आज आसमान से बरसेगा अमृत

  • शरद पूर्णिमा पर पृथ्वी के सबसे निकट होता है चन्द्रमा

 4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
captureलखनऊ। शरद पूर्णिमा के त्यौहार को लेकर लोगों में काफी उत्सुकता दिखाई दे रही है। आज की रात चांद निकलने के साथ ही घरों और मंदिरों में पूजा-अर्चना का दौर शुरू हो जायेगा। मंदिरों में भगवान को धवल पोशाक पहनाया जायेगा। भगवान को खीर का भोग लगाया जायेगा। इसके साथ ही लोग खुले आसमान के नीचे खीर बनाकर रखेंगे। ऐसी मान्यता है कि शरद पूर्णिमा की रात आसमान से अमृत की बरसात होती है। इसलिए खीर के भोग को प्रसाद के रूप में खाने पर व्यक्ति निरोग और दीर्घायु होता है।
शारद पूर्णिमा की रात्रि पर चंद्रमा पृथ्वी के सबसे निकट होता है। अपनी 16 कलाओं से परिपूर्ण चंद्रमा का ओज, सबसे तेज और ऊर्जावान होता है। इसलिए पूर्णिमा के दिन चंद्रमा से होने वाले रोगों से मुक्ति के लिए खीर का भोग लगाया जाता है। इसे दो से तीन घंटे तक चन्द्रमा की रोशनी में खुले आसमान के नीचे रखते हैं। ऐसा माना जाता है कि इससे दमा, पित्त संबंधी विकार और मानसिक बीमारियों से छुटकारा मिलता है। इतना ही नहीं व्यक्ति साल भर निरोगी रहता है। इतना ही नहीं इस व्रत को विशेष रूप से लक्ष्मी प्राप्ति के लिए किया जाता है। इस दिन जागरण करने वाले की धन-संपत्ति में वृद्धि होती है। शरद पूर्णिमा को कोजागरी पूर्णिमा या रास पूर्णिमा भी कहते हैं हिन्दू पंचांग के अनुसार आश्विन मास की पूर्णिमा सबसे खास होती है। पूरे साल में केवल इसी दिन चंद्रमा सोलह कलाओं से परिपूर्ण होता है। मान्यता है कि इस दिन चंद्रमा की किरणें विशेष अमृतमयी गुणों से युक्त रहती हैं । जो कई बीमारियों का नाश कर देती हैं।

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