आम बजट, विपक्ष और सियासत

सवाल यह है कि क्या वाकई विपक्ष की आशंका जायज है? क्या आम बजट को चुनाव के दौरान पेश करने से निष्पक्ष चुनाव प्रभावित होंगे? क्या केंद्र सरकार को इस पर ध्यान दिए जाने की जरूरत है? क्या आयोग ऐसा करने से केंद्र सरकार को रोकेगी? जहां तक विपक्ष के तर्क और आशंकाएं हैं उन्हें कतई गलत नहीं कहा जा सकता है। चुनाव के दौरान आम बजट पेश करने को उचित निर्णय नहीं कहा जा सकता है।

sajnaysharmaचुनाव आयोग ने पांच राज्यों में चुनाव की तारीखों का ऐलान कर दिया है। आठ मार्च को अंतिम मतदान होगा। चुनावों के बीच केंद्र सरकार आम बजट पेश करने जा रही है। सरकार के इस कदम से विपक्ष नाराज है। इस मुद्दे को लेकर विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग से मुलाकात की। विभिन्न पार्टियों के प्रतिनिधिमंडल ने आयोग से अनुरोध किया कि वह केंद्र सरकार को चुनाव के दौरान आम बजट पेश करने से रोके। विपक्ष को आशंका है कि ऐसा कर केंद्र सरकार जनता को लुभाने के लिए लोकलुभावन घोषणाएं कर सकती है। इन घोषणाओं से भाजपा को फायदा मिलेगा। इसके अलावा विपक्ष का यह तर्क भी है कि इससे निष्पक्ष चुनाव कराने के आयोग के प्रयासों को भी झटका लगेगा। विपक्ष की मांग का केंद्र सरकार की सहयोगी शिवसेना ने भी समर्थन किया है। सवाल यह है कि क्या वाकई विपक्ष की आशंका जायज है? क्या आम बजट को चुनाव के दौरान पेश करने से निष्पक्ष चुनाव प्रभावित होंगे? क्या केंद्र सरकार को इस पर ध्यान दिए जाने की जरूरत है? क्या आयोग ऐसा करने से केंद्र सरकार को रोकेगी? जहां तक विपक्ष के तर्क और आशंकाएं हंै उन्हें कतई गलत नहीं कहा जा सकता है। चुनाव के दौरान आम बजट पेश करने को उचित निर्णय नहीं कहा जा सकता है। सरकार ने विपक्ष के दावे को खारिज कर दिया है। केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने दो टूक कहा है कि बजट को टालने की गुंजाइश नहीं है। इसे एक फरवरी को ही पेश किया जाएगा। ऐसे में इससे इंकार नहीं किया जा सकता कि केंद्र सरकार बजट की आड़ में लुभावनी घोषणाएं कर प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से इन चुनावों को प्रभावित करने की कोशिश करेगी। ऐसे में विपक्ष की चिंता को नकारा नहीं जा सकता कि इससे स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव की प्रक्रिया कमजोर होगी। विपक्ष की चिंता को आयोग ने भी स्वीकार किया है। आयोग को राजनीतिक दलों को आश्वस्त किया है कि इस मामले में गौर किया जाएगा। जाहिर है आयोग इस मामले में कोई कदम निकट भविष्य में उठा सकती है। वैसे लोकतंात्रिक ढंग से चुनी गई सरकार को विपक्ष के तर्कों और आशंकाओं पर गौर करना चाहिए। इसके अलावा उसे निष्पक्ष चुनाव की प्रक्रिया पर ध्यान देना चाहिए। सरकार को भी समझना चाहिए कि चुनाव के दौरान आम बजट पेश करने से उसकी साख प्रभावित हो सकती है। यह भविष्य के लिए भी अच्छा संकेत नहीं होगा। यह हमारे संवैधानिक चुनाव प्रक्रिया के लिए भी अच्छा नहीं होगा।

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