथ्य भी सामने आया है कि 2010 के बाद से दुनिया की सबसे गरीब आबादी में से 50 फीसदी की संपत्ति करीब 1,000 अरब डॉलर घटी है। यानी उनकी संपत्ति में 41 फीसदी की जोरदार गिरावट आई है। समीक्षाधीन अवधि में वैश्विक आबादी में करीब 40 करोड़ लोगों का इजाफा हुआ है। आज विकास की बात हो रही है। यह कैसा विकास है कि गरीब और गरीब हो गया और अमीरों की सम्पत्ति में तेजी से इजाफा हो गया। और सबसे दुखद पहलू है कि यह आंकड़ा लगातार घट रहा है। अमीर और गरीब के बीच की खाई बढ़ती जा रही है। सरकार विकास की बात कर रही है तो निश्चित ही सभी का विकास होना चाहिए। जिस हिसाब से आकंड़ों में गिरावट आ रही है उससे तो यही लग रहा है कि विकास सिर्फ मु_ïी भर लोगों का हो रहा है। यह जो लोगों के बीच असमानता बढ़ रही है उसके लिए सरकारों की भी जिम्मेदारी बनती है। यह बहुत ही चिंताजनक स्थिति है। भारत में ही देखा जाए तो आईटी कंपनी के सीईओ का वेतन वहां के एक सामान्य कर्मचारी की तुलना में 416 गुना अधिक है। आईटी सेक्टर में तो एक ही पद पर आसीन व्यक्ति का अलग-अलग वेतन है।
हुनर और काबिलियत को महत्व देना चाहिए लेकिन किसी संस्थान में लोगों के वेतन में इतना अंतर समझ से परे है। अध्ययन में यह भी बताया गया है कि भारत में 46 अरबपतियों ने यह धन संपदा उन क्षेत्रों के जरिए जुटाई है जो बाजार ताकत, प्रभाव और लाइसेंसिंग की तरजीही पहुंच पर निर्भर है। यह सौ फीसदी सच है कि वर्तमान व्यवस्था में जो ताकतवर और प्रभावशाली हैं उन्हीं की सुनी जा रही है। यह बहुत ही चिंताजनक स्थिति है। असमानता से निपटने के लिए तत्काल कार्रवाई की जरूरत है।

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