अस्पताल की आलीशान बिल्डिंग में संसाधनों का टोटा

संसाधनों की कमी से जूझ रहा लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान
जिम्मेदारों ने कहा, तीन महीने में ठीक हो जायेंगी व्यवस्थायें
ट्रामा शुरू करने की तैयारी में है राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान

Capture4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। डॉ. राममनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान 2०17 तक 22 नये विभाग शुरू करने जा रहा है, जिससे आने वाले समय में मरीजों को लाभ मिलने की उम्मीद बढ़ गयी है। लेकिन वर्तमान समय में संस्थान में उपलब्ध संसाधनों की कमी के चलते मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। संस्थान की बिल्डिंग तो अलीशान है लेकिन वहां संसाधनों की कमी बरकरार है।
ऐसा हम नहीं कह रहे हैं। डॉ. राममनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान के निदेशन डॉ. दीपक मालवीय ने इस बात को स्वीकार किया अभी संस्थान में संसाधनों की कमी है। हालांकि सपा सरकार इस संस्थान को एसजीपीजीआई के स्तर का बनाने के लिए प्रयासरत है। कोशिश भी की जा रही है लेकिन चिकित्सकों का रवैया मरीजों के लिए ठीक न होने के कारण मरीज क्षुब्ध हो रहे हैं। बताते चलें कि अजीत कुमार (57) को सडक़ दुर्घटना में सिर में चोट लग गयी थी। इलाज के लिए परिजनों ने सबसे पहले लोहिया चिकित्सालय में भर्ती किया था, जहां चिकित्सकों ने जांच के बाद सिर में खून का थक्का जमा होने की बात कही थी और इलाज के लिए साफ मना कर दिया था तथा केजीएमयू के ट्रामा सेन्टर ले जाने के लिए कहा था। उसके बाद परिजनों ने लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान में मरीज को दिखाया। वहां पर भी चिकित्सकों ने हाथ खड़े कर लिये थे । थक हार कर परिजन मरीज को लेकर ट्रामा पंहुचे। वहां पर भी बेड न खाली होने की बात कहकर मरीज को भर्ती नहीं किया गया। पूरी रात मरीज खुले आसमान के नीचे स्ट्रेचर पर पड़ा रहा। बाद में तीमारदार मरीज को लेकर बलरामपुर अस्पताल पंहुचे, जहां पर मरीज का इलाज शुरू हुआ। ऐसे में लोगों के मन में प्रश्न उठना लाजमी है कि जिस मरीज का इलाज बलरामपुर चिकित्सालय में हो सकता है तो उसका इलाज लोहिया संस्थान या लोहिया अस्पताल में क्यों नहीं हो सकता है।
इस विषय पर जब 4पीएम संवाददाता ने लोहिया संस्थान के निदेशक दीपक मालवीय से बातचीत की तो उन्होंने बताया कि हमारे पास अभी संसाधनों की कमी है, जिसकी वजह से मरीजों को समस्या का सामना करना पड़ता है। न्यूरो के मरीज के इलाज में पूरी टीम की आवश्यक्ता होती है, केवल चिकित्सक से इलाज नहीं होता है। अभी हमारे पास टीम की कमी है। इस लिए मरीज को यहां से ट्रामा भेजा गया होगा। 2०16 के मार्च तक न्युरो ट्रामा शुरू हो जायेगा। उसके बाद किसी प्रकार की समस्या नही आयेगी।
महत्वपूर्ण विभागों मे एक-एक विशेषज्ञ
बड़ी बिल्डिंग में संसाधनों का आभाव इस कदर है कि दो महत्वपूर्ण विभागों गैस्ट्रोमेडिसिन तथा नेफ्रोलॉजी विभाग में केवल एक-एक विशेषज्ञ ही है, जिन पर रोजाना सैंकड़ों मरीजों को देखने का जिम्मा रहता है। मौजूदा समय में संचालित होने वाले विभागों में गैस्ट्रोलॉजी, ऑन्कोलॉजी, रेडियोलॉजी, कार्डियोलॉजी, नेफ्रोलॉजी समेत 18 विभाग संचालित हो रहे हैं।
स्वाइन फ्लू के इलाज की सुविधा नहीं
डॉ. राममनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान में स्वाइनफ्लू जैसी घातक बीमारियों से ग्रसित मरीजोंके लिए कोई व्यवस्था मौैजूद नहीं है, जबकि यह संस्थान एसजीपीजीआई के समकक्ष का चिकित्सा संस्थान है। इतना बड़ा संस्थान होने के बावजूद ये भी केजीएमयू तथा एसजीपीजीआई पर ही निर्भर है।

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