असली नीतू की खोज में जुटी पुलिस

Capture4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय से दो साल पहले निष्कासित छात्र अनिल मौर्या ने विवि की छात्र का एसएफआरएफ का पैसा 2.58 लाख रुपए नीतू सिंह के नाम से फर्जी खाता खोल निकाला है। पुलिस की पूछताछ में कुछ बातें सामने आयी हैं। जिसमें कई नीतू का नाम सामने आये हैं। अब विवि व पुलिस इस बात की तलाश में लगी है कि असली नीतू कौन है।
जब छात्रा नीतू की फेलोशिप नहीं मिली तो उसने कुलपति से इस बात की शिकायत की। पहले तो विवि के कर्मचारी इस बात से इंकार करते रहे कि चेक नही आया है। कुलपति के निर्देश के बाद जब रजिस्टर की जांच की गई तो पता चला कि रजिस्टर पर छात्रा का नाम और चेक नम्बर लिखा हुआ था लेकिन उस पर किसी की रिसीविंग नही थी। जांच के दौरान सीसी टीवी फुटेज से पता चला कि छात्र ने चेक कैश करा लिया और एटीएम से पैसा निकाल लिया है। जिस नीतू के नाम का चेक है उसे पता नही। जिस नीतू पर शक किया जा रहा था उसके विषय में कोई जानता नही। पुछताछ में जो नीतू सामने आयी है उसका इन सब से कोई लेना देना नही। इसके अतिरिक्त जिस कर्मचारी की बेटी का खाता बैंक में था उस समय वह अपने ससुराल थी। वहीं एक और नीतू पर शक है जो शहर से बाहर रहती है लेकिन उसकी कोई पहचान नही है। दो साल पहले ही इस छात्र को विश्वविद्यालय से निष्कासित कर दिया गया था। इसके बाद भी यह छात्र विश्वविद्यालय में बिना किसी डर के घूमता रहा।
लापरवाही किसकी
इन सारी बातों को देखों देखते हुए यह सवाल उठना लाजमी है कि इन बड़ा घटना के पीछे विवि व बैंक की लापरवाही है। सोचने का विषय यह है कि विभाग से लाखों रुपये की चेक गायब है और किसी को इस बात की जानकारी नही है। वही बैंक में एक ऐसी लडक़ी का अकाउंट खोल कर उसे एटीएम तक दे देता है जिसके बारे में उसके पास कोई सबूत नही है। अब विवि और बैंक एक दूसरे के सर इस दोषारोपण कर रहे हैं।
संजय प्रसाद रक्षा उत्पादन में तैनात
लखनऊ। 1995 बैच के आईएएस अफसर संजय प्रसाद को रक्षा मंत्रालय में संयुक्त सचिव के पद पर तैनात किया गया है। श्री प्रसाद हाल ही में केन्द्रीय प्रतिनियुक्ति पर दिल्ली गए थे जहां उन्हें विज्ञान एवं तकनीकी विभाग में तैनात किया गया था। श्री प्रसाद यूपी के लोकप्रिय अधिकारी रहे हैं।

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