अभिव्यक्ति की आजादी और जेएनयू

अभिव्यक्ति की आजादी हमारे संविधान में दिया गया मौलिक अधिकार है। भाजपा को भी यह बात समझनी चाहिए। जेएनयू में जिस फौरी तौर से कार्रवाई की गई है। उस तरह की कार्रवाई कश्मीर में नहीं देखने को मिलती। ऐसे में भाजपा सरकार को छात्र और विश्वविद्यालय की गरिमा भी बनाये रखना चाहिए।

sanjay sharma editor5विश्वविद्यालय वाद विवाद पर खुलेआम बहस की जगह है। अफजल गुरु की फांसी पर भी यहां चर्चा हो सकती है। इस चर्चा से देशभक्ति पर कोई आंच नहीं आएगी। राष्ट्रवाद की परिभाषा संकुचित नहीं हो सकती। राष्ट्र को अपनी आलोचनाओं के लिए भी तैयार रखना चाहिए। महज विरोध के नाम पर किसी को राष्ट्रदोही या राष्ट्र विरोधी नहीं किया जा सकता। जेएनयू में सरकार की कार्रवाई निंदनीय है। सरकार को मामले की पहले विश्वविद्यालय स्तर पर जांच करानी चाहिए थी। पर सरकार ने ऐसा करना ठीक नहीं समझा। भाजपा सरकार का राष्ट्रवादी एजेंडा का लोगों पर थोपना कहीं से सही नहीं दिखता। केंद्र की भाजपा सरकार का उद्देश्य जैसे लगता है कि जनता को भ्रम में डालो और ध्रुवीकरण करो। इस तरह की कार्रवाई सरकार की छवि को नुकसान पहुंचाती दिखाई दे रही है। यह विपक्ष को एकजुट होने का मौका देती है। हो सकता है इस मामले से संसद का एक और सत्र इसकी भेंट चढ़ जाए।
मामले पर जिस तरह विपक्ष एकजुट हो रहा है, उससे सरकार की इस मामले में किरकिरी हो सकती है। इतना ही नहीं विपक्ष का नजरिया भी इस मामले में अपनी जगह सही दिखता है। अभिव्यक्ति की आजादी हमारे संविधान में दिया गया मौलिक अधिकार है। भाजपा को भी यह बात समझनी चाहिए। जेएनयू में जिस फौरी तौर से कार्रवाई की गई है। उस तरह की कार्रवाई कश्मीर में नहीं देखने को मिलती। ऐसे में भाजपा सरकार को छात्र और विश्वविद्यालय की गरिमा भी बनाये रखना चाहिए। सरकार की कार्रवाई से निर्णय लेने की क्षमता में कमी साफ नजर आती है। छात्र राजनीति के मुद्दे को सरकार के मंत्री राष्ट्रीय आपदा बता रहे हैं। वहीं एबीवीपी विचारधारा के मुद्दे पर विश्वविद्यालयों में सरकार से दखल देने की मांग करती है जो कि भविष्य के लिए सही नहीं है। इससे जो लोग वामपंथ के साथ नहीं थे वे भी उनके साथ आ गए। भाजपा ने कन्हैया की गिरफ्तारी करा कर कांग्रेस सहित पूरे विपक्ष को एक मुद्दा बैठे बिठाए दे दिया है। गाय, राष्ट्रवाद, देशभक्ति जैसे मुद्दों से ही सरकार लोगों का ध्यान खींचती रही है। ऐसे में सहिष्णुता मामले के चलते भाजपा सरकार के सारे अच्छे काम दब जाएंगे। ऐसा भाजपा विरोधी गठबंधन के चलते नहीं बल्कि लोकतंत्र पर हमले के चलते होगा। सम्माननीय मंत्रियों को यह समझना होगा कि यदि यह राष्ट्रीयवाद को लेकर बहस है तो फिर जेएनयू के बजाय उनसे पूछताछ होनी चाहिए। उन्होंने लोकतंत्र को चेतावनी दी है। यह बड़ा राष्ट्र विरोधी कृत्य है।

Pin It