आधार को कानूनी मान्यता

“आधार विधेयक को सरकार ने धन विधेयक के रूप में पेश किया। इसके पीछे दलील यह रही कि सबसिडी को आधार नंबरों से जोड़ा जाएगा, और इस तरह इसका वास्ता सरकार की ओर से होने वाले खर्च से है। लिहाजा इसे धन विधेयक मानने में कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए। पर विपक्ष ने इस पर कड़ा एतराज जताया।”

sanjay sharma editor5आधार यानी विशिष्ट पहचान पत्र योजना को अब कानूनी आधार देने की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। इस विधेयक को संसद की मंजूरी मिलने के बाद अब इस पर राष्ट्रपति के हस्ताक्षर और अधिसूचना जारी होने की प्रक्रिया भर बाकी है। देश में करीब सौ करोड़ लोगों के आधार कार्ड बन चुका है। इसके बनाए जाने की प्रक्रिया भी जारी है।

आधार विधेयक को सरकार ने धन विधेयक के रूप में पेश किया। इसके पीछे दलील यह रही कि सबसिडी को आधार नंबरों से जोड़ा जाएगा, और इस तरह इसका वास्ता सरकार की ओर से होने वाले खर्च से है। लिहाजा इसे धन विधेयक मानने में कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए। पर विपक्ष ने इस पर कड़ा एतराज जताया। दरअसल, भाजपा सरकार ने विपक्ष के विरोध से निपटने के लिए आधार विधेयक को धन विधेयक के रूप में पेश किया। यह सही है कि सबसिडी सरकार की तरफ से होने वाला खर्च है, पर केवल यही बात धन विधेयक के लिए काफी नहीं है। न तो इसका संबंध राजस्व से है न उधारी आदि से।

चूंकि राज्यसभा में भाजपा बहुमत में नहीं है, इसलिए सरकार को यह डर रहा होगा कि कहीं विधेयक लटक न जाए। धन विधेयक पर राज्यसभा चर्चा तो कर सकती है, पर उसकी मंजूरी जरूरी नहीं है। विधेयक को लोकसभा पिछले हफ्ते ही पारित कर चुकी थी। राज्यसभा ने उसमें पांच संशोधन सुझाए। संशोधनों के मद्देनजर सरकार ने विधेयक को फिर से लोकसभा के पटल पर रखा। लोकसभा ने सारे संशोधन खारिज कर दिए। इस तरह सरकार की मुराद पूरी हो गई। इस विधेयक का मकसद नेक है। रसोई गैस, फर्टिलाइजर आदि मदों में दी जाने वाली सबसिडी के वितरण में पारदर्शिता के लिए यह जरूरी था। इससे दुरुपयोग रोका जा सकेगा। यही आधार की सार्थकता होगी। फिर सरकार छात्रवृत्ति, पेंशन आदि को भी आधार से जोड़ सकती है।

लेकिन जिस तरह से विधेयक को संसदीय मंजूरी मिली है उससे कई सवाल भी खड़े हुए हैं। क्या आधार विधेयक की तरह सरकार क्या कई दूसरे विधेयक भी लाएगी। यह परंपरा संसदीय परिपाटी के हिसाब से सही नहीं है। क्या यह राज्यसभा का महत्व घटाने की कोशिश है या निजता में दखल डालने की कवायद। कई तरह के सवाल सदन में उठे। पर वित्तमंत्री ने भरोसा दिलाया है कि आधार का दुरुपयोग नहीं होगा। इस तरह आधार अब सबसिडी के फायदे के लिए जरूरी हो जाएगा।

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