आपराधिक घटनाओं के खुलासे में नाकाम पुलिस को याद आ ही गया मुखबिर तंत्र

  • हत्या, लूट, डकैती समेत अनेकों घटनाओं के खुलासे में मुखबिरों से मदद लेगी पुलिस

1धनंजय शुक्ला

लखनऊ। आधुनिकता की दौड़ में पारम्परिक कार्यशैली को भूल चुकी पुलिस दोबारा मुखबिर तंत्र को मजबूत करने में जुट गई है। राजधानी में पुलिस विभाग से जुड़े पुराने मुखबिरों की सूची तैयार की जा रही है। पुलिस का हमेशा सहयोग करने वाले मुखबिर कहां हैं, इस बात की सघनता से तलाश की जा रही है। ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि बहुत जल्द अत्याधुनिक तकनीक और मुखबिर तंत्र दोनों के सामंजस्य से अपराधियों पर नकेल कसने में पुलिस को कामयाबी मिलेगी।
आपराधिक घटनाओं के खुलासे में मुखबिरों की मदद पुलिस महकमे में बीते जमाने की बात हो गयी है। एक दौर था जब मुखबिर शहर में बदमाशों की हर गतिविधि पर पैनी नजर रखते थे। पुलिस अधिकारियों को बदमाशों की जानकारी भी उपलब्ध कराते थे। इससे बदमाशों को पकडऩे और आपराधिक घटनाओं पर नियंत्रण लगाने में पुलिस को काफी सहयोग मिलता था। लेकिन समय गुजरने के साथ ही पुलिस तकनीक के जाल में इस कदर उलझी कि वह अपने सबसे अहम सूत्रधार मुखबिरों को भूलती चली गयी। लेकिन जब आपराधिक घटनाओं के खुलासे में आधुनिक तकनीक भी नाकाम साबित होने लगी, तो मुखबिरों की याद दोबारा आई। एक समय ऐसा भी था, जब पुलिस महकमे में मुखबिरों का बोल बाला था। विभाग उन पर अच्छा-खासा बजट भी खर्च करता था। लेकिन बदलते दौर में पुलिस की बेरुखी के कारण मुखबिर तंत्र कमजोर पड़ गया। मुखबिर गुमनामी की जिंदगी जी रहे हैं। उनकी सुध लेने वाला कोई नहीं है। पुलिस को महसूस होने लगा है कि यदि उनका मुखबिर तंत्र मजबूत होता, तो शहर में ताबड़तोड़ अपरााधिक घटनाएं नहीं होतीं। इन घटनाओं पर अकुंश लगाने और वारदातों का खुलासा करने के लिए पुलिस ने मुखबिरों की तलाश शुरू कर दी है। राजधानी पुलिस फिर से मुखबिरी के तंत्र को मजबूत करने का प्रयास कर रही है। उच्चाधिकारियों के निर्देश पर मुखबिरों की लिस्ट तैयार कर रही है। साथ ही वर्तमान में मुखबिर कहां हैं, इसका भी पता लगाने का प्रयास कर रही है।
सर्विलांस सेल के बाद कमजोर होता गया पुलिस का मुखबिर तंत्र
पुलिस विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि पुलिस का मुखबिर तंत्र सर्विलांस सेल का गठन होने के बाद कमजोर होता गया। इसका मुख्य कारण अधिकारियों का सर्विलांस सेल के प्रति अधिक झुकाव रहा है। बताया कि कई घटनाओं के खुलासे में सर्विलांस सेल ने अहम भूमिका निभाई है, लेकिन कुछ ऐसी भी घटनाएं हैं, जो अभी तक नहीं खुल सकी हैं। सर्विलांस सेल ने इन घटनाओं का खुलासा करने के लिए सारे तिकड़म लगा डाले फिर भी नतीजा सिफर है। ऐसे में पुलिस महकमे में लंबा कार्यकाल गुजार चुके पुलिस कर्मियों का मानना है कि यदि पुलिस का मुखबिर तंत्र मजबूत होता तो अनवर्क आउट केस अब तक खुल गए होते।

बजट के अभाव में कमजोर होता गया मुखबिर तंत्र
पुलिस विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि करीब 10-15 साल पहले पुलिस विभाग के लोग मुखबिरों पर अच्छा-ïखासा बजट खर्च करते थे। समय गुजरने के साथ ही मुखबिरों के बजट में विभाग की तरफ से कटौती की जाने लगी, जिसकी वजह से थानेदारों ने भी मुखबिरों से मुहं मोड़ लिया। आलम ये है कि वर्तमान में विभाग ने मुखबिरों के बजट को न के बराबर कर दिया है। इसलिए मुखबिर भी निष्क्रिय हो गए हैं।

रोजी-रोटी के जुगाड़ में छोड़ी मुखबिरी
अलीगंज के एक मुखबिर अभिषेक (काल्पनिक नाम) ने बताया कि पहले पुलिस मुखबिरी के बदले उन्हें पैसे देती थी। इसके अलावा अन्य सुविधाएं भी निजी तौर पर देती थी। बताया कि स्थानीय थाने में थानेदार का तबादला होने पर पूर्व थानेदार नए थानेदार को मुखबिरों से मुलाकात तक कराते थे। लेकिन अब स्थिति इसके विपरीत है। आजकल पुलिस मुखबिरों पर पैसे खर्च करना तो दूर उन्हें अपराधी की जासूसी करने पर जेब से होने वाले खर्च का भुगतान करने में भी आनाकानी करती है। यही कारण है कि शहर के मुखबिरों ने अपने परिवार का भरण-पोषण करने के लिए मुखबिरी छोड़ दी। ऐसे में पुलिस के लिए मुखबिरी करने वाले नामचीन मुखबिर अब छोटा-मोटा व्यवसाय करके अपना गुजर बसर कर रहे हैं। फिलहाल मुखबिर तंत्र को दोबारा सक्रिय करके राजधानी पुलिस हसनगंज में एटीएम लूटकाण्ड व तिहरा हत्याकाण्ड, मडिय़ांव में मिली सिर कटी लाश और जानकीपुरम व बीकेटी में डकैती के मामले का खुलासा करने की योजना बना रही है।

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