अमर सिंह को दिल से ही टहला देंगे नेताजी, नहीं लेंगे पार्टी में क्योंकि अखिलेश नहीं चाहते पार्टी पर लगे दाग

पार्टी में आने के लिए बेताब हैं अमर सिंह

पिछले समय में हुई बदनामी के कारण अब पार्टी में लेने को नहीं हैं सीएम तैयार
लंबे समय से बढिय़ा-बढिय़ा बातें करते आ रहे हैं नेताजी, मगर हकीकत में बताते हैं अमर सिंह को उनकी हैसियत

 संजय शर्मा
लखनऊ। समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष और तेज तE1र्रार सीएम अखिलेश यादव जानते हैं कि अमर सिंह अब इतिहास के पन्नों की चीज बन चुके हैं। देश की राजनीति में अब अमर सिंह अप्रांसगिक हो चुके हैं। कोई भी दल उन्हें लेने को तैयार नहीं है। गांधी परिवार से लेकर मोदी दरबार तक हाजिरी लगा चुके अमर सिंह के लिए अब सपा के अलावा कोई विकल्प भी नहीं है, मगर अखिलेश यादव जानते हैं कि जिस समय अमर सिंह सपा के सर्वे-सर्वा हुआ करते थे, उस समय में पार्टी की जितनी बदनामी हुई थी उतनी कभी नहीं हुई। बॉलीवुड की कथाओं से लेकर दलाली के पन्नों तक न जाने किन-किन जगह अमर गाथाएं सुनाई जाती रही। ऐसे समय में जब खुद अखिलेश यादव के दामन पर कोई दाग नहीं है, वह अमर सिंह को लाकर एक बार फिर से पार्टी की बदनामी नहीं करवाना चाहते।
यादव परिवार के लोग उन बातों को भी नहीं भूले हैं जो अमर सिंह ने पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाए जाने के बाद कहीं थीं। हकीकत यह है कि देश भर के राजनेताओं में कोई भी ऐसा नहीं हुआ जिसने मुलायम सिंह पर व्यक्तिगत हमला न किया हो। मगर अमर ङ्क्षसह ने यह सारी सीमाए लांघ ली थीं। खुद की पार्टी बनाकर सपा का नाश करने वाले अमर सिंह को अपनी राजनीतिक हैसियत तभी पता चल गई थी जब वह लोकदल जैसी पार्टी से लोकसभा का चुनाव लड़े थे और न सिर्फ चौथे स्थान पर रहे बल्कि अपनी जमानत तक गवां बैठे थे। राजनीति के माहिर खिलाड़ी मुलायम सिंह यादव अब अमर सिंह को असलियत में उनकी हैसियत बताना चाहते हैं। वह कभी भी अमर सिंह के खिलाफ नहीं बोलते बल्कि उनके बारे में अच्छा-अच्छा बोलते हैं, मगर नेताजी यह भी जानते हैं कि जिस नेता ने पूरे देश में घूम-घूम कर यह कहा कि वह नेताजी के राज जानता है और बदनामी की, तो अब समय आ गया है कि उसे भी राज्यसभा भेजने जैसे या पार्टी में लेने जैसे मुद्दे पर टहलाया जाए। इसलिए जो निर्णय नेताजी पल भर में ले सकते हैं वह सालों से नहीं ले रहे हैं। समाजवादी पार्टी जानती है कि अगर अमर सिंह को पार्टी में लिया गया तो उसके फायर ब्रांड नेता आजम खां पार्टी से किनारा कर सकते हैं। आने वाले विधानसभा चुनाव में पार्टी को मुसलमानों की बेहद जरूरत है। ऐसे हालात में सपा आजम को नाराज करने का जोखिम नहीं उठा सकती।
दूसरी ओर बच्चन परिवार भी अब अमर सिंह से खासा खफा है। अपनी जहरीली जबान से अमर सिंह जया बच्चन की भी खासी फजीहत कर चुके हैं। खुद प्रो. रामगोपाल यादव अमर सिंह की बेइज्जती को भूले नहीं हैं। ऐसे में इतने लोगों को नाराज करके एक ऐसे नेता को पार्टी में लेना जिसकी कोई राजनैतिक हैसियत न बची हो, अक्लमंदी नहीं है। यह बात अब सपा के जिम्मेदार लोग समझ चुके हैं।

