आओ अब जन्मदिन जन्मदिन खेलें…

बड़े नेताओं के जन्मदिन से शुरू हुआ यह जश्न अब छुटभैये नेताओं तक पहुंच गया है। जिले स्तर के नेता भी अब अपना जन्मदिन उसी भव्यता के साथ मनाना चाहते हैं। आजमगढ़ में तो आज बसपा के एक नेता अपनी बहन जी के जन्मदिन पर इतनी खुशी में आ गये कि उन्होंने सार्वजनिक रूप से अश्लील डांस भी करा डाला। नेताओं की यह मानसिकता बताती है कि उन्हें इस बात का जरा भी एहसास नहीं है कि इस देश का आम आदमी उनके इस आचरण से आहत होता है।

sanjay sharma editor5अपने जन्म दिन पर मायावती ने मुलायम सिंह पर हमला किया। मुद्ïदा सैफई में उनका जन्म दिन था। उन्होंने कहा कि जन्म दिन के बहाने सरकार ने करोड़ों रुपये फूंक दिये। जाहिर है आम आदमी के बीच में एक बार फिर जन्मदिन को लेकर बहस छिड़ गई है। नेता को अपना जन्मदिन मनाना चाहिये या नहीं, इस मुद्ïदे पर अलग-अलग लोग अलग-अलग बातें करने में जुट गये। जाहिर है एक बार फिर राजनीति और राजनेता लोगों के बीच चर्चा का विषय बने हुये हैं।
यह अच्छी बात है कि मायावती ने इस बात की आलोचना की कि सैफई में इतना रुपया क्यों बहाया गया। पलट कर मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने जवाब दिया कि वह पैसा नेता जी ने खर्च नहीं किया था। वह उनके बेटे ने खर्च किया था। मगर बात तो शुरू हुई और एक सार्थक बात शुरू हुई। एक संदेश सबके सामने गया कि अब बात जन्मदिन को लेकर होने लगी है।
अब चूंकि बात मायावती ने शुरू की है तो कम से कम यह तो माना ही जाना चाहिये कि वे इस जन्मदिन की प्रथा को खत्म करेंगी। अगर जन्मदिन मनेगा भी तो वह भव्यता और विलासिता की तर्ज पर नहीं मनेगा। मायावती अब वैसी गलती भी नहीं करेंगी जैसी उन्होंने अपने मुख्यमंत्री रहते की थी, जब एक इंजीनियर की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी। जाहिर है अब उन्हें लगा होगा कि नेताओं को इस तरह का विलासितापूर्ण आचरण नहीं करना चाहिये। इसलिये उन्होंने अब उसकी आलोचना की। मगर कहा जाता है कि देर आये दुरुस्त आये। जब उन्हें समझ आ गया तभी समझना चाहिये कि अब सुधार की संभावनाएं शुरू हो गईं हैं। हो सकता है नेता जी भी अपना जन्मदिन मनाना बंद कर दें।
बड़े नेताओं के जन्मदिन से शुरू हुआ यह जश्न अब छुटभैये नेताओं तक पहुंच गया है। जिले स्तर के नेता भी अब अपना जन्मदिन उसी भव्यता के साथ मनाना चाहते हैं। आजमगढ़ में तो आज बसपा के एक नेता अपनी ‘बहन जी’ के जन्मदिन पर इतनी खुशी में आ गये कि उन्होंने सार्वजनिक रूप से अश्लील डांस भी करा डाला। नेताओं की यह मानसिकता बताती है कि उन्हें इस बात का जरा भी एहसास नहीं है कि इस देश का आम आदमी उनके इस आचरण से आहत होता है। उसको लगता है कि ये नेता उसका हित करने की जगह अपनी अय्याशी को बढ़ावा दे रहे हैं। शायद अब जन्मदिन-जन्मदिन खेलने की यह परंपरा में कुछ बदलाव आये और लोगों को एहसास हो कि इससे बेहतर भी किया जा सकता है।

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