आखिर चुनाव से पहले मोदी क्यों बोले जय श्रीराम…!

  • लखनऊ में मोदी के जय श्रीराम के उद्घोष से राजनीतिक गलियारों में चर्चा

संजय शर्मा
13-oct-page-1a1लखनऊ। पीएम मोदी लखनऊ की रामलीला में क्या बोलेंगे, इसकी उत्सुकता भाजपा से ज्यादा विपक्षी खेमे में थी। माना जा रहा था कि रावण वध से पहले पीएम मोदी सर्जिकल स्ट्राइक का जिक्र करेंगे और सेना के बहाने भाजपा सरकार की ताकत का बखान करेंगे। मगर इसे विपक्ष का हमला कहें या फिर मोदी की रणनीति, उन्होंने सेना का नाम भी नहीं लिया। युद्ध का जिक्र किया तो जिक्र जटायु का किया। मगर सबसे ज्यादा रोचक बात यह थी कि पीएम मोदी ने अपने भाषण की शुरुआत जय श्रीराम के उद्ïघोष से की और अंत भी जय श्रीराम के उद्ïघोष से किया। ऐसे में बड़ा सवाल यह खड़ा होता है कि क्या यूपी चुनाव में एक बार फिर राम और राम मंदिर चुनावी मुद्दा बनने जा रहे हैं।
पीएम मोदी के लखनऊ आने से पहले ही भाजपा कार्यकर्ताओं ने लखनऊ को होर्डिंगों और बैनरों से सजा दिया था। इसमें मोदी के छप्पन इंच के सीने से लेकर सर्जिकल ऑपरेशन में मोदी की हिम्मत का जिक्र था। इन होर्डिंगों को देखकर सहज ही अंदाजा लगाया जा रहा था कि मोदी एक सोची समझी रणनीति के तहत लखनऊ आ रहे हैं। भाजपा को नजदीक से जानने वाले लोग भी दावा कर रहे थे कि मोदी लखनऊ आकर सेना के ऑपरेशन का जिक्र करेंगे और इस बहाने यूपी चुनाव से पहले सर्जिकल ऑपरेशन को मुद्ïदा बना देंगे। भाजपा कार्यकर्ताओं ने इसकी जमीन भी तैयार कर दी थी। मगर विपक्ष उससे पहले ही मोदी की इस रणनीति पर हमलावर हो गया। सीएम अखिलेश यादव ने कहा कि रामलीला जैसे स्थान को राजनीति से दूर रखना चाहिए। कांग्रेस ने भी मोदी की इस रणनीति की आलोचना सार्वजनिक रूप से करनी शुरू कर दी। मोदी के दौरे से कुछ दिन पहले ही द हिन्दू अखबार ने रिपोर्ट छाप दी कि 2011 में जिंजर नाम से सेना ने बड़ा सर्जिकल ऑपरेशन किया था।
इन सब बातों के बाद पीएम मोदी ने अपनी रणनीति बदली और सेना के बखान की जगह जय श्रीराम के जबरदस्त नारे लगाये। मोदी के इन नारों से दूर तक संदेश चले गये। भाजपा नेताओं ने यह कहकर बचाव किया कि राम लीला में जय श्रीराम के नारे नहीं लगेंगे तो कहां लगेंगे। मगर विपक्ष ने कहा कि मोदी पिछले साल भी रामलीला में थे तब उन्हें जय श्री राम के नारे क्यों नहीं याद आये। यही नहीं मोदी के कुछ बयानों से नाराज चल रहे विहिप के नेताओं ने भी तंज कसने में देर नहीं लगाई कि चलो चुनाव से पहले मोदी जी को जय श्रीराम के नारे याद तो आ गये। जाहिर है कि मोदी के यह नारे अब यूपी में एक नये राजनीतिक संग्राम की भूमिका तैयार कर रहे हैं और आने वाले दिनों में इस पर एक नया घमासान देखने को मिल सकता है।

मगर लखनऊ में निशाना नहीं लगा पाये मोदी

पीएम मोदी भले ही हर जगह अपना निशाना साधते रहे हों मगर यूपी के चुनाव में वह निशाना साधने से चूक गये। रामलीला मैदान में उन्होंने पर धनुष पर तीर चढ़ाया मगर तीर चलने से पहले ही गिर गया। उन्होंने फिर कोशिश की मगर फिर कामयाब नहीं हुए। मेयर दिनेश शर्मा ने फिर उन्हें तीर उठाकर दिया, इस बार मोदी जी ने तीर चलाया तो मगर वह निशाने पर न लगकर पास में ही गिर गया। लोगों ने कहा कि मोदी जी लखनऊ में निशाना नहीं लगा पा रहे हैं।

