आखिर हो ही गया अखिलेश यादव के मंत्रिमंडल का विस्तार

जातीय संतुलन साधने की कोशिश की गई आज के विस्तार में
बंशीधर बौद्ध जैसे गरीब विधायक को मंत्री बनाकर अखिलेश ने पेश की मिसाल

 4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
M1लखनऊ। मंत्रिमंडल शपथ ग्रहण समारोह में आज जब कैबिनेट मंत्री के रूप में बलवंत सिंह उर्फ रामू वालिया का नाम पुकारा गया तो सपा के खेमे में खलबली मच गई। सपा के मंत्री भी आपस में पूछते नजर आए कि ये कौन है। बाद में पता चला कि ये पंजाब के पूर्व सांसद हैं जो 1996 में भारत सरकार में सोशल वेलफेयर मंत्री थे। उनको मिलाकर आज के मंत्रिमंडल में पांच काबीना मंत्री आठ राज्यमंत्री (स्वत्रंत प्रभार) तथा आठ राज्यमंत्री बनाए गए हैं, मगर मंत्रिमंडल पर सवाल खड़े हो रहे हैं। लोगों को लगता था कि इस मंत्रिमंडल विस्तार में अच्छी छवि के लोगों को जगह मिलेगी, मगर कुछ विवादित नाम भी आज मंत्रिमंडल में जगह पा गए।
आज के मंत्रिमंडल शपथ ग्रहण समारोह में आजम खां की अनुपस्थिति एक बार फिर चर्चा का विषय बनी रही। अशोक बाजपेयी को मंत्रिमंडल में न लेने पर भी तरह-तरह की चर्चा हुई और सभी ने कहा ये गलत किया गया। जो मंत्री बने हैं वह तो खासे उत्साहित नजर आए मगर जो मंत्री नहीं बन पाए वह इस मंत्रिमंडल पर सवाल उठाते नजर आए। मंत्रिमंडल में जातीय संतुलन भी साधने की कोशिश की गई। पांच मुस्लिम नेताओं को शामिल करके और उन्हें प्रोन्नति देकर अल्पसंख्यक समुदाय को साधने की कोशिश की गई। तो दूसरी ओर एक महिला को भी मंत्रिमंडल में स्थान दिया गया। क्षत्रिय समुदाय का भी ध्यान रखा गया।

सेल्फी लेने में जुटे रहे सांसद धर्मेन्द्र यादव
धर्मेन्द्र यादव की सिफारिश पर ही बदायूं जनपद के ओमकार सिंह यादव को राज्यमंत्री बनाया गया है। धर्मेन्द्र यादव आज के कार्यक्रम में बेहद खुश नजर आए और सेल्फी लेते दिखाई दिए।

मुलायम को भूले मुख्य सचिव आलोक रंजन
कार्यक्रम का संचालन मुख्य सचिव आलोक रंजन कर रहे थे। उन्होंने सरदार वल्लभ भाई पटेल की प्रतिमा पर माल्यार्पण करने के लिए राज्यपाल मुख्यमंत्री से अनुरोध किया मगर वह मुलायम सिंह का नाम लेना भूल गए। मुख्यमंत्री ने मंच से उतरते-उतरते मुख्य सचिव का हाथ पकडक़र कहा कि नेता जी को बुलाइए। इसके बाद हड़बड़ाए चीफ सेके्रटरी ने माल्यार्पण के लिए नेताजी से अनुरोध किया, मगर दुखद बात ये थी। आज प्रख्यात समाजवादी आचार्य नरेन्द्र देव की भी जयंती थी, मगर न वहां नरेन्द्र देव की फोटो थी और न ही उनका जिक्र किया गया।

गोप का जलवा, राजा भैया उठकर पहुंचे गोप के पास
आज के मंत्रिमंडल में सबसे ज्यादा जलवा अरविंद सिंह गोप का दिखाई दिया। किसी जमाने में ठाकुरों की राजनीति राजा भैया के इर्द-गिर्द घूमती थी, मगर अब सपा में क्षत्रिय नेताओं में सबसे ज्यादा महत्व गोप को दिया जा रहा है। आज सबसे पहले शपथ भी गोप ने ली। वक्त का तकाज़ा था कि आज राजा भैया अपनी कुर्सी से उठकर दूसरी तरफ बैठे गोप से मिलने पहुंचे।

