आपदा नियंत्रण पर टॉप गियर में सरकार

मुख्यमंत्री ने आपदा में मारे गए लोगों के अंतिम संस्कार के लिए जिलाधिकारियों को 10-10 हजार रूपये स्वीकृत किये.वन विभाग को दाह संस्कार के लिए लकड़ी मुफ्त में उपलब्ध करने के निर्देश दिए गए। लोक निर्माण विभाग को निर्देश दिए गए कि वो भूस्खलन वाले स्थानों पर मलबा हटाने केलिए रोबोट जेसीबी का इस्तेमाल करे। संसदीय सचिवों और विधायकों को भी आपदा प्रभावित स्थलों पर तुरंत जाकर आपदा की वस्तुस्थिति का निरीक्षण कर सरकार को रिपोर्ट देने के लिए कहा गया।

चेतन गुरुंग
देहरादून। राज्य के कई पहाड़ी जिलों में मानसून शुरू होते ही भारी बारिश ने आपदा की शक्ल अख्तियार कर ली है। पिथोरागढ़ और चमोली में ख़ास तौर पर दैवीय प्रकोप बरस पड़ा है। सरकार ने हालत की गंभीरता को महसूस करते हुए, तत्काल ही आपदा राहत और तैय्यारियों पर टॉप गियर अपना लिया है। मुख्यमंत्री हरीश रावत ने आपदा की आशंका आगे भी बने रहने की सूरत को देखते हुए अफसरों और कर्मचारियों की छुट्टियों पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। इतना ही नहीं जिन लोगों की छुट्टियाँ पहले ही मंजूर हो चुकी हैं, उनको भी काम पर वापिस बुलाने का आदेश दिया है।
रावत ने प्रदेश में बारिश के तुरंत ही विकराल भाव अपना लेने पर सरकार के शीर्ष अफसरों के साथ बैठक कर उनको आपदा से निबटने में कोई कोताही न बरतने का आदेश दिया। उन्होंने कहा की छुट्टियों पर अगले तीन महीने तक रोक लगा दी जाए। जिलों से अफसरों और कार्मिकों के तबादले भी सिर्फ जिलाधिकारी की अनापत्ति के बाद ही किये जाएं। अफसरों और कार्मिकों की कमी न हो इसके लिए पिछले एक साल में रिटायर हो चुके या तुरंत रिटायर होने जा रहे तहसीलदारों, नायब तहसीलदारों और पेशकारों को पुनर्नियुक्ति दी जाए।उनको मजिस्ट्रेट और वित्त सम्बन्धी अधिकार अलबत्ता नहीं दिए जायेंगे।रावत ने विडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये प्रदेश भर में आपदा और राहत कार्यों का जायजा सचिवालय से लिया।
मुख्यमंत्री ने आपदा में मारे गए लोगों के अंतिम संस्कार के लिए जिलाधिकारियों को 10-10 हजार रूपये स्वीकृत किये। वन विभाग को दाह संस्कार के लिए लकड़ी मुफ्त में उपलब्ध करने के निर्देश दिए गए।लोक निर्माण विभाग को निर्देश दिए गए कि वो भूस्खलन वाले स्थानों पर मलबा हटाने केलिए रोबोट जेसीबी का इस्तेमाल करे। संसदीय सचिवों और विधायकों को भी आपदा प्रभावित स्थलों पर तुरंत जाकर आपदा की वस्तुस्थिति का निरीक्षण कर सरकार को रिपोर्ट देने के लिए कहा गया। रावत ने पिथोरागढ़ और चमोली को पांच-पांच करोड़, अन्य पहाड़ी जिलों को तीन-तीन करोड़ और मैदानी जिलों को एक-एक करोड़ रूपये की राशि अतिरिक्त रूप से अविलम्ब जारी करने के भी निर्देश आपदा को देखते हुए दिए।
सीएम ने निर्देश दिए कि जिलों में एसडीआरएफ की तैनाती जिलाधिकारियों के निर्देश पर किया जाए। साथ ही होमगार्ड्स और पीआरडी के जवानों को भी उसके साथ सम्बद्ध किया जाए। पैरामेडिक भी नियुक्त करने की निर्देश दिए गए। हर संवेदनशील इलाके में एक ग्राम प्रहरी और आपदा सहायक को तैनात करने के भी आदेश रावत ने दिए।आपदा की सम्भावना बनी हुई होने के कारण यह भी तय किया गया कि जिलों में एक साथ डीएम और सीडीओ बाहर नहीं रहेंगे। मंडलायुक्त सम्बंधित जिलों के आपदा नियंत्रण केंद्र का निरीक्षण करते रहेंगे। जहां एसडीएम की कमी है वहां तहसीलदार को उसका जिम्मा सौंपने के भी निर्देश रावत ने दिए। बैठक में मुख्य सचिव शत्रुघ्न सिंह, अपर मुख्य सचिव रणवीर सिंह, प्रमुख सचिव ओमप्रकाश, उमाकांत पंवार, पुलिस महानिदेशक एमए गणपति, सचिव आनंद्बर्धन, मंडलायुक्त दरबान सिंह गर्ब्याल, सचिव शैलेश बगौली, अरविन्द सिंह हयांकी,दिलीप जावलकर,अपर पुलिस महानिदेशक अशोक कुमार, आईजी संजय गुंज्याल मौजूद थे।

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