आयुर्वेद और होम्योपैथ में उपलब्ध है डेंगू का रामबाण इलाज

  • राजधानी के सरकारी अस्पतालों में मुफ्त बांटी जा रहीं दवायें
  • दवाओं के नियमित सेवन से जल्द ठीक हो रहे डेंगू के मरीज

 4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
Mortar with fresh rosemary and dried spicesलखनऊ। डेंगू का कहर हर साल पूरे विश्व को झेलना पड़ता हैं। आंकड़ों की मानें तो दुनिया की 10 करोड़ आबादी सालाना इस बीमारी से प्रभावित होती है। वहीं भारत में हर साल हजारों लोग डेंगू की चपेट में आकर अपनी जान गवांते हैं। इस साल डेंगू की बीमारी इतनी भयावह हो चुकी है कि केवल लखनऊ में डेंगू बुखार से मरने वालों का आंकड़ा 140 के पार पहुंच गया है। चिकित्सकों की मानें तो एलोपैथी में इस बीमारी से निपटने का कोई कारगर उपाय नहीं है। लेकिन मरीजों को ग्लूकोज तथा पैरासीटामॉल के सहारे इलाज किया जाता है। मरीज की स्थिति गम्भीर होने पर प्लेटलेट्स चढ़ाया जाता है। वहीं डेंगू बुखार से बचाव एवं इलाज में आयुर्वेद और होम्योपैथ की दवाएं कारगर साबित हो रही हैं। जब से राजधानी में डेंगू ने पैर पसारा है, तभी से आयुर्वेदिक उपचार की मांग बढ़ गई है। डेंगू होने पर ही नहीं उससे बचने के लिए भी आयुर्वेदिक दवाओं का सहारा लिया जा रहा है। वहीं केन्द्रीय होम्योपैथी अनुसंधान परिषद के शोधकर्ताओं का दावा है कि हौम्योपैथ की औषधि यूपीटोरियम पर्फ (30) डेंगू के उपचार में काफी फायदेमंद है।

केन्द्रीय होम्योपैथी अनुसंधान परिषद का दावा

होम्योपैथ ड्रग रिसर्च इंस्टीट्यूट के सहायक निदेशक डॉ. जे.पी. सिंह ने बताया है कि यूपीटोरियम पर्फ (30) मरीज को प्रति दो घण्टे के अंतराल पर दी जाती है। इससे मरीज की स्थिति में सुधार होने लगता है और प्लेटलेट्स भी बढऩे लगता है। लखनऊ के जिला होम्योपैथी चिकित्साधिकारी (डीएचओ) डॉ. हरिश्चन्द्र यादव ने बताया कि होम्योपैथ में जीनिस एपिक्स के आधार पर डेंगू के रोकथाम की औषधियां दी जाती हैं। लेकिन यह दवाइयां प्रशिक्षित होम्योपैथिक चिकित्सक की सलाह से ही लेनी चाहिए। डॉ. यादव ने बताया कि डेंगू से डरें नहीं बल्कि मुकाबला करें।
केन्द्रीय होम्योपैथी परिषद के सदस्य डॉ. अनिरूद्ध वर्मा ने बताया कि होम्योपैथी में डेंगू बुखार से बचाव एवं इसके उपचार की प्रर्याप्त दवाइयां बिना किसी साइड इफेक्ट के उपलब्ध हैं। उन्होंने बताया कि डेंगू इजिप्ट मच्छर के काटने से फैलता है। यह मच्छर दिन में ज्यादा सक्रिय रहते हैं लेकिन ज्यादा ऊपर तक नहीं उड़ पाते हैं। डेंगू फैलाने वाले मच्छर ठंडी, छायादार जगहों, परदे के पीछे और अंधेरी जगहों में रहते हैं। यह घर के अंदर रखे हुए शांत पानी में ज्यादा प्रजनन करते हैं तथा प्रजनन क्षेत्र के 200 मीटर की दूरी के अंदर ही उड़ते हैं।

