अस्तपालों के बर्न यूनिट में स्टॉफ की कमी

आग से झुलसे मरीजों का नहीं हो पाता ठीक से उपचार
आग से झुलसे मरीज को बार-बार आने- जाने से इंफेक्शन का बना रहता है खतरा

 4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। आग से झुलसे ज्यादातर मरीजों के उपचार के बाद उन्हें अंग विकृति, चेहरा चिपटा होने जैसी समस्याएं हो रही हैं। साथ ही तमाम मरीजों की मृत्यु हो जाती है। इसका एक बड़ा कारण ये है कि बर्न यूनिटों में स्टॉफ की कमी है। आग से झुलसे मरीजों को अस्पताल में लाने के बाद उनके ईलाज में तमाम प्रकार के विशेषज्ञ डॉक्टरों की जरूरत होती है। केवल प्लास्टिक सर्जन से काम नहीं चलता।
ये कहना है केजीएमयू के सर्जरी विभाग के डॉक्टर संदीप तिवारी का। डॉ. तिवारी ने बताया कि आग से झुलसे मरीज को उपचार के दौरान प्लास्टिक सर्जन के आलावा एनेस्थियोलॉजिस्ट, फिजियोथेरेपिस्ट, नेफ्रोलॉजिस्ट, डाइटीशियन, जनरल फिजीशियन, बिहैवियर थेरेपिस्ट, साइकोलॉजिस्ट की आवश्यकता होती है जोकि बर्न यूनिट के लिए अस्पताल उपलब्ध नहीं है। ऐसे में आग से झुलसे मरीजों को बाद में तमाम समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
आने-जाने से बढ़ता है इंफेक्शन
केजीएमयू के प्लास्टिक सर्जरी विभाग के एचओडी डॉ. एके सिंह ने बताया कि बर्न यूनिट अपने में अलग होना चाहिये। डायलिसिस, आईसीयू सहित तमाम प्रकार की व्यवस्थायें बर्न यूनिट में ही होनी चाहिये ताकि मरीज को बाहर न ले जाना पड़ा। आग से झुलसे मरीज को बार-बार आने- जाने से इंफेक्शन का खतरा रहता है।
जागरूकता आवश्यक
डॉ. एके सिंह ने बताया कि भारत में बर्न के केसेज में 90 प्रतिशत लापरवाही देखने को मिलती है। दरअसल यहां पर आग के मामले में लोग जागरूक नहीं है। विदेशों में लोग अपने घरों में आग से बचने के इंतजाम भी रखते हैं ताकि आपात स्थिति में अपने आपको बचाया जा सके
लेकिन यहां ऐसा नहीं है। आत्महत्या या दूसरे कारणों से हुए बर्न केसेज को रोकना मुश्किल है लेकिन लापरवाही के चलते हुए केसेज को समाज में जागरूकता फैलाकर कम किया जा सकता है।
लौटाये जाते हैं मरीज
केजीएमयू में बर्न यूनिट न होने से हर हफ्ते 5 से 7 मरीजों को लौटाया जाता है, जिससे मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। केजीएमयू की ओर से शासन को 50 बेड की बर्न यूनिट का प्रस्ताव भी भेजा जा चुका है। प्लास्टिक सर्जरी विभाग के एचओडी डॉ. एके सिंह ने बताया कि शासन की ओर से बर्न यूनिट को लेकर तत्परता दिखाई गई है। निर्माण निगम की ओर से केजीएमयू के प्लास्टिक सर्जरी विभाग में ही जगह को चिन्हित कर लिया गया है। आने वाले 6 से 8 महीनों में बर्न यूनिट शुरू हो सकती है। इससे राजधानी सहित आस-पास के जिलों से आने वाले मरीजों को सुविधा मिलेगी

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