आधा बजट खत्म, फिर भी सफाई व्यवस्था बदहाल

  • कमीशन की आड़ में पैसा लुटाने में जुटे अधिकारी

 4पीएम न्यूज़ नेटवर्कcapture
लखनऊ। साल दर साल सफाई व्यवस्था के लिये बजट बढ़ाने के बाद भी नगर निगम शहर को साफ रखने में नाकाम ही दिख रहा है। वर्तमान वित्तीय वर्ष में नगर निगम लखनऊ ने सफाई व्यवस्था के लिये लगभग 176 करोड़ का बजट पास किया है, लेकिन उसके बाद भी शहर के हालात किसी से छुपे नहीं है। हर मोड़ पर लगा गंदगी का अंबार अधिकारियों का अपने काम के प्रति सुस्त रवैये को दर्शाता है। डेंगू बुखार से शहर में अब तक सैकड़ों मरीजों की मौत हो चुकी हैं। लेकिन अधिकारी फॉगिंग व सफाई व्यवस्था दुरुस्त होने का राग अलाप रहे हैं।
नगर निगम के पास मौजूदा समय में सफाई व्यवस्था के मद्देनजर 176 करोड़ का बजट, 475 कूड़ा घर, 2500 सफाई कर्मचारी, 2046 मशीन व डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन के लिए ज्योति इन्वॉयरोटेक के करार के बाद भी शहर में सफाई व्यवस्था ध्वस्त है। निगम अधिकारियों की मानें तो अब तक आधे से ज्यादा बजट खत्म हो चुका है। ऐसे में शहर की बदहाली को लेकर अधिकारियों की उल्टी-सीधी बयानबाजी लोगों की चिन्ताओं को और बढ़ा रही है। लगभग छह महीने में आधे से अधिक बजट स्वाहा हो चुका है। अधिकारियों का कहना है कि अधिकांश बजट कूड़ा उठाने पर खर्च किया गया। आपको बता दें कि जगह-जगह कूड़ा न गिरे, इसके लिए डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन करने की जिम्मेदारी कार्यदायी संस्था ज्योति इन्वॉयरोटेक को दी गई है। लेकिन कंपनी द्वारा कार्य में लापरवाही के चलते विरोध नगर निगम अधिकारियों को झेलना पड़ता है। कंपनी पर प्लांट चलाने के लिए प्रदूषण बोर्ड की ओर से अभी तक एनओसी भी नहीं दी गई है।

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