आपदा से निपटने का हो उचित प्रबंध

आज हम जो भी झेल रहे हैं उसके जिम्मेदार हम खुद भी हैं। प्रकृति के साथ खिलवाड़ बदस्तूर जारी है। जो हम प्रकृति को देंगे, निश्चित ही प्रकृति हमें वहीं वापस करेगी। जब तक हम प्रकृति के साथ खिलवाड़ बंद नहीं करेंगे तब तक हमें इससे निजात नहीं मिलेगी। आज जो भी विनाश हो रहा है वह प्रकृति के साथ खिलवाड़ का ही नतीजा है।

sanjay sharma editor5तमिलनाडु में इस समय जन-जीवन अस्त-व्यस्त है। लगातार बारिश की वजह से बाढ़ की चपेट में तमिलनाडु के कई क्षेत्र आ गए हैं। सैकड़ों लोग डूब गये हैं और काफी लोग विस्थापित हो गए हैं। सेना द्वारा राहत कार्य किया जा रहा है। लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया जा रहा है। लगातार हुई बारिश ने काफी इलाकों को डुबो दिया है और सैकड़ों लोग फंसे हुए हैं। अब तक 75 से ज्यादा लोग अपनी जान गवां चुके हैं। मुख्यमंत्री जयललिता ने राहत और पुनर्वास कार्यों के लिए कल 500 करोड़ रुपये की सहायता की घोषणा कर दी है। बारिश से प्रभावित कांचीपुरम जिले में फंसे नागरिकों को सुरक्षित निकालने के लिए सेना और वायुसेना बलों को तैनात किया गया है जहां लगातार हुई बारिश ने काफी इलाकों को डुबो दिया है और सैंकड़ों लोग फंसे हुए हैं। बारिश के पानी ने ताम्बरम में एक बड़े इलाके को भी पूरी तरह अपनी चपेट में ले लिया है। कुल मिलाकर तमिलनाडु की स्थिति बहुत दयनीय है। भारी बारिश से होने वाली तबाही सिर्फ तमिलनाडु में ही नहीं, ऐसा अधिकांश राज्यों में होता है। उड़ीसा, यूपी, बिहार, आंध्र प्रदेश, कोलकाता सहित अनेक राज्य हैं जहां भारी बारिश की वजह से जन-जीवन अस्त-व्यस्त हो जाता है साथ ही हर वर्ष सरकार को अरबों रुपए की चपत भी लगती है। बाढ़ की चपेट में आए लोगों को पुन: स्थापित करने के लिए सरकारें प्रति वर्ष कई करोड़ रुपए खर्च करती हैं।
यदि सरकार इस पैसे का उपयोग आपदा प्रबंधन से निपटने के लिए ठोस कदम उठाने में कर ले तो शायद प्रकृति की इस मार से थोड़ा बचा जा सकता है। वर्तमान में कई देशों में बेहतर आपदा प्रबंधन से लोग बड़ी से बड़ी प्राकृतिक आपदा से होने वाले नुकसान से बच रहे हैं। कुदरत की मार से प्रभावित तो होना तय है लेकिन बेहतर तैयारी पहले से कर ली जाए तो थोड़ी राहत मिल सकती है। बाढ़ की समस्या कोई नई नहीं है, लेकिन बाढ़ से प्रभावित होने वाले क्षेत्र का दायरा बढ़ता जा रहा है। पहले बाढ़ की चपेट में जहां 50 गांव आते थे, अब 100 गांव आने लगे हैं। आज हम जो भी झेल रहे हैं उसके जिम्मेदार हम खुद भी हैं। प्रकृति के साथ खिलवाड़ बदस्तूर जारी है। जो हम प्रकृति को देंगे, निश्चित ही प्रकृति हमें वहीं वापस करेगी। जब तक हम प्रकृति के साथ खिलवाड़ बंद नहीं करेंगे तब तक हमें इससे निजात नहीं मिलेगी। आज जो भी विनाश हो रहा है वह प्रकृति के साथ खिलवाड़ का ही नतीजा है। इसलिए सरकार को ऐसी समस्याओं से निपटने के लिए बेहतर आपदा प्रबंधन करने के साथ ही प्रकृति के साथ हो रहे खिलवाड़ पर सख्त प्रतिबंध लगाना चाहिये।

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