आखिर क्यों टूटा भारत का सब्र

“तमाम सबूत देने के बाद भी पाकिस्तान में जिस तरह भारत में हमला करने के दोषी आतंकवादी घूम रहे हैं, उससे भारत को विश्वास हो गया था कि इस मामले से उसे खुद निपटना होगा, यह कार्रवाई इसी का नतीजा है। फिलहाल इस कार्रवाई से तनाव भले चरम पर दिख रहा हो इसके युद्ध में तब्दील होने की आशंका नहीं है क्योंकि दोनों देशों को इसका परिणाम पता है। भारत ऐसी किसी आशंका को पहले भी खारिज कर चुका है।”

sanjay sharma editor5उड़ी आतंकी हमले के जवाब में भारतीय कमांडो की पाकिस्तान में घुस कर की गई सर्जिकल स्ट्राइक से दोनों देशों में तनाव बढ़ गया है। ऑपरेशन में दो दर्जन से अधिक भारतीय कमांडो ने पाक स्थित आतंकी शिविरों पर हमला किया। सात शिविर ध्वस्त किए और 38 आतंकियों को मौत के घाट उतार दिया। भारतीय सेना की इस कार्रवाई से एक ओर पाक प्रधानमंत्री नवाज शरीफ भडक़ उठे तो दूसरी ओर पाकिस्तान के रक्षामंत्री ख्वाजा मुहम्मद आसिफ ने भारतीय फौज की कार्रवाई में दो पाक सैनिकों की मौत का दावा करते हुए परमाणु युद्ध की धमकी दी। बाघा बार्डर पर बीटिंग रिट्रिट को रद्द कर दिया गया। बीएसएफ हाई अलर्ट पर है। सवाल है कि दशकों से पाक संरक्षित आतंकवाद का दंश झेलने वाले भारत के सब्र का बांध आखिर क्यों टूटा? क्या अमेरिका से बढ़ रही नजदीकियों ने मोदी सरकार को यह हौसला दिया? क्या भारत ने अमेरिका की तर्ज पर पाक को सबक सिखाने के लिए ये कार्रवाई की या फिर आतंकवादियों को प्रश्रय देने के लिए कुख्यात हो चुके पाक की गिरती साख ने भारत को कार्रवाई का मौका दिया? क्या यह कार्रवाई उड़ी हमले के बाद मोदी सरकार पर बढ़ते दबाव का नतीजा है? सवाल और भी है। भारतीय फौज द्वारा की गई यह कार्रवाई एक दिन का नतीजा नहीं है। इसके पूर्व भारत ने अपने सैनिक की मौत पर म्यांमार की सीमा में घुसकर आतंकवादियों को मार गिराया था। यह भी सच है कि जब भी भारत में ऐसे आतंकी हमले हुए जनता ने सरकार पर जैसे को तैसा जवाब देने का दबाव बनाया, लेकिन वैश्विक कूटनीति और क्षेत्रीय अशांति की आशंका के चलते ऐसी किसी कार्रवाई से सरकारें हमेशा बचती रहीं। आज स्थितियां बिल्कुल अलग हैं। आतंक के मुद््रदे पर भारत ने पाक को कूटनीतिक रूप से अलग-थलग कर दिया है। अमेरिका ने भी मान लिया है कि पाकिस्तान आतंकियों की नर्सरी है। आतंकवाद के मुद्दे पर कोई भी देश पाकिस्तान के साथ खड़ा नहीं हो सकता। यही वजह है कि भारतीय फौज की कार्रवाई पर अमेरिका और चीन दोनों ने संयमित बयान दिए हैं। तमाम सबूत देने के बाद भी पाकिस्तान में जिस तरह भारत में हमला करने के दोषी आतंकवादी घूम रहे हैं, उससे भारत को विश्वास हो गया था कि इस मामले से उसे खुद निपटना होगा, यह कार्रवाई इसी का नतीजा है। फिलहाल इस कार्रवाई से तनाव भले चरम पर दिख रहा हो इसके युद्ध में तब्दील होने की आशंका नहीं है क्योंकि दोनों देशों को इसका परिणाम पता है। भारत ऐसी किसी आशंका को पहले भी खारिज कर चुका है।

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