अमीरुद्ïदौला लाइब्रेरी से गायब हो रही हैं किताबें

लाइब्रेरी में सात बार से ज्यादा हो चुकी है चोरी
कंप्यूटर लगे, लेकिन सीसीटीवी का है इंतजार
किताबें नहीं की जा सकीं अब तक डिजिटल

Capture4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। तीन मंजिला अमीरुद्दौला लाइब्रेरी बदहाली का शिकार है। बहुत सारे विषयों की बेहतरीन किताबें और पांडुलिपियां का यह संग्रहालय के सही देखरेख के अभाव में बरबाद हो रही हैं। आए दिन किताबों की चोरी भी हो रही है। लाइब्रेरी में कर्मचारियों की भी कमी है। ताड़पत्रों पर लिखी पांडुलिपियां भी खराब हो रही है। ऐसे में यदि लाइब्रेरी की व्यवस्था को दुरुस्त नहीं किया गया तो आने वाली पीढ़ी तक कई दुर्लभ सामग्रियां नहीं पहुंच सकेंगी।
अमीरुद्दौला लाइब्रेरी की सीलन भरी दीवारे इसकी बदहाली की कहानी बयां कर रही हैं। पांडुलिपियों के देखभाल के लिए जानकार कर्मियों की जरूरत है। कर्मचारियों की कमी लाइब्रेरी की देखभाल में और बाधा बन रही है। बदहाली के मामले लाइब्रेरी इंचार्ज शशिकला ने कहा कि हमने पांडुलिपियों की हिफाजत और सीसीटीवी कैमरे के लिए कई बार शासन को लिखा, लेकिन बार-बार बजट का भरोसा दे दिया जाता है।

किताबों की हिफाजत बड़ी चुनौती
लाइब्रेरी इंचार्ज शशिकला का कहना है कि कई बार चोरी की वारदात के बाद भी सुरक्षा के इंतजाम नहीं किए गए। साल 2010 से लेकर अब तक यहां किताबों की 6 से 7 बार चोरी की वारदात हो चुकी है। इसकी जानकारी जिम्मेदारों ने पुलिस को दी लेकिन अब तक सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं हुए। मामले पर शशिकला ने कहा कंप्यूटर तो डीएम के आदेश पर लग गए लेकिन सीसीटीवी के लिए अब इंतजार कराया जा रहा है।

पांडुलिपियों का है अनोखा संग्रह

लाइब्रेरी में हिन्दी, अंग्रेजी, संस्कृत, उर्दू, बंगला, भाषा में दुर्लभ एवं ऐतिहासिक महत्व वाली उत्कृष्ट कोटि की लगभग 2 लाख से अधिक पुस्तकें हैं। संस्कृत की 371 पांडुलिपि, अरबी की आठ , फारसी की 56,उर्दू में 7 पांडुलिपियों के अतिरिक्त ताड़पत्र,भोजपत्र व अन्य वस्तुओं पर संस्कृत,पालि,बर्मीज,तिब्बती भाषाओं में भी है जिसमें कुछ तो हस्तलिखित पाण्डुलिपियां तो 400 वर्ष से अधिक पुरानी है। इनकी बाइडिंग का भी इंतजाम नहीं है। जिम्मेदारों का कहना है कि जल्द ही इसकों संजोने के कोई इंतजाम नहीं किए गए तो आने वाले समय में अच्छी व बेहतरीन विरासत को खो न दें।

इंटैक को भी भेजा है प्रप्रोजल
लाइब्रेरी को डिजिटल किए जाने के सवाल पर लाइब्रेरी इंचार्ज शशिकला ने कहा कि कई जगहों पर फंड के लिए प्रपोजल भेजा जा चुका है। अभी हॉल ही में इंटैक को एक प्रॉपोजल भेजा गया है। जिन्होंने किताबों की संख्या भी मांगी है। अगर सब कुछ ठीक रहा तो इसे जल्द ही डिजिटलाइज कर दिया जाएगे 

लाइब्रेरी का इतिहास
अमीरुद्दौला लाइब्रेरी शहर के पुराने किताब संग्रहालयों में है। सन 1907 में यह लाल बारादरी की ऊपरी मंजिल में स्थापित की गयी, इसके बाद साल 1910 में यह छोटा छत्तरमंजिल में स्थानांतरित की गयी। यहां इसे पब्लिक लाइब्रेरी का नाम दिया गया। साल 1925 में तत्कालीन सरकार व ब्रिटिश इंडिया एसोसिएशन के मध्य समझौते के बाद इसका नाम अमीरूद्दौला पब्लिक लाइब्रेरी कर दिया गया। 6 मार्च 1926 को यह पुस्तकालय नवनिर्मित भवन में स्थानान्तरित किया गया जिसका उद्घाटन तत्कालीन गर्वनर हर्टकोर्ट बटलर ने किया था।

यह मामला संज्ञान में आया है। जांच के बाद जरूरी र्कारवाई की जाएगी।
-उमेश मिश्रा, सीडीओ

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