आजादी का जश्न

आजादी के कई दशक बीत sanjay sharma editor5जाने के बाद आज सरकार तमाम तरह की आवासीय योजनाएं, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना, मनरेगा समेत तमाम योजनाएं चला रही है लेकिन गरीबों की समस्याओं का समाधान नहीं निकल पा रहा है। सडक़ों पर खुले आसमान के नीचे रात बिताने वालों, कूड़े के ढेर से जूठन उठाकर खाने वालों और दिन भर कड़ी मेहनत के बाद भी परिवार का पेट न भर पाने वाले लोगों की संख्या कम नहीं हो रही है। यह समस्या कम हो तभी यह लोग वास्तविक आजादी का एहसास कर पायेंगे।
देश भर में आजादी का जश्न मनाया गया। हम सबने मिलकर 69वीं सालगिरह धूमधाम से मनाई। प्रधानमंत्री ने लाल किले की प्राचीर से एक बार फिर जनता को सपनों के दुनिया की सैर कराने का प्रयास किया। सरकार जनता के विकास का रथ सरपट दौड़ाने में कामयाब हो रही है, इस बात की यकीन भी दिलाया लेकिन देश में लाखों की संख्या में झुग्गी-झोपड़ी और फुटपाथ पर जीवन बिताने वाले लोग आज तक आजादी का एहसास नहीं कर पा रहे हैं। ऐसे लोगों के जीवन में बंदिशें, मुश्किलें और भुखमरी जोंक की तरह चिपकी हुई हैं। सरकार की किसी भी योजना का लाभ ऐसे लोगों तक नहीं पहुंच पा रहा है। इसलिए गरीबों की हालत जस की तस बनी हुई है।
भारत को आजादी दिलाने के लिए हजारों वीर सपूतों ने अपनी जान की कुर्बानी दे दी। अपना सुख-चैन, घर परिवार छोडक़र आजादी की लड़ाई में हिस्सा लिया। खेलने-कूदने की उम्र में आजादी के दीवाने जेल में डाल दिए गए। राजगुरु, सुखदेव और भगत सिंह समेत अनेकों नौजवानों ने हंसते-हंसते फांसी के फंदे को चूम लिया। अपनी जान देकर जनता में देशभक्ति जगाने का प्रयास किया। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और नेताजी सुभाष चन्द्र बोस के नेतृत्व में आजादी की लड़ाई लड़ी गई। लड़ाई का तरीका भले ही अलग-अलग था लेकिन लक्ष्य एक था, देश को आजादी दिलाना। आखिरकार देश को आजादी मिली लेकिन आजादी मिलने के बाद देशभक्ति से ओतप्रोत नेताओं को सत्ता आकर्षित करने लगी। इसके बाद शुरू हुआ सत्ता और कुर्सी हासिल करने का खेल। जो बदस्तूर जारी है। उस दौर में लोगों को सत्ता आकर्षित जरूर करती थी लेकिन देशभक्ति का जज्बा कम नहीं था। नेताओं को आम जनता की समस्याओं की जानकारी होती थी। वह जो भी नीतियां बनाते थे, उसमें आम जनता और किसानों का हित सर्वोपरि होता था। आजकल सरकार की तरफ से नीतियां तो बनती हैं लेकिन उसका लाभ आम जनता तक नहीं पहुंच पाता। आलम ये है कि अमीर और अमीर होता चला जा रहा है। गरीब और गरीब होता जा रहा है। महंगाई चरम पर है। सरकार तमाम तरह की आवासीय योजनाएं, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना, मनरेगा समेत तमाम योजनाएं चला रही है लेकिन गरीबों की समस्याओं का समाधान नहीं निकल पा रहा है। सडक़ों पर खुले आसमान के नीचे रात बिताने वालों, कूड़े के ढेर से जूठन उठाकर खाने वालों और दिन भर कड़ी मेहनत के बाद भी परिवार का पेट न भर पाने वाले लोगों की संख्या कम नहीं हो रही है।
ऐसे में हमें अमीर और गरीब सबका समान विकास करना होगा। जब तक देश का कोई भी गरीब भूखा और नंगा रहेगा। खुले आसमान के नीचे रात बिताने को मजबूर होगा। वह आजादी को महसूस नहीं कर पायेगा। इसलिए सरकार को ठोस कदम उठाना होगा।

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