अब सीआरपीएफ के जवान ने सुविधाओं को लेकर उठाया सवाल

सेना और पैरामिलिट्री के जवानों के बीच सुविधाओं में भेदभाव का लगाया आरोप

capture4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। बीएसएफ जवान तेज बहादुर ने हाल ही में सोशल मीडिया पर एक वीडियो अपलोड कर जवानों को दिए जाने वाले खाने की शिकायत की थी। इस मामले को गंभीरता से लेकर गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने सेना के अधिकारियों को जांच करने का आदेश दिया था। इस घटना को अभी तीन दिन भी नहीं बीता कि सीआरपीएफ के एक जवान का शिकायती वीडियो भी वायरल हो गया। इस वीडियो में सीआरपीएफ जवान जीत सिंह ने सेना और सीआरपीएफ को मिल रही सुविधाओं को लेकर कई सवाल उठाए हैं। इसलिए एक बार फिर सुरक्षा बलों को सरकार की तरफ से दी जा रही सुविधाओं और हालिया स्थिति पर सवालिया निशान खड़े हो गये हैं।
सीआरपीएफ की तरफ से मिलने वाली सुविधाओं पर सवाल उठाने वाले सीआरपीएफ जवान का नाम जीत सिंह है। जीत सिंह ने कुल दो मिनट इक्यावन सेकेंड का वीडियो बनाया है, जिसमें सेना और पैरामिलिट्री फोर्स में भेदभाव को लेकर सवाल उठाया है। वायरल वीडियो में जीत सिंह कह रहे हैं, ‘दोस्तों, मैं कांस्टेबल जीत सिंह, सेंट्रल रिजर्व पुलिस फोर्स का जवान हूं। मैं आप लोगों के जरिये हमारे देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक एक संदेश पहुंचाना चाहता हूं। जीत के मुताबिक दोस्तों आर्मी को पेंशन भी है। हमलोगों की पेंशन थी वो भी बंद हो गई। 20 साल बाद हम नौकरी छोडक़र जाएंगे तो क्या करेंगे? सेना से रिटायर जवानों को दोबारा काम करने के लिए केंद्र और राज्य सरकार तमाम रियायतें मुहैया कराती हैं। कुछ पदों में आरक्षण, उम्र और डिग्री में छूट के अलावा पूर्व सैनिकों की निजी सुरक्षा एजेंसियों का रजिस्ट्रेशन भी सरकार कराती है। बिजनेस करने वाले पूर्व सैनिकों के लिए आर्थिक मदद भी दी जाती है। सेना में सीएसडी कैंटीन का अलग डिपार्टमेंट है। इसमें सामान काफी सस्ता मिलता है। अर्धसैनिक बलों के भी कैंटीन होते हैं, जिनकी संख्या कम है। सेना के अस्पतालों में इलाज की ज्यादा सुविधाएं हैं, जो मुफ्त मिलती हैं। इसी तरह पैरामिलिट्री में भी मेडिकल विंग होता है और रीजनल-जोनल सेंटर में अस्पताल होते हैं। इसके अलावा सीजीएचएस यानी सेंट्रल गवर्नमेंट हेल्थ सर्विस के कार्ड होल्डर को सरकारी या प्राइवेट अस्पतालों में रियायती दरों पर इलाज की सुविधा मिलती है। हालांकि सेना के जवानों जितनी सुविधा अर्धसैनिक बलों को नहीं मिलती है। वहीं सीआरपीएफ ने सफाई दी है कि ये सीआरपीएफ के जवान का वीडियो लगता है। ये वीडियो सोशल मीडिया में अक्टूबर 2016 में डाला गया। हम ये पता करने की कोशिश कर रहे हैं कि उसकी पोस्टिंग अभी कहां हैं।

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