आतंक का साया

भारत के लिए वैसे भी आतंकवाद कोई नया मुद्दा नहीं है। भारत तो कई दशकों से आतंकी साये में है। कश्मीर में तो आए दिन कोई न कोई आतंकवादी घटना होती ही रहती है। इसके अलावा अन्य भारत-पाकिस्तान बार्डर वाले क्षेत्र में आतंकवादी लोगों को अपना निशाना बनाते हैं।

sanjay sharma editor5पेरिस में हुए आतंकी हमलों के बाद से भारत भी काफी सतर्क हो गया है। केन्द्र सरकार द्वारा सभी राज्यों को हाई अलर्ट भेजा जा चुका है। केन्द्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने भी इस मुद्दे पर कहा था कि आईएसआईएस के हमले के खतरे के मद्देनजर पूरे देश में अलर्ट जारी कर दिया गया है। उनका कहना था कि बिना किसी पूर्व सूचना के भी कोई भी संकट कभी भी कहीं भी आ सकता है। यह सच है कि कोई भी आतंकी घटना अचानक ही हुई है। चाहे वह भारत में हो या किसी अन्य मुल्क में। आतंकवादी अपनी योजना की रणनीति बहुत ही गोपनीय तरीके से बनाते हैं। उनकी रणनीति ऐसी होती है कि बड़े-बड़े खूफिया तंत्र इसका पता नहीं लगा पाते। आतंकियों का नेटवर्क भी कितना मजबूत है इससे सभी वाकिफ है। फिलहाल भारत सरकार आईएसआईएस के खतरे से शुरू से आगाह करती आ रही है।
भारत के लिए वैसे भी आतंकवाद कोई नया मुद्दा नहीं है। भारत तो कई दशकों से आतंकी साये में है। कश्मीर में तो आए दिन कोई न कोई आतंकवादी घटना होती ही रहती है। इसके अलावा अन्य भारत-पाकिस्तान बार्डर वाले क्षेत्र में आतंकवादी लोगों को अपना निशाना बनाते हैं। भारत में कई बार आतंकवादी संगठनों ने खून की होली खेली जिससे हर बार कई बच्चे अनाथ हुए, कई घर बर्बाद हुए। भारत लगातार अन्तरराष्टï्रीय मंच पर आतंकवाद के विरुद्ध आवाज भी उठाता रहा है लेकिन इस पर विश्व के बड़े देशों ने बोलना भी जरूरी नहीं समझा। आज जब पेरिस पर आतंकी हमला हुआ तो सभी पश्चिमी देश तिलमिला गए हैं। अब वह आतंकवाद के लिए पूरे विश्व को एकजुट करने का आह्वïान कर रहे हैं। न्यूयार्क में 9/11 के हमले से पहले पश्चिमी देश इस आग की तपिश से वाकिफ न थे। उन्हें आतंकवाद से पीडि़त एशिया के देशों से कोई सरोकार नहीं था। इसीलिए आतंक और अलगाववादी धड़ों को वे हथियार बेचते थे। ऐसा करते वक्त उन्हें अंदाजा नहीं था कि वे ऐसे भस्मासुर पैदा कर रहे हैं, जो कभी उन्हें ही खाक करेंगे। 9/11 के हमले के बाद अमेरिका और उसके पिछलग्गुओं की आंखें थोड़ी-सी खुलीं। इस हमले के बाद इन देशों ने खुद को महफूज बनाने के लिए आतंकवाद प्रभावित देशों के साथ थोड़ी-बहुत सहमति बनाई। यहां भी उनकी प्राथमिकता पश्चिम की ही रही। उन्होंने स्वयं को तो अधिक से अधिक सुरक्षित करने की कोशिश की, पर आतंकवादी गुटों के साथ दोहरा मानदंड अपनाया। जिस आतंकवादी संगठन से नुकसान था उसे जड़ से उखाड़ फेकने के लिए पूरा का पूरा देश तबाह कर दिया। अफगानिस्तान इसका बड़ा उदाहरण है। यही नहीं, आतंकवाद से प्रभावित देशों ने भी एक-दूसरे से खुन्नस निकालने के लिए इसी तरह के जल्लादों का सहारा लिया। कश्मीर में कायम दहशतगर्दी इसका उदाहरण है।

Pin It