अमित घोष ने मनचाहे तरीके से रिटायर लोगोंको एनआरएचएम में किया तैनात

एनआरएचएम में नियमों को दरकिनार कर दे दी  गई नियुक्ति

पद सृजित होने से पहले ही कई खास लोगों को कर दिया गया नियुक्त

Capture4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। प्रदेश के चिकित्सा, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग के आनुसांगिक संगठन राष्टï्रीय स्वास्थ्य मिशन में मनमानी चरम पर है। महत्वपूर्ण पदों पर अपने-अपने मातहमों को बिठाया गया है। मिशन के सचिवालय, राज्य कार्यक्रम प्रबंधन इकाई, सिफ्सा और तकनीकी सहयोग इकाई-आईएचएटी में अपने पसंदीदा और सेवानिवृत्ति लोगों को मोटे वेतन पर बैठा दिया गया है, जिनका काम सिर्फ और सिर्फ काले कारनामों पर पर्दा डालना और लाभ कमाना है। एनआरएचएम जिसकी अभी सीबीआई जांच चल रही है, फिर भी अधिकारियों के हौसले बुलंद है।
एनआरएचएम का विवादों से पुराना नाता है। इस विभाग में पूर्व में कई कारनामें सामने आए थे। जिसकी सीबीआई जांच आज भी चल रही है। इतना सब होने के बाद भी अधिकारियों के हौसले बुलंद है। विभाग में कई लोगों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि जिस तरह से अधिकारी मनमर्जी कर लाभ कमा रहे है, उससे सीबीआई जांच की संभावना बलवती होने लगी है। एनआरएचएम में कई महत्वपूर्ण पदों पर सेवानिवृत्त लोगों को बिठाया गया है। प्रदेश में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के महानिदेशक रहे डा. बलजीत सिंह अरोरा को नियम विरुद्ध दो बार सेवा विस्तार मिला था जिसपर उच्च न्यायालय ने रोक लगा दी तो मंत्री अहमद हसन ने उन्हें एनआरएचएम में नियुक्ति दे दी। इतना ही नहीं निदेशक ने अमित घोष ने उन्हें दो हजार रुपए प्रतिदिन पर नियुक्त कर उन्हें प्रधान सलाहकार बना दिया गया। इस पद की स्वीकृति भारत सरकार ने अब दी है। एक लाख पच्चीस हजार रुपए के पद पर नियुक्ति प्रक्रिया जारी है लेकिन डा. अरोरा पहले से ही चयनित है और काम कर रहे हैं। इसी प्रकार एक लाख पच्चीस हजार रुपए के वेतन पर एक और प्रधान सलाहकार है जो पूर्व में चिकित्सा स्वास्थ्य और परिवार कल्याण महकमें की महानिदेशक रह चुकी हैं। सूत्रों के मुताबिक इनके पद की स्वीकृति अभी भारत सरकार द्वारा नहीं मिली है लेकिन वो पद पर काबिज है। सूत्रों के मुताबिक इसी प्रकार सिफ्सा में लगभग 2.5 लाख प्रति माह रुपए का पद सृजित कर निदेशक ने अपने पंसदीदा सेवानिवृत्त अधिकारी को नियुक्त कर दिया। ऐसे ही महाप्रबंधक एमआईएस पद पर भी तैनाती दे दी गई है जबकि नियमत: अभी तक चयन नहीं हुआ है। राज्य कार्यक्रम प्रबंधन इकाई में सलाहकार के पद पर, तकनीकी सहयोग इकाई में महत्वपूर्ण पदों पर कई लोगों को नियुक्ति दे दी गर्ई है। ये सभी खास लोग है जिनकी सेवा को लाभ विभाग को तो नहीं मिल रहा है, हां नियुक्त करने वाले लोग जरूर इसका लाभ उठा रहे हैं।

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