अस्पतालों के चिकित्सकों को केजीएमयू देगा प्रशिक्षण

बलरामपुर, सिविल तथा डफरिन अस्पताल के चिकित्सकों को मिलेगा प्रशिक्षण

Capture4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। किंगजार्ज चिकित्सा विश्वविद्यलाय ने पायलट प्रोजेक्ट के तहत राजधानी के बलरामपुर, सिविल व डफरिन अस्पताल को अपने साथ लेने की तैयारी की है। इसके लिए अस्पताल के डॉक्टरों को केजीएमयू में प्रशिक्षण लेना होगा। इसका प्रस्ताव बनाकर केजीएमयू ने शासन को भेज दिया है। बलरामपुर अस्पताल, श्यामा प्रसाद मुखर्जी अस्पताल में आर्थोपैडिक, जनरल सर्जरी, न्यूरो तथा जटिल बीमारियों के मरीज बड़ी तादात में आते हैं और भर्ती होते हैं,लेकिन विशेषज्ञों की कमी के चलते मरीजों का बेहतर इलाज नहीं हो पाता है। सिविल अस्पताल में कैथ लैब होने के बाद भी प्रशिक्षित स्टाफ न होने के कारण यह आये दिन लैब बंद रहती है। इसके अलावा बलरामपुर अस्पताल में आईसीयू, आर्थो व सर्जरी के ऑपरेशन थियेटर उच्चस्तरीय हैं। यहां भी विशेषज्ञों की कमी से तत्काल ऑपरेशन नहीं हो पाते हैं। जानकारों की मानें तो पिछले काफी समय से यहां पर हड्ïडी रोग विभाग में जटिल आपरेशन नहीं हुआ है। सूत्रों की मानें तो यहां के हड्ïडी रोग विशेषज्ञ मामला जटिल देखकर केस को केजीएमयू रेफर कर देते हैं। वहीं डफरिन अस्पताल में स्त्री रोग विशेषज्ञ की कमी से मरीज को क्वीन मेरी रेफर कर दिया जाता है।

केजीएमयू की योजना
केजीएमयू की योजना है कि बलरामपुर, सिविल तथा डफरिन अस्पताल के डॉक्टरों को तीन वर्ष का प्रशिक्षण देकर इन तीनों अस्पताल में तैनात करेगा। इसके अलावा फैकल्टी सदस्य भी बनाने की बात की है। इसके साथ ही सिविल अस्पताल की कैथ लैब को अपने हाथों में लेकर चलाने को भी कहा है।
केजीएमयू के उपचिकित्सा अधीक्षक डॉ. वेद प्रकाश का कहना है कि केजीएमयू ने शासन को इस सन्दर्भ में काफी पहले प्रस्ताव बनाकर भेज दिया है। मंजूरी मिलते ही पायलट प्रोजेक्ट के तहत बलरामपुर, डफरिन तथा सिविल अस्पताल को शामिल करने की तैयारी है। इससे यहां के चिकित्सकों को विशेषज्ञ बनाकर लोगों को उच्चस्तरीय इलाज मुहैया कराया जा सकेगा। उन्होंने बताया कि इसके बाद हमारे यहां के चिकित्सक वहां पर तथा वहां के चिकित्सक हमारे यहां आ सकेंगे। उन्होंने दिल्ली स्थित डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल का जिक्र करते हुए बताया कि पहले वो भी एक सामान्य अस्पताल था। लेकिन आज वहां पर मरीजों के इलाज के लिए सभी प्रकार की उच्चस्तरीय सुविधायें उपलब्ध हैं। इसी प्रकार हमारे यहां के अस्पताल भी आधुनिक इलाज देने में सक्षम हो जायेंगे।

बंद हो जायेंगी लोगों की दुकानें

डॉ. वेद प्रकाश बताते हैं कि इस संबंध में शासन की मंजूरी मिलने के बाद झोलाछाप डॉक्टरों की दुकानें बंद हो जायेंगी। लोगों को अच्छे इलाज के नाम पर धोखा नहीं मिलेगा। जब सरकारी अस्पतालों में उच्चस्तरीय चिकित्सा सुविधा मिलने लगेगी, तो लोग इधर-उधर इलाज के लिए नहीं भटकेंगे।

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