आखिर हटा ही दिए गए सजायाफ्ता प्रमुख सचिव नियुक्ति, सबसे पहले 4पीएम के संपादक संजय शर्मा ने दायर की थी नौकरी से बर्खास्तगी की पीआईएल

भ्रष्टïाचार के आरोप में आईएएस राजीव कुमार को सुनाई गई थी 3 साल की सजा
सजायाफ्ता आईएएस ही तैनात करता रहा प्रदेश में अफसर
भ्रष्टïाचार में डूबे अफसर कर लेते हैं सब कुछ मैनेज

Yअजय कुमार पांडेय
लखनऊ। आखिर 4 साल के बाद सजायाफ्ता आईएएस राजीव कुमार को प्रमुख सचिव नियुक्ति से बाहर का रास्ता दिखा ही दिया गया। राजीव कुमार को प्रमुख सचिव नियुक्ति के पद से हटाने को लेकर हाईकोर्ट में हुई याचिका में 26 फरवरी को सरकार को जवाब देना है। पिछले दिनों में जिस तरह हाईकोर्ट ने सरकार के कुछ निर्णय को लेकर तीखी टिप्पणियां की हैं। उसके चलते सरकार नहीं चाहती थी कि इस मामले में उसके सामने असहज स्थिति पैदा हो, लिहाजा उससे पहले ही सरकार ने राजीव कुमार को हटा दिया। इस मामले में सबसे पहली जनहित याचिका वीकएंड टाइम्स/ 4पीएम के संपादक संजय शर्मा ने दायर की थी, जिसमें राजीव कुमार को सेवा से बर्खास्त करने की मांग की गई थी। इस याचिका पर राज्य और केन्द्र को भी नोटिस जारी कर दिए गये थे।
नोयडा में अपनी तैनाती के दौरान राजीव कुमार ने जमीन घोटाले में खासी सुर्खियां बटोरी थी। इस मामले की सीबीआई से जांच हुई थी, जिसके बाद राजीव कुमार को तीन साल की सजा और एक लाख रुपए का जुर्माना लगाया गया था। इस सजा के बाद राजीव कुमार को कुछ दिनों के लिए पद से हटा दिया गया था।
इसके बाद राजीव कुमार हाईकोर्ट गए थे और सिंगल बेंच से अपनी सजा पर स्टे ले आए थे। इसके बाद सरकार ने उनको दुबारा प्रमुख सचिव नियुक्ति के पद पर तैनात कर दिया था। एक सजायाफ्ता आईएएस के प्रमुख सचिव के नियुक्ति के पद पर तैनात होने से ना सिर्फ नौकरशाही बल्कि आम लोगों में भी बेहद चर्चा थी कि आखिर किसी सजायाफ्ता अफसर को ऐसी कमान कैसे सौंपी जा सकती है।
सरकार के इस फैसले के खिलाफ संजय शर्मा ने इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में जनहित याचिका दायर की थी। इस याचिका में कहा गया था कि जब 2 साल की सजा होने के बाद किसी व्यक्ति को चुनाव लडऩे से रोक दिया जाता है तो फिर 3 साल की सजा के बाद किसी आईएएस को नौकरी कैसे करने दी जा सकती है। उन्होंने अपनी याचिका में राजीव कुमार को नौकरी से बर्खास्त करने का न्यायालय से अनुरोध किया था।
इस याचिका के दायर होने के बाद हडक़ंप मच गया था। सरकार की तरफ से भारी संख्या में तैनात वकीलों ने इस याचिका को यह कहकर रद्द करने की मांग की थी कि राजीव कुमार को कोर्ट से स्टे मिला हुआ है, मगर न्यायालय ने इस मामले पर राज्य और केन्द्र दोनों को नोटिस जारी कर दिया था।

सभी दागी अफसरों को मिलेगी सजा: वैभव
आम आदमी पार्टी के प्रवक्ता वैभव माहेश्वरी ने कहा है कि ऐसे नौकरशाह जो अपना कर्तव्य भूलकर सिर्फ भ्रष्टïाचार में डूबे हुए हैं। उनके खिलाफ कठोरतम कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि नौकरशाहों पर बहुत बड़ी जिम्मेदारी होती है। दु:ख की बात है कि कुछ नौकरशाह भी राजनेताओं के साथ मिलकर भ्रष्टïाचार में लिप्त हो जाते हैं और पैसे के दम पर अच्छी पोस्टिंग पाते हैं। इस घिनौने गठजोड़ का खात्मा होना ही चाहिए।

सिस्टम को बरबाद कर देते हैं भ्रष्टï अफसर: शरद प्रधान
अखण्ड प्रताप सिंह और नीरा यादव के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर कर उन्हें हटवाने वाले वरिष्ठï पत्रकार शरद प्रधान का कहना है कि चंद भ्रष्टï अफसरों के कारण पूरा सिस्टम बरबाद हो गया है। उन्होंने कहा कि यह हैरानी की बात है कि चार साल तक आखिर ऐसे सजायाफ्ता अफसर को नौकरी क्यों करने दी गई। उन्होंने कहा कि अभी भी कई दागी अफसर अच्छी जगह पर मौजूद हैं। उन्हें भी चिन्हित करके उनके खिलाफ कठोरतम कार्रवाई होनी चाहिए।

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