एक मंत्री शपथ लेने पहुंचे ही नहीं
शपथ लेने आए मंत्रियों में अलग ही उत्साह नजर आ रहा था। जिन मंत्रियों को शपथ दिलाई जानी थी उनकी कुर्सियां आगे लगवाई गई थीं। शपथ लेने वाले मंत्री उठ-उठ कर अपने समर्थकों को देख रहे थे कि उनके समर्थक आए हैं या नहीं। राज्यमंत्री के रूप में हेमराज का नाम जब पुकारा गया तो वह वहां मौजूद ही नहीं थे। इसके बाद तय किया गया कि तीन बजे छूटे हुए मंत्री को शपथ दिलाई जाएगी।

ये बने मंत्री
कैबिनेट मंत्री – अरविन्द कुमार सिंह ’गोप‘, कमाल अख्तर, विनोद कुमार सिंह उर्फ पंडित सिंह, बलवंत सिंह उर्फ रामू वालिया, साहब सिंह सैनी
राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार- रियाज अहमद, फरीद महफूज किदवई, मूलचंद चौहान, रामसकल गुर्जर, नितिन अग्रवाल, यासर शाह, मदन चौहान, शादाब फातिमा
राज्यमंत्री – राधेश्याम सिंह, शैलेन्द्र यादव ललई, तेज नारायण पाण्डेय उर्फ पवन पाण्डेय, सुधीर कुमार रावत, ओमकार सिंह यादव, हेमराज वर्मा, लक्ष्मीकांत उर्फ पप्पू निषाद, वंशीधर बौद्ध

सीएम के रोकने पर भी नहीं माने राज्यपाल, बीच में रुकवा दिया राष्टï्रगान

सपा और कांग्रेस नेताओं ने कहा कि मोदी को खुश करने के लिए राज्यपाल ने किया मर्यादा का उल्लंघन

आज के शपथ ग्रहण में राजभवन में जो शर्मनाक घटना घटी उसने राजभवन को शर्मिंदा कर दिया। हुआ यूं कि जब सभी मंत्रियों ने शपथ ले ली तो राष्टï्रगान शुरू हो गया। राष्टï्रगान शुरू हुए लगभग 15 सेकंड ही बीते थे कि राज्यपाल राम नाईक अपना हाथ हिलाकर राष्टï्रगान रोकने का इशारा करने लगे। सब लोग राज्यपाल के इस व्यवहार पर हैरान थे। मुख्यमंत्री भी यह देखकर भौचक्के हो गए और हाथ पकडक़र राज्यपाल को बताने लगे कि राष्टï्रगान हो रहा है, मगर राज्यपाल ने राष्टï्रगान रुकवाया और फिर सभी को एकता की शपथ दिलाई। उसके बाद फिर से राष्टï्रगान शुरू हुआ। राज्यपाल के इस कदम ने एक नए विवाद को जन्म दे दिया। दरअसल आज सरदार वल्लभ भाई पटेल की जयंती को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी धूमधाम से मना रहे हैं। उन्होंने आज खुद लोगों को एकता की शपथ दिलाई। देश के बाकी राज्यों में भी आज एकता की शपथ होनी थी, मगर राजभवन को यह बात पहले याद नहीं आई और जब कार्यक्रम के बाद राष्टï्रगान शुरू हुआ तो गवर्नर को लगा कि एकता की शपथ अगर नहीं हुई तो इसके राजनैतिक नुकसान हो सकते हैं। लिहाजा उन्होंने राष्टï्रगान रूकवाकर शपथ करा दी। आज राजभवन में जो हुआ वह आपराधिक कृत्य की श्रेणी में आता है। राष्टï्रगान शुरू होने के बाद उसे बीच में नहीं रोका जा सकता। विपक्ष ने भी गवर्नर पर हमला करने का मौका नहीं छोड़ा। सपा के वरिष्ठï नेता सीपी राय ने ट्वीट करके कहा कि गवर्नर संघ से आते हैं और संघ राष्टï्रगान को नहीं मानता। गवर्नर उसी परम्परा का पालन कर रहे हैं। कांग्रेस नेता सिराज मेंहदी ने कहा कि गवर्नर ने यह काम मोदी को खुश करने के लिए किया है। राजभवन ने इस विवाद पर कहा है कि गवर्नर राष्टï्रगान सुन नहीं पाए थे। मगर राज्यपाल ने खुद कहा था कि राष्टï्रगान रोको।

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