आखिर कैसे सुधरे कश्मीर के हालात

जम्मू कश्मीर के नौजवान आज जो कुछ कर रहे हैं वह कुछ साल पहले भी करते थे। फर्क सिर्फ इतना था कि तब महबूबा मुफ्ती विपक्ष में थी और ऐसे नौजवानों को संरक्षण देती थी। आज वह सरकार में हैं और सूबे की मुख्यमंत्री हैं। पत्थर उठाने वाले नौजवानों को सत्ता का गणित आसानी से समझ में नहीं आता।

sanjay sharma editor5भारत का स्वर्ग कहे जाने वाला कश्मीर इन दिनों लहुलुहान है। रोज हिंसा की वारादातों ने कश्मीर की सड़कों को खून से लाल कर दिया है। हाथों में पत्थर लिए नौजवानों का निशाना सुरक्षा बल है तो सुरक्षा बलों के निशाने पर ऐसे नौजवान। खून किसी का भी गिरे दर्द किसी न किसी मां को होता है। कश्मीर में एक ऐसा जुनून बढ़ता जा रहा है, जिसका हल किसी को समझ नहीं आ रहा। जहां जख्म है वहां इलाज नहीं किया जा रहा है। भाजपा भी सकते की हालत में है। उसके नेता समझ रहे हैं कि कश्मीर में सत्ता बनाने के लालच में वह एक ऐसा कदम उठा बैठे हैं जो भविष्य में उनके लिए बहुत नुकसानदायक साबित होने वाला है।
जम्मू कश्मीर के नौजवान आज जो कुछ कर रहे हैं वह कुछ साल पहले भी करते थे। फर्क सिर्फ इतना था कि तब महबूबा मुफ्ती विपक्ष में थी और ऐसे नौजवानों को संरक्षण देती थी। आज वह सरकार में हैं और सूबे की मुख्यमंत्री हैं। पत्थर उठाने वाले नौजवानों को सत्ता का गणित आसानी से समझ में नहीं आता। उन्हें यह भी समझ नहीं आता कि आखिर यह राजनेता उनका इस्तेमाल कब और कैसे कर लेते हैं। वह यह भी जानना चाहते हैं कि जो महबूबा मुफ्ती उनके हर काम में संरक्षण देती थी। अब वह नैतिकता की बातें कैसे करने लगी।
यह सत्ता का वह गणित है, जो अच्छे से अच्छे से लोग भी समझ नहीं पाते। राजनेता इन लोगों का कब और कैसे इस्तेमाल कर लें यह कोई नहीं समझ सकता। एक आतंकी के मारे जाने के बाद एक दर्जन लोग सुरक्षकर्मियों से मोर्चा संभालते-संभालते मारे गए। समझ नहीं आता कि यह सत्ता का कौन सा गणित है और इसकी चॉबी कहा है।
लोग भाजपा से यह भी सवाल पूछ रहे हैं कि आखिर आतंकी अफजल को शहीद बताने वाली महबूबा से समझौता करने का उन्हें क्या फायदा हुआ। जो लोग आज सुरक्षा बलों पर पथराव कर रहे हैं। ऐसे ही 600 से अधिक लोगों को महबूबा ने ईद पर रिहा किया है। तो क्या यह नहीं माना जाना चाहिए कि इन आतंकियों की रिहाई में भाजपा का भी योगदान है। आखिर वह महबूबा के साथ मिलकर सरकार चला रही है। जब भाजपा सत्ता के मजे लूट रही है, तो जाहिर है कि इस हिंसा का जवाब उसे ही देना चाहिए।

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