आतंकवाद पर न हो दोहरा मापदंड

लंबे समय से अधिकांश सम्मेलनों में आतंकवाद जैसे मुद्दे पर बात की जाती है और इससे निपटने पर प्रतिबद्धता जाहिर की जाती है लेकिन परिणाम हम सबके सामने है। आतंकवाद पर लगाम तो लग नहीं रही बल्कि पूरे देश में आतंकवादियों की सक्रियता बढ़ती जा रही है।

sanjay sharma editor5पेरिस में भीषण आतंकी हमले की गंूज पूरे विश्व ने सुनी। सभी ने एक स्वर में इसकी भत्र्सना की। सभी देशों के प्रमुखों ने इस हमले की निंदा की और फ्रांस के साथ खड़े होने की बात कही। यह पहल अच्छी है। ऐसे हमलों की निंदा होनी भी चाहिए, लेकिन जिस गति से आईएसआईएस की सक्रियता पूरे विश्व में बढ़ रही है उसको देखते हुए अब जरूरी हो गया है कि पूरा विश्व आतंकवाद से लडऩे के लिए एक मंच पर आए। जी-20 सम्मेलन में भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से लेकर अमेरिका के राष्टï्रपति बराक ओबामा तक ने कहा कि आतंकवाद की चुनौती से निपटने के लिए पूरे विश्व को एकजुट होने की जरूरत है। जी-20 सम्मेलन में ब्रिक्स देशों की ओर से भी पूरी प्रबलता के साथ यह कहा गया कि आतंकवाद से मिलकर लडऩे की जरूरत है।
लंबे समय से अधिकांश सम्मेलनों में आतंकवाद जैसे मुद्दे पर बात की जाती है और इससे निपटने पर प्रतिबद्धता जाहिर की जाती है लेकिन परिणाम हम सबके सामने है। आतंकवाद पर लगाम तो लग नहीं रही बल्कि पूरे देश में आतंकवादियों की सक्रियता बढ़ती जा रही है। पिछले कुछ वर्षों में अमेरिका के नेतृत्व में जिस तरीके से आतंकवाद से निपटने की कोशिश की जा रही है उससे स्थितियां सुधरने की बजाए और बिगड़ गई हैं। इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि आतंकवाद जैसे मुद्दों पर दोहरी नीति अपनायी जा रही है। आतंकवादी संगठनों में भी भेद किया जा रहा है। जिस आतंकी संगठन से अमेरिका को खतरा है उसके खिलाफ अमेरिका खुलकर कार्रवाई करता है, लेकिन जब दूसरे देश की बात आती है तो आतंकवाद का मानक बदल देता है। इस दोहरी नीति का सबसे बड़ा खामियाजा भारत को भुगतना पड़ रहा है। भारत को आए दिन अस्थिर और अशांत करने वाले आतंकी संगठनों का पालन-पोषण पाकिस्तान कर रहा है और इसकी जानकारी अमेरिका से लेकर पूरे विश्व को है फिर भी कोई कार्रवाई नहीं की जाती है। संयुक्त राष्टï्र संघ के अधिवेशन में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आतंकवाद के मुद्दे को कई बार उठाया है फिर भी अमेरिका भारत के पक्ष में कभी खड़ा नहीं हुआ, अलबत्ता पाकिस्तान को और आर्थिक से लेकर सैन्य मदद मुहैया करा रहा है। अमेरिका की यह कैसी नीति है। अपने पर आए तो पूरे देश का वजूद मिटा दो, दूसरे पर आए तो कूटनीति करो। पेरिस का आतंकी हमला काफी कुछ वैसा ही था जैसा 2008 में मुंबई 26/11 में हुआ था। मुंबई में हुए आतंकी हमले की साजिश पाकिस्तान में रची गई थी, यह सच सामने आने के बाद भी पाक के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई। अमेरिका की आतंकवाद के खिलाफ यह कैसी लड़ाई है।

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