ओपिनियन पोल: सत्ता की दौड़ में भाजपा सबसे आगे

उत्तर प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर कराए गए सर्वे में भाजपा को सत्ता की दौड़ में सबसे आगे बताया गया है जबकि बसपा को दूसरे नबंर की पार्टी बताया गया है। सर्वे के मुताबिक भाजपा बहुमत के करीब पहुंचकर सरकार बना सकती है। सपा को तीसरे व कांग्रेस को चौथे नंबर पर रखा गया है। यह सर्वे इंडिया टुडे-एक्सिस माई इंडिया ने कराया है। सर्वे में भाजपा को 31 फीसदी वोट के साथ 170-183 सीटें मिलने की संभावना जताई गई है। 28 फीसदी वोट के साथ बसपा दूसरे व 25 फीसदी वोट के साथ सपा तीसरे नंबर पर हो सकती है। सर्वे में बसपा को 115 से 124 व सपा को 94-103 सीटें दी गई हैं। कांग्रेस को 6 फीसदी वोट के साथ 8-12 सीटें दी गई हैं। अन्य के खाते में 10 फीसदी वोट के साथ 2 से 6 सीटें आने की बात कही गई है। भाजपा को भले ही सर्वें में बढ़त मिल रही हो, लेकिन सीएम पद उसकी कमजोर कड़ी है।

यूपी का चुनाव मोदी को ले आया रामलीला मंच पर: चिन्मयानंद

लगभग 3 साल बाद मोदी जी के मुंह से जय श्रीराम, जय जय श्रीराम सुनकर कुछ अटपटा लगा क्योंकि पंत प्रधान बनने के बाद तरह-तरह के जुमले तो उनके भाषणों से छलकते रहे लेकिन जय श्रीराम की गर्जना पहली बार गूंजी वह भी न काशी और न अयोध्या में। देश की गलियों में गंूजने वाला यह घोष लगता था अशोक सिंघल और महंत अवैद्यनाथ जी के साथ विदा हो गया। रज्जु भैया भी नहीं रहे जो प्रधान सेवक जी को याद दिलाते राम लला हम आएंगे मंदिर वहीं बनाएंगे, सौगंध राम की खाते हैं,… आदि आदि। लेकिन भला हो यूपी के विधानसभा के चुनाव का जो अपने पीएम साहब को रामलीला के मंच तक ले आयी, अन्यथा 24 घंटे अनवरत विकास की बात करने वाले को यह जय श्रीराम के लिए कहां फुरसत थी। अब लगा कि न केशव काम आएंगे और न अमित, कितनी भी भागवत सुन लें बिना राम के राज (नाथ) नहीं संभव होगा। चलो देर आये दुरुस्त आये। (भाजपा के पूर्व गृह राज्य मंत्री स्वामी चिन्मयानंद सरस्वती ने फेसबुक पर ये लिखा)

लखनऊ में सेना का अपमान किया पीएम मोदी ने: मायावती

बसपा सुप्रीमो मायावती ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जुमलेबाज बताया है। उन्होंने कहा कि मोदी ऐशबाग की रामलीला में आये लेकिन सेना का जिक्र तक नहीं किया। वह सिर्फ बड़ी-बड़ी बातें करना जानते हैं। जबकि लोकसभा चुनाव के दौरान जनता से किए गए वादों को पूरा करने में पूरी तरह नाकाम रहे हैं। मायावती ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जटायु और श्रीराम के आचरण की बात कही और इतिहास भी बताया, लेकिन सेना का जिक्र तक नहीं किया।

चुनाव देखकर फिर राम याद आ गये मोदी जी को: अशोक बाजपेयी

सपा के विधान परिषद सदस्य अशोक बाजपेयी ने कहा है कि राम के नाम का इस्तेमाल भाजपा पहले भी चुनाव के समय करती आई है। इस बार भी जब उत्तर प्रदेश के चुनाव सिर पर हैं तब मोदी जी को समझ आ गया कि यूपी में उनकी दाल नहीं गलने वाली है। इसीलिए वे लखनऊ में रामलीला मैदान पर आकर फिर से भगवान राम को याद करने लगे। उनके मुंह से राम का नाम सुनते ही लोग समझ जाते हैं कि चुनाव सिर पर हैं।

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