अरबपति बिल्डर संजय सेठ एमएलसी बनाना चाहते हैं प्रतीक यादव, अखिलेश नहीं है तैयार

एमएलसी उम्मीदवार के नाम को लेकर यादव परिवार में घमासान

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
k1लखनऊ। विधान परिषद के चुनाव को लेकर यादव परिवार में घमासान हो गया है। 25 मई तक राज्यपाल को नाम भेजे जाने हैं। मगर पार्टी में कई नामों को लेकर घमासान मचा हुआ है। सपा मुखिया अपने विश्वस्त लोगों को हमेशा साथ लेकर चलते हैं। मगर इस बार यह नाम बहुत हो गये हैं। लिहाजा वह इन्हें राज्यमंत्री का दर्जा देकर एडजस्ट किया जा रहा है। सीएम अखिलेश यादव अपनी यूथ ब्रिगेड के लोगो को विधान परिषद में भेजना चाहते हैं। मगर जिस नाम सबसे ज्यादा विवाद है उसका मसला तय नहीं हो पा रहा है। यह विवाद संजय सेठ को लेकर है जो लखनऊ के सबसे बड़े बिल्डर माने जाते हैं।
सपा के खेमे में संजय सेठ को लेकर खासी सरगर्मी हैं। संजय सेठ शालीमार बिल्डर के मालिक हैं। खालिद मसूद और संजय सेठ की पार्टनरशिप वाले शालीमार ग्रुप ने प्राइवेट और सरकारी क्षेत्र में अरबों रुपये का काम किया है। यह ग्रुप अब तक राजनेताओं की पूंजी खपाने के लिए चर्चा में रहता था। माना जाता था कि शालीमार ग्रुप की जो बड़ी-बड़ी परियोजनायें बनती हैं उनमें बड़ी संख्या में राजनेताओं का पैसा लगता है। शालीमार ग्रुप के मालिकों के रसूख के आगे बड़े-बड़े लोग नतमस्तक होते रहे हैं।
शालीमार ग्रुप में नौकरशाहों की भी खासी रूचि रहती है। यह चर्चा आम है कि प्रदेश के कई बड़े नौकरशाहों का करोड़ों रुपये संजय सेठ के साथ व्यापार में लगा हुआ है। संजय सेठ अपने व्यापार के सिलसिले में राजनेताओं और अफसरों का खासा उपयोग करते रहे हैं। उनसे रिश्ते रखने के लिए इन लोगो की कतार रहती है।
सरकार बनने के बाद इस बार संजय सेठ ने लम्बा हाथ मारा। उन्होंने अपने संबंध सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव के पुत्र प्रतीक यादव से बेहतर किये। संजय सेठ खुद राजनीति में दाव आजमाना चाहते थे। जाहिर है प्रतीक से बेहतर नाम कोई दुसारा नहीं हो सकता था। अब जब विधान सभा में 9 सीटें खाली हुई तो संजय सेठ को लगा कि उनका राजनीति में आने का सपना पूरा हो सकता है। लिहाजा उन्होंने प्रतीक यादव के जरिये मुलायम सिंह यादव तक अपनी पहुंच और पुख्ता करी और विधान परिषद के लिये अपनी दावेदारी पेश कर दी। बताया जाता है कि सपा मुखिया ने भी उनके नाम को हरी झंडी दे दी।
बताया जाता है कि सीएम अखिलेश यादव ने इस बात का विरोध किया। उनका कहना था कि अगर पूंजीपतियों को इस तरह सदन में भेजा जायेगा तो उसके गलत संदेश जायेंगे। पहले भी सपा मुखिया उद्योगपति संजय डालमियां को राज्यसभा में भेजकर खासे विवादों में रहे हैं। उस समय भी आरोप लगाया गया कि सपा खुद को समाजवादी कहती हैं। मगर जब राज्यसभा का नम्बर आता है तो पूंजीपतियों को आगे बढ़ाती है।
सूत्रों का कहना है कि कल यह सभी नाम फाइनल हो गये थे मगर सीएम के संजय सेठ के विरोध को लेकर यह सूची रुक गयी थी। देर शाम सीएम अखिलेश यादव ने भी कहा कि 25 से पहले सूची फाइनल हो जायेगी। सीएम कल विदेश दौरे पर फ्रांस जा रहे हैं। अब देखना यह होगा कि प्रत्याशी चयन में किसका पलड़ा भारी रहेगठे

सिपाही ने किया महिला फॉलोवर से रेप का प्रयास, मुकदमा दर्ज

  • गाजीपुर थाना क्षेत्र का मामला, फायर बिगे्रड में तैनात है श्याम किशोर
  • आठ माह बाद कोर्ट के आदेश पर मुकदमा दर्ज किया गया

 4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। राजधानी में खाकी गुंडई चरम सीमा पर है। एक तरफ जहां एसओ अपने ही विभाग के सिपाही को बेरहमी से पीट रहें है तो वही दारोगा और सिपाीियों पर इश्क का भूत भी तेजी से चढ़ रहा है। गाजीपुर थाना क्षेत्र में सिपाही ने महिला फॉलोवर से रेप करने का प्रयास किया। सूचना मिलने पर पहुंची पुलिस ने मौके पर सिपाही के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की। पुलिस के रवैये से नाराज महिला ने आठ महीनों से न्याय के लिए दर-दर भटक रही थी। बुधवार को महिला की तहरीर पर सिपाही के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर पुलिस जांच की बात कर रही है।
थानाध्यक्ष गाजीपुर देवेन्द्र दूबे के मुताबिक फायर बिगे्रड इंदिरानगर में सिपाही के पद पर श्याम किशोर तैनात है। जबकि फायर बिगे्रड में ही एक महिला फॉलोवर भी तैनात है। श्री छूबे के मुताबिक 15 सितम्बर को श्याम किशोर ने महिला फॉलोवर से रेप करने का प्रयास किया था। इसकी सूचना पर पुलिस पहुंची थी लेकिन सिपाही के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई। कार्रवाई नहीं होने से महिला फॉलोवर ने न्याय के लिए कई अधिकारियों से गुहार लगाई लेकिन सिपाही के ऊपर मुकदमा तक दर्ज नहीं किया गया। थकहार कर महिला ने कोर्ट का सहारा लिया। जहां कोर्ट के आदेश के बाद पुलिस ने सिपाही श्याम किशोर के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच की बात कह रही है।
आठ माह बाद मुकदमा दर्ज, जांच के बहाने फिर टरकाया
महिला की सुरक्षा की बात करने वाली पुलिस को जब महिला ने सूचना दिया तो मौके पर पहुंची पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। पीडि़ता ने कोर्ट का सहारा लिया। आठ माह बाद कोर्ट के आदेश पर मुकदमा दर्ज किया गया इसके बाद भी पुलिस जांच करने की बात कह रही है। ऐसे में सवाल उठता है कि पुलिस के इस रवैये के कारण महिला को न्याय मिल पायेगा।

Pin It