आतंकी हमला, चार्जशीट और सेना की चुनौतियां

अहम सवाल यह है कि आतंकी हमलों में पाक समर्थित आतंकियों के शामिल होने का सबूत कई बार जांच एजेंसियां पेश कर चुकी हैं। सरकार की तरफ से पाकिस्तान को सबूत भी पेश किए जा चुके हैं लेकिन पाक सरकार मानने को तैयार नहीं है। ऐसे में उसे विश्व स्तर पर अलग-थलग करने का कूटनीतिक प्रयोग सफल हो सकता है।

sajnaysharmaपठानकोट वायुसेना स्टेशन पर हुए आतंकी हमले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की तरफ से दाखिल आरोप पत्र में पाकिस्तान के आतंकी समूह जैश-ए-मोहम्मद के प्रमुख अजहर मसूद और संगठन के तीन अन्य आतंकियों के नाम हैं। हमले के लगभग एक साल बाद पंचकुला की विशेष अदालत में दाखिल विस्तृत आरोप पत्र में एनआईए ने भारत में अशांति फैलाने में जैश-ए-मोहम्मद की भूमिका को उजागर किया और संगठन की घृणित साजिशों का खुलासा किया है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया है कि आतंकी हमले की जानकारी खूफिया एजेंसियों की तरफ से पहले दी गई थी। उसके बावजूद लापरवाही बरती गई। ऐसे में हमारी सरकार व सेना को उन खामियों को दूर करने पर ध्यान देना होगा, जिनकी वजह से आतंकियों को दुस्साहस करने का मौका मिला और हमारे सात जवानों को शहादत देनी पड़ी। अब देश की सीमाओं की चौकसी में जुटी सेना को हर समय अलर्ट रहने और चुनौतियों से कठोरतापूर्वक निबटने का जज्बा बनाये रखने की जरूरत है।
देश का हृदय मानी जानी वाली संसद पर हमला हो, माया नगरी मुंबई पर अटैक हो या पठानकोट एयरबेस और उड़ी में सेना के ठिकानों पर हमला, इन सब हमलों में कहीं न कहीं सुरक्षा में खामी की बात सामने आई है। आतंकियों ने जितने भी हमले किए हैं, उन सबको अंजाम देने से पहले एक-एक बिन्दु का बारीकी से अध्ययन किया गया था। उन्हें मालूम था कि किस वक्त हमला करने पर ज्यादा नुकसान पहुंचाया जा सकता है। इस बात का सबूत हमलों की जांच करने वाली एजेंसियों की तरफ से समय-समय पर पेश किया जा चुका है। लेकिन सरकार की लाख कोशिशों और इंटेलीजेंस की तरफ से घटना पूर्व प्रस्तुत रिपोर्ट के बावजूद हम पठानकोट और उड़ी में आतंकियों को रोकने में कामयाब नहीं हो पाये। एनआईए ने पठानकोट एरयबेस पर आतंकी हमले की चार्जशीट में पाकिस्तान के आतंकी संगठन और उसके मास्टर माइंड अजहर मसूद का हाथ बताया है। जो कि वर्ष 1999 में इंडियन एयरलाइन्स के अपहृत विमान के यात्रियों की सुरक्षित रिहाई के बदले में छोड़ा गया था। अजहर पाकिस्तान में खुलेआम घूम रहा है। ऐसे में अगर पठानकोट एयरबेस पर हमले से जुड़े सबूतों का इस्तेमाल हमारी सरकार अंतरराष्ट्रीय मंचों पर मजबूती से करेगी, तो पाकिस्तान पर दबाव बनाने में काफी सहयोग मिलेगा। इतना ही नहीं पाकिस्तान के दोहरे चरित्र को एक बार फिर दुनिया के सामने उजागर करने और उसको अलग-थलग करने का मौका भी हमें मिलेगा। यदि ऐसा हुआ तो आतंकियों को दिमाग और खाद बीज देने का काम करने वालों पर रोक लगाई जा सकेगी।

Pin It