अल्ट्रासाउंड फ्री होने से बढऩे लगी मरीजों की भीड़

रेडियोलॉजिस्ट की कमी बड़ी समस्या

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। प्रदेश सरकार की ओर से सरकारी अस्पतालों में अल्ट्रासाउंड की सुविधा तोमुफ्त कर दी गई लेकिन इस येाजना को सुचारू रूप से चलाना टेढ़ी खीर साबित हो रहा है। अभी सकरारी अस्पतालों में अल्ट्रासाउंड फ्री हुए दो ही दिन हुए हैं कि अल्ट्रासाउंड कराने वाले मरीजों की संख्या धीरे-धीरे बढऩे लगी है। जिससे लोगों को समय से अल्ट्रासाउंड की रिपोर्ट नहीं मिल पा रही है। इसके अलावा लोगों को फ्री अल्ट्रासाउंड करना किसी चुनौती से क म नहीं है क्योंकि प्रदेश के असपतालों में मात्र 160 रेडियोलॉजिस्ट ही तैनात हैं।
प्रदेश सरकार के आदेश पर मंगलवार से राजधानी के सभी सरकारी अस्पतालों में मुफ्त अल्ट्रासाउंड जांच शुरू हो गई। बुधवार राजधानी के सिविल, लोहिया, बलरामपुर अस्पतालों में लगभग 270 से ज्यादा मरीजों के अल्ट्रासाउंड हुए। इसके आलावा कई मरीजों को बिना अल्ट्रासाउंड के ही लौटना पड़ा। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की घोषणा के बाद एक सितंबर से सरकारी अस्पतालों में अल्ट्रासाउंड जांच मुफ्त हो गई।
बलरामपुर अस्पताल के सीएमएस डॉ. राजीव लोचन ने बताया कि बलरामपुर अस्पताल में दो अल्ट्रासाउंड मशीने हैं जिसमें से एक ही मशीन को चलाया जाता है जबकि एक बंद पड़ी है। कारण असपताल में रेडियोलॉजिस्ट के 4 पद हैं जबकि तैनाती दो की है। जिससे एक रेडियोलॉजिस्ट अल्ट्रासाउंड का काम देखता है और एक डिजिटल एक्सरे करता है।
सिविल अस्पताल के डायरेक्टर डॉ. राजेश ओझा का कहना है कि अस्पताल में पहले से ही मात्र 10 प्रतिशत जांचे ही पेड होती थी बाकी सब फ्री जाती थी। अल्ट्रासाउंड मुफ्त होने से कोई खास दिक्कत नहीं होनी चाहिये। अस्पताल में कुल 4 अल्ट्रासाउंड मशीनें हैं। वहीं रेडियेालॉजिस्ट के चार पद हैं जिसमें 3 रेडियोलॉजिस्ट तैनात हैं।
इसके आलावा डफरिन अस्पताल में मात्र 1 रेडियेालॉजिस्ट ही तैनात है। हैरानी की बात यह है कि यहां पद भी एक ही रेडियोलॉजिस्ट का है। प्रदेश के सबसे बड़े बाल महिला चिकित्सालय में मात्र 1 रेडियोलॉजिस्ट पर अल्ट्रासाउंड व एक्सरे दोनों की जिम्मेदारी है जिससे मरीजों को जंाच के लिए बलरामपुर असपताल भेजा जाता है। जहंा पर भी लंबी लाइन लगने पर या तो मरीज अगले दिन का इंतजार करते हैं या फिर बाहर से जांच कराते हैं।

यहां तो जांच ही बंद

भले ही सरकारी अस्पतालों में अल्ट्रासाउंड जांच मुफ्त हो गई लेकिन झलकारीबाई अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट के अभाव के चलते अल्ट्रासाउंड जांच ठप पड़ी है। अस्पताल में पिछले एक महीने से जांच बंद है और स्वास्थ्य विभाग एक रेडियोलॉजिस्ट की व्यवस्था नहीं करा पाया है। ऐसे में गर्भवती महिलाओं और दूसरे मरीजों को रोजाना ही सिविल अस्पताल और एनके रोड बाल महिला चिकित्सालय की दौड़ लगानी पड़ रही है। अस्पताल की सीएमएस डॉ. रेखा गौड़ का कहना है कि रेडियोलॉजिस्ट की नियुक्ति हो गई है और यहां अस्पताल में जल्द ही जांच शुरू हो जाएगी।

कितनी जांचें

सिविल अस्पताल 74
लोहिया अस्पताल 70
बलरामपुर अस्पताल 80
डफरिन अस्पताल 46

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