आधुनिक जीवन शैली में फिजियोथैरेपी से हों स्वस्थ

व्यायाम का वैज्ञानिक तरीका है फिजियोथैरेपी
टेंशन और अनिद्रा में अपना सकते हैं फिजियोथैरेपी

 4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। आज की व्यस्त जीवनशैली में हम लंबे समय तक अपनी दैनिक क्रियाओं का सही ढंग से उपयोग नहीं कर पा रहे हैं और जब शरीर की सहनशीलता नहीं रहती है तो वह तरह-तरह की बीमारियों व दर्द की चपेट में आ जाता है। दवाईयां तात्कालिक राहत देती हैं लेकिन लंबे समय तक इन्हें लेना सुरक्षित नहीं माना जाता है। ऐसे में फिजियोथेरेपी बहुत कारगर उपाय है। यह बहुत कम समय में आपको बीमारी से राहत दिलायेगा। यह कहना है शहर के जाने-माने फिजियोथेरेपिस्ट रितेश यादव का।
उन्होंने कहा कि फिजियोथैरेपी यानी शरीर की मांसपेशियों, जोड़ों, हड्डियों-नसों के दर्द या तकलीफ वाले हिस्से की वैज्ञानिक तरीके से एक्सरसाइज के माध्यम से मरीज को आराम पहुंचाना है। फिजियोथैरेपी में विशेषज्ञ कई तरह के व्यायाम और नई तकनीक वाली मशीनों की मदद से इलाज करते हैं।
लाइफस्टाइल संबंधी परेशानी (मोटापा, ब्लड प्रेशर, डायबिटीज), लंबे समय तक दफ्तर के एसी में रहना, धूप के बिना रहना, लंबी सिटिंग आदि, ऐसा वातावरण जो परेशानी को बढ़ाता है, मैकेनिकल एवं ऑर्थोपेेडिक डिसऑर्डर (पीठ, कमर, गर्दन, कंधे, घुटने का दर्द या दुर्घटना के कारण भी), आहार-विहार (जोड़ों का दर्द, हार्मोनल बदलाव, पेट से जुड़ी समस्याएं), खेलकूद की चोटें, ऑर्गन डिसऑर्डर, ऑपरेशन से जुड़ी समस्याएं, न्यूरोलॉजिकल बीमारियां (मांसपेशियों का खिंचाव व उनकी कमजोरी, नसों का दर्द व उनकी ताकत कम होना), चक्कर आना, कंपन, झनझनाहट बढ़ती उम्र संबंधी बीमारियों के कारण चलने-फिरने में दिक्कत, बैलेंस बिगडऩा, टेंशन और अनिद्रा में फिजियोथैरेपी अपना सकते हैं।

फ ायदा न होने की वजह
कई बार मरीज कहते हैं कि फिजियोथैरेपी करवाकर देख ली, लेकिन कुछ फर्क ही नहीं पड़ा। इलाज से फायदा न हो तो देखना होता कि मरीज के साथ निम्न में से कोई स्थिति तो नहीं है। फिजीशियन या सर्जन के स्तर पर मरीज को समय रहते फिजियोथैरेपिस्ट के पास जाने की सलाह दी गई थी या नहीं। घुटनों का दर्द मरीज को फिजियोथैरेपी में तब आता है जबकि ऑर्थाेपेडिक सर्जन की राय में उसके घुटने लगभग खत्म हो चुके होते हैं। इसके आलावा फिजियोथैरेपिस्ट कमर गर्दन दर्द मरीज जब आता है जबकि न्यूरोफिजिशियन सर्जन की राय में उसकी नसों की दबने से ताकत कम हो चुकी होती है। सिर दर्द, चक्कर आना, चेहरे का लकवा मरीज उस स्थिति में आता है जबकि उसका केस बिगड़ या मर्ज बढ़ चुकी होती है।

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