असहिष्णुता पर विदेशियों की सलाह

यदि देश में असहिष्णुता का माहौल नहीं है, देश में दलितों का उत्पीडऩ नहीं हो रहा है, गोमांस के मुद्दे पर बलवा नहीं हो रहा है, देश में महिलाओं के खिलाफ अपराधिक घटनाओं में बढ़ोत्तरी नहीं हो रही है, तो फिर उन सब घटनाओं को मुद्दा बनाकर अमेरिका के विदेश विभाग के प्रवक्ता सलाह क्यों दे रहे हैं।

sanjay sharma editor5अमेरिका ने भारत में बढ़ती असहिष्णुता और हिंसा पर गहरी चिंता जताई है। भारत सरकार को नागरिकों की सुरक्षा और अपराधियों को सजा दिलाने का हर संभव प्रयास करने की सलाह दी है। भारत में गोमांस का सेवन करने वाले लोगों के खिलाफ कथित हिंसा की घटनाओं और मध्य प्रदेश में भैंस का मांस ले जा रही मुस्मिल महिलाओं के साथ मारपीट की घटनाओं को गंभीरता से लेकर अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता जॉन किर्बी ने भारत का हर संभव सहयोग करने का वादा किया है।
भारत में असहिष्णुता का मुद्दा पहले भी कई महीनों तक छाया रहा था। देश के साहित्यकारों और कलाकारों ने असहिष्णुता के मामले को लेकर केन्द्र सरकार के खिलाफ कई महीनों तक आंदोलन चलाया। साहित्यकारों ने अपने पुरस्कार लौटाए, तो बॉलीवुड के कलाकारों ने भारत में असहिष्णुता की घटनाएं बढऩे की वजह से खुद को असुरक्षित महसूस करने की बात कही। इसको लेकर लंबी बहसें भी हुईं, जिसका नतीजा सिफर रहा। केन्द्र सरकार मानने को बिल्कुल भी तैयार नहीं थी कि देश में कहीं भी असहिष्णुता का माहौल है, जिन प्रदेशों में उत्पीडऩ और बड़े स्तर पर जनसमूह को प्रभावित करने वाली घटनाएं हुई हैं उनका समय से समाधान किया जाता रहा है। असहिष्णुता के मुद्दे को चुनावी स्टंट बताकर केन्द्र सरकार ने सबका मुंह बंद कराने का काम बहुत ही शातिर ढंग से किया।
सवाल उठता है कि केन्द्र सरकार ने देश की जनता और साहित्यकारों को तो बरगला दिया लेकिन विदेशी मुल्कों से असहिष्णुता के मुद्दे पर भारत को सीख देने वाले लोगों का जवाब देने की बजाय चुप्पी साधे हैं। यदि देश में असहिष्णुता का माहौल नहीं है, देश में दलितों का उत्पीडऩ नहीं हो रहा है, गोमांश के मुद्दा पर बलवा नहीं हो रहा है, देश में महिलाओं के खिलाफ अपराधिक घटनाओं में बढ़ोत्तरी नहीं हो रही है, तो फिर उन सब घटनाओं को मुद्दा बनाकर अमेरिका के विदेश विभाग के प्रवक्ता सलाह क्यों दे रहे हैं। हम एक संप्रभू राष्ट्र हैं, हम अपने देश के अंदर होने वाली घटनाओं का निराकरण करने में सक्षम हैं। ऐसे में बाहरी मुल्क को सलाह देने और ऐसी घटनाओं का निपटारा करने में सहयोग देने की आवश्यकता क्यों पड़ी।
अमेरिका के विदेश विभाग के प्रवक्ता ने भले ही भारत की चर्चित घटनाओं के सवाल पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की हो, मगर इतना तो तय है कि विदेशी राज्यों की नजर देश में होने वाली हर घटना पर है। इसलिए सरकार को विदेशी संबंधों को मधुर बनाने के साथ ही आंतरिक सुरक्षा और आम जनता के सुरक्षा एवं सम्मान का भी ध्यान रखना होगा। हम ऐसा करने में सफल रहे, तो विदेशी ताकतें हमें सलाह देने की हिम्मत नहीं कर सकेंगीं।

Pin It