आखिर कब दूर होगी डॉक्टरों की कमी

डफरिन में आये दिन होता रहता है हंगामा

Capture 4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। कहने को तो वीरांगना अवंती बाई बाल महिला चिकित्सालय प्रदेश का सबसे बड़ा बाल महिला चिकित्सालय है लेकिन मरीजों को यहां इलाज मिलना मुश्किल है। कारण, यहां डॉक्टरों की कमी के चलते पहले से ही अस्पताल की स्थिति डामाडोल है ऊपर से जिनकी तैनाती है वह भी गैरजिम्मेदाराना रवैया दिखा रहे हैं। इसको लेकर आये दिन तीमारदारों और डॉक्टरों के बीच झड़प होती रहती है। स्वास्थ्य विभाग चिकित्सा व्यवस्था ठीक होने का दावा तो करता है लेकिन हकीकत कुछ और ही है। डॉक्टर जब चाहें तब अपनी मनमर्जी से ड्ïयूटी से नदारद हो जायें। आखिर जिम्मेदार अधिकारी इस तरफ ध्यान क्यों नहीं दे रहे।
अभी ताजा उदाहरण बीते शनिवार को ही देखने को मिला। डफरिन अस्पताल की ओपीडी में मात्र एक स्त्री रोग विशेषज्ञ मरीजों को देख रही थी। बाकी डॉक्टर ड््यूटी से नदारद थीं। भारी भीड़ देख कर मरीजों के तीमारदार भडक़ उठे और हंगामा काटने लगे। तीमारदारों का कहना था कि डॉक्टरों की ओर से मनमर्जी की जा रही है जिससे मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। तीमारदारों ने करीब आधे घंटे अस्पताल में जमकर हंगामा काटा। सवाल यह है कि अस्पतालों में ऐसे हंगामें कब तक चलते रहेंगे। एक तरफ स्वास्थ्य मंत्री चिकित्सा सुविधा आसान बनाने के दावे कर रहे हैं और दूसरी तरफ विभागीय उदासीनता के कारण अस्पतालों में अव्यवस्था चरम पर है।

स्त्री रोग विशेषज्ञों की कमी

डफरिन अस्पताल प्रदेश का सबसे बड़ा महिला चिकित्सालय है। यहां पर 226 बेड की सुविधा है। डफरिन अस्पताल में डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टॉफ की बेहद कमी है। अस्पताल में स्त्री रोग विशेषज्ञ के 17 पद हैं जिनमेें तैनाती 13 की है, जिसमें से एक डॉक्टर पिछले 3 महीनों से छुट्ïटïी पर हैं। ओपीडी में बैठने वाली दो महिला चिकित्सक अक्सर वीआईपी ड््यूटी में रहती हैं। कई डॉक्टर ड्यूटी से नदारद भी रहती हैं।

बाहर से बुलाये जाते हैं डॉक्टर
डफरिन अस्पताल में चिकित्सकों की कमी है। जिसके चलते ओपीडी के लिए बाहर से डॉक्टर बुलाये जाते हैं। अक्सर लापवाही के चलते डॉक्टरों को नहीं बुलाया जाता है जो बाद में विवाद का कारण बन जाता है। बताते चलें कि डफरिन की रोजाना ओपीडी करीब 500 मरीज आते हैं। राजधानी सहित आस-पास के सामुदायिक केंद्रों से ज्यादातर मरीज डफरिन के लिए रेफर किये जाते हैं। ऐसे में मरीजों की संख्या बहुत ज्यादा हो जाती है।

मैं पूरी कोशिश करती हूं कि मरीजों को समय से इलाज मिले और उन्हें कोई भी दिक्कत न हो। डॉक्टरों की कमी के चलते कभी कभी ओपीडी में बाहर से डॉक्टरों को नहीं बुला पाते हैं और कुछ डॉक्टर वीआईपी ड्यूटी में लगी रहती हैं। मैं भी मरीजों को देखती रहती हूं। अस्पताल में डॉक्टरों की बेहद कमी है,शासन को इससे अवगत कराया गया है।
-डॉ. मंजुल बहार, पीएमएस, डफरिन अस्पताल

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