आतंक व मानवाधिकार पर नवाज के दोहरे बोल

“क्या कश्मीर में कथित मानवाधिकार हनन का रोना रोने वाले नवाज को बलूचिस्तान और पीओके में पाक सेना द्वारा किए जा रहे अत्याचार और हत्याएं नहीं दिखाई पड़ रही हैं? क्या नवाज के ये तेवर उस परंपरागत कश्मीर नीति को लेकर चलने की है, जिस पर आज तक पाक हुक्मरान चलते आएं हैं?”

sanjay sharma editor5जिस वक्त पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ संयुक्त राष्टï्रसंघ महासभा में कश्मीर में मारे गए हिज्बुल कमांडर बुरहान वानी की शान में कसीदे पढ़ रहे थे, घाटी में कथित मानवाधिकार हनन का रोना रो रहे थे, ठीक उसी वक्त इस वैश्विक संस्था के मुख्यालय के बाहर बलूच नेशनल मूवमेंट के कार्यकर्ता पाकिस्तान से पड़ोसी देश भारत में आतंक की आपूर्ति बंद करने की मांग कर रहे थे। ये दृश्य आतंकवाद और मानवाधिकार हनन को लेकर पाकिस्तान के नजरिए को स्पष्टï करने के लिए काफी हैं। सवाल यह है कि जो पाकिस्तान आज खुद अपने पैदा किए दहशतगर्दों के निशाने पर है, आत्मघाती हमलों में रोज अपने नागरिक खो रहा है, वह भारत में आतंकियों की खेप क्यों भेज रहा है? क्या कश्मीर में कथित मानवाधिकार हनन का रोना रोने वाले नवाज को बलूचिस्तान और पीओके में पाक सेना द्वारा किए जा रहे अत्याचार और हत्याएं नहीं दिखाई पड़ रही है? क्या नवाज के ये तेवर उस परंपरागत कश्मीर नीति को लेकर चलने की है, जिस पर आज तक पाक हुक्मरान चलते आएं हैं? हकीकत यह है कि जम्हूरियत का दावा करने वाले पाक हुक्मरानों के हाथ सेना, खुफिया एजेंसी व कट्टरपंथियों ने बांध रखे हैं। हालांकि यहां के उदारवादियों का धड़ा भारत से शांति का पक्षधर है। पाक सेना और खुफिया एजेंसियां नहीं चाहतीं कि भारत के साथ शांति स्थापित हो क्योंकि इससे उनकी अहमियत समाप्त हो जाएगी। लिहाजा वे आतंकियों को प्रशिक्षण व संरक्षण देने का काम कर रही हैं। इतिहास गवाह है कि सेना के बिना कोई भी हुक्मरान पाकिस्तान में बहुत दिन तक सत्ता में काबिज नहीं रह सका है। लिहाजा जब भी भारत-पाक रिश्ते पटरी पर आते हैं, आतंकवादी गतिविधियां तेज हो जाती हैं। आतंकवाद को प्रश्रय देना पाक की आर्थिक नीति का भी हिस्सा है। आर्थिक रूप से खोखला हो चुका पाक आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई के नाम पर अमेरिका और अन्य देशों से मदद ले रहा है। लेकिन पाक की यह चाल अब अमेरिका व दूसरे राष्टï्र समझ चुके हैं। लिहाजा अमेरिका पाक को आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई न करने पर मदद रोकने की धमकी देता रहता है। जहां तक भारत-पाक संबंधों का सवाल है, यह जटिल और नाजुक है। ताजा आतंकी हमलों के बाद तो भारत के विपक्षी दल भी पाक से दूसरे लहजे में बात करने की वकालत कर रहे हैं। कांग्रेस नेता शशि थरूर भी मानते है कि नवाज ने भारत को निराश किया है। लेकिन यह नहीं  भूलना चाहिए कि युद्ध नहीं संवाद से ही समस्या का समाधान निकलता है।

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