प्लेटलेट्स को बढ़ाने में मददगार है होम्योपैथी:डॉ. प्रियंका

लोहिया अस्पताल की होम्योपैथिक चिकित्सक डॉ. प्रिंयका यादव ने बताया है कि डेंगू का इलाज होम्योपैथी में उपलब्ध है। बशर्ते सही समय पर मरीज का इलाज शुरू कर दिया जाय। डेंगू के बुखार में यूपीटोरियम पर्फ दवा काफी कारगर है। इसके अलावा घटते प्लेटलेट्स को बढ़ाने के लिए कारिका पपाया बेहद फायदेमंद है।

डेंगू फ ीवर के लक्षण

डेंगू बुखार में संक्रमित मच्छर के काटने के 3 से 14 दिन के अंदर लक्षण दिखने लगते हैं। डेंगू बुखार में ठंड लगकर तेज बुखार आना, सिर दर्द, आखों में दर्द, बदन एवं जोड़ों में अत्यधिक दर्द, भूख कम लगना, जी मिचलाना, उल्टी-दस्त लगना और अत्यधिक कमजोरी आदि लक्षण होते हैं।

बुखार से बचाव के उपाय

ठ्ठ घर के अंदर, आस पास पानी न जमा होने दें।
ठ्ठ कूलर का काम ना होने पर उसका पानी निकाल दें।
ठ्ठ खिडक़ी दरवाजों में जाली लगाकर रखें।
ठ्ठ पूरे शरीर को ढक़कर रखने वाले कपड़े पहनें।
ठ्ठ रात में मच्छरदानी लगाकर सोएं।

आयुर्वेद से जीती जा सकती है डेंगू की जंग

डॉ. राममनोहर लोहिया संयुक्त चिकित्सालय के आयुर्वेद चिकित्सक डॉ.एसके.पाण्डेय ने बताया है कि डेंगू वायरस से फैलने वाला एक खतरनाक रोग है। जो कि संक्रमित एडीज एजिप्टी नामक मच्छर के काटने से फैलता है। मच्छरों से बचाव एवं शरीर की इम्युनिटी पावर बढ़ाना ही डेंगू से बचने का सबसे अच्छा तरीका है। आयुर्वेद में लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाकर डेंगू के बुखार से निजात दिलायी जा सकती है। उन्होंने बताया कि इस बुखार में मरीज की स्थिति गम्भीर होने पर प्लेटलेट्स की संख्या तेजी से कम होते हुए नाक, कान, मुंह या अन्य अंगों से रक्तस्राव शुरू हो जाता है, रक्तचाप काफी कम हो जाता है। यदि समय पर उचित चिकित्सा ना मिले तो रोगी कोमा में चला जाता है। उपरोक्त लक्षणों के सम्बन्ध में यह बात ध्यान रखने योग्य है कि अन्य कई प्रकार के बुखार में भी डेंगू से मिलते जुलते लक्षण होते हैं। कभी कभी रोगी में बुखार के साथ सिर्फ 1 दो 2 लक्षण होने पर भी डेंगू पॉजिटिव आ सकता है। इसलिए सभी लक्षणों के प्रकट होने का इंतजार नहीं करना चाहिए। यदि बुखार 1 से 2 दिन में ठीक ना हो तो तुरन्त डॉक्टर के पास जाकर जांच करवाना चाहिए । डेंगू, बुखार में जब प्लेटलेट्स की संख्या 20 हजार से कम हो जाती है तब स्थिति गंभीर हो सकती है। प्लेटलेट्स संख्या कम होने पर रक्त चढ़ाने की जरूरत पड़ सकती है। ऐलोपैथी चिकित्सा पद्धति में लक्षणों के आधार पर चिकित्सा की जाती है। लेकिन आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति में इसका इलाज तथा बचाव दोनों संभव है। उन्होंने बताया कि गिलोय,पपीते का पत्ता, पुनरनवा तथा सौंफ का अर्क 50-50 मिली ग्राम दिन में तीन बार लें। यह दवा डेंगू के इलाज तथा बचाव दोनों में कारगर है। उन्होंने बताया कि लोहिया अस्पताल में यह दवा उपलब्ध है। जो मुफ्त में मरीजों को दी जा रही है।

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