पढि़ए नेताजी के दिल में रहने वाले अमर सिंह ने क्या कहा उनके लिए

 सपा से निकाले जाने के बाद मार्च 2010 में अमर सिंह बोले, ‘मुलायम सिंह या तो आप लोहियावादी नहीं हैं या फिर अपने स्वार्थी मुलायमवाद का सफेद झूठ लोहिया जी पर मढऩा चाहते हैं। ऐसा लगता है कि सारी नेतृत्व क्षमता, गुणवत्ता सिर्फ एक ही परिवार में है। मेरी गलती थी कि मैंने 14 साल से हो रही इस धांधली को नहीं देखा।’
23 अक्टूबर 2010 को बोले, ‘मुलायम सिंह यादव ने लोहिया के सिद्धांतों की बलि चढ़ा दी है। लोहिया ने कभी भाई-भतीजावाद को बढ़ावा नहीं दिया। मुलायम इसी को बढ़ावा दे रहे हैं। समाजवादी पार्टी में सिर्फ दो अपवाद थे। एक जनेश्वर मिश्र और दूसरे अमर सिंह। एक को राम जी खा गए तो दूसरे को रामगोपाल।’
 21 फरवरी 2012 को कहा, ‘यूपी के भ्रष्टाचार में मुख्यमंत्री मायावती और मुलायम सिंह यादव दोनों साझीदार हैं। मुलायम सिंह एक पहिए की साइकिल चलाने वाले जोकर हैं।’
 इसी वर्ष 12 अप्रैल को कहा, ‘मुलायम सिंह ने बलात्कार पर बयान दिया है कि लडक़े हैं। मन मचल जाता है। ऐसा लगता है कि मुलायम सिंह का वश चले तो रेप को भी जायज कर दें।’
तल्खी के दिनों में अमर ने मुलायम को निशाना बनाते हुए यहां तक कह दिया था कि14 साल तक वह उनके दर्जी और कूड़ेदान का काम करते रहे, लेकिन पार्टी से निकल जाने के बाद मुलायम अपनी अच्छी-बुरी राजनीति के खुद जिम्मेदार हैं।
 अमर ने अपने ब्लॉग पर लिखा था, ’मैंने कहा था कि मैं मुलायम का मात्र दर्जी और कूड़ेदान हूं। उनकी गलत-सलत नीतियों को नैतिकता का कपड़ा सिलकर संवाारने का मैं 14 साल का अपराधी हूं, लेकिन दल की गलतियों का श्रेय लेने वाला कूड़ेदान अब मैं नहीं रहा।’
 अमर ने यह भी लिखा, ’मुलायम अब आप अपनी अच्छी-बुरी राजनीति के अकेले दर्जी और कूड़ेदान खुद हैं। आपको अपनी भूमिका मुबारक और मेरे राजनीतिक निर्वाण के लिए शुक्रिया।’
 अमर ने यह भी कहा था मैं मुलायम के लिए एकलव्य बनकर संतुष्ट हूं, पर एकलव्य की तरह अपना अंगूठा उन्हें नहीं दूंगा।
 अमर, मुलायम दोस्ती के परवान न चढऩे का तर्क देने वाले उन बयानों की याद दिलाते हैं जो अमर सिंह ने सपा से बाहर होने के बाद बीते चार वर्षों में मुलायम सिंह यादव और सपा के अन्य नेताओं पर दिए।
अमर ने लोकसभा चुनाव तक मुलायम पर कई तल्ख टिप्पणियां कीं। कभी उन्हें लोहियावादी की जगह परिवारवादी करार दिया तो कभी सपा के राष्टï्रीय महासचिव प्रो. रामगोपाल यादव पर निशाना साधते हुए उन्हें अपने निष्कासन के लिए जिम्मेदार ठहराया।
हद तो यह रही है कि अमर सिंह ने मुलायम पर बलात्कारियों का सहयोग करने तक का आरोप लगा दिया।

अमर सिंह राज्यसभा जाने के लिए कितना बेचैन हैं, अब यह बात किसी से छिपी नहीं है। प्रो. रामगोपाल यादव से लेकर आजम खां और जया बच्चन की नाराजगी लेने को कोई तैयार नहीं है, क्योंकि अब सभी जिम्मेदार लोग जानते हैं कि अमर सिंह की राजनैतिक हैसियत नहीं बची है।

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