अर्थराइटिस की गिरफ्त में युवा

200 प्रकार की होती है अर्थराइटिस, हृदय रोग व आंखों की रौशनी भी जाने की रहती है आशंका

 4पीएम न्यूज़ नेटवर्क

Captureलखनऊ। ऐसा नहीं है कि अर्थराइटिस सिर्फ बुढ़ापे में होती है। आजकल युवाओं में भी यह समस्या देखने को मिल रही है। ऑर्थराइटिस किसी भी आयु में हो सकती है। अनियमित जीवन शैली और गलत खान-पान के कारण यह बीमारी युवाओं में भी तेजी से फैल रही है। भारत में भी युवाओं में तेजी से आर्थराइटिस की बीमारी हो रही है।
यह कहना है केजीएमयू के न्यूरो सर्जन डॉ. आर.के गर्ग का। उन्होंने कहा ऑर्थराइटिस करीब 200 प्रकार की बीमारियों का लक्षण है। इसके कारण हार्ट अटैक, ब्रेन अटैक, बांझपन व आंखों की रोशनी छिन जाने जैसी बीमारियों की आशंका भी बढ़ जाती है। उन्होंने बताया कि युवाओं को इस तरह की बीमारी को अक्सर इन्फेमेट्री आर्थराइटिस कहा जाता है। यह किसी भी आयु में हो सकती है। डा. गर्ग ने कहा कि 40 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों को ऑस्टो ऑर्थराइटिस ज्यादा होता है। डॉ. गर्ग ने बताया कि डायबिटीज की बीमारी केवल 10 प्रतिशत लोगों में है, लेकिन इसे लेकर लोग काफी जागरूक हैं, जबकि रुमेटॉइड ऑर्थराइटिस 23 प्रतिशत लोगों को प्रभावित करती है, फिर भी इसके बारे में लोग जागरूक नहीं हैं।

यह हैं लक्षण

डॉ. गर्ग ने बताया कि रुमेटॉइड ऑर्थराइटिस में शरीर की रक्षक प्रणाली (इम्यून सिस्टम) अपने ही जोड़ों में धावा बोल देती है। इससे जोड़ों में पाए जाने वाली झिल्ली सूज जाती है और गांठ बनने लगती है। जोड़ों में दर्द इसका प्रमुख कारण हैं। इसके अलावा जोड़ अकड़ जाना, मुठ्ठी बंद करने में दिक्कत आना, जोड़ों का डेढ़ा-मेढ़ा हो जाना भी लक्षण हैं। अगर यह लक्षण दिखाई दें तो तुरंत रुमेटोलॉजिस्ट से संपर्क करें।

ऐसे करें बचाव

  • गठिया से बचने के लिए खान-पान का ख्याल रखें। मोटापे के कारण होती है यह बीमारी।
  •  धूम्रपान करने वालों में बीमारी की संभावना ज्यादा होती है। इसलिए धूम्रपान से बचें।
  • विटामिन डी की कमी के कारण यह बीमारी होती है। इसके लिए सन एक्सपोजर लें।
  •  सप्ताह में करीब पांच दिन व्यायाम करें। इससे जोड़ों को मजबूती मिलेगी।
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