आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों ने किया वजन दिवस का बहिष्कार

कुपोषित बच्चों की पहचान का अभियान खटाई में

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। राष्ट्रीय पोषण मिशन के तहत मनाये जाने वाले वजन दिवस का आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों ने बहिष्कार कर दिया। इस कारण शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में कुपोषण ग्रस्त बच्चों की पहचान का अभियान खटाई में पड़ गया है। आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों ने अपनी मांगे पूरी होने के बाद ही सरकारी योजनाओं में सहयोग देने का निर्णय लिया है। इसलिए कैम्प लगाने की सारी योजना फेल हो गई है।
जिला कार्यक्रम अधिकारी दीपिका घोष के मुताबिक बच्चों में कुपोषण की स्थिति का पता लगाने के उद्देश्य से 7 और 10 सितंबर को वजन दिवस मनाने का निर्णय लिया गया था। इसको लेकर प्रशासनिक स्तर से सारी तैयारी पूरी कर ली गई थी। अचानक से आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों ने वजन दिवस का बहिष्कार कर दिया। इससे शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में कैम्प लगाकर बच्चों में कुपोषण की स्थिति का पता लगाने और महिलाओं को कुपोषण से बचाव की जानकारी देने का कार्यक्रम हो पाना मुश्किल हो गया है। इस संबंध में आंगनबाड़ी कार्यकत्री संगठन के पदाधिकारियों से बात की गई लेकिन वह मानने को तैयार नहीं है। दरअसल आंगनबाड़ी कार्यकत्री अपनी विभिन्न मांगों को लेकर आंदोलन कर रही हैं। इसमें आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को नियमित करने, उनका वेतनमान निर्धारित करने, आंगनबाड़ी केन्द्रों पर पोषाहार वितरण के नाम पर होने वाली धांधली में वेवजह महिला कार्यकत्रियों को फंसाने और अन्य विभागों के काम करवाने संबंधी अनेकों मांगे शामिल हैं। इन पर प्रमुख सचिव स्तर से फैसला होने की उम्मीद की जा रही है। लेकिन ठोस कार्रवाई नहीं होने और आश्वासनों के कारण महिला आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों में सरकार के खिलाफ काफी रोष है। इसी वजह से सोमवार को वजन दिवस का बहिष्कार कर दिया गया।
गौरतलब हो कि राजधानी में कुल 2700 आंगनबाड़ी केन्द्र हैं। प्रत्येक 20 आंगनबाड़ी केन्द्रों पर एक मुख्य सेविका की तैनाती है। इसमें प्रत्येक 15 दिनों पर पोषाहार आता है, जो शून्य से छह साल तक के बच्चों को वितरित किया जाता है। इसमें आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों का आरोप है कि भ्रष्ट अधिकारियों के कारण आंगनबाड़ी केन्द्रों पर पंजीरी वितरण और हाट कुक योजना का कागजों में संचालन किया जा रहा है। हकीकत में बच्चों को पोषाहार वितरण नहीं हो रहा। इसमें अधिकारी हर बार आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों पर आरोप लगाते हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई होती रहती है। इसलिए महिला आंगनबाड़ी कर्मचारी संगठन ने अपनी विभिन्न मांगों में भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ जांच करवाने और उनको कड़ी सजा दिलाने की मांग भी की है।

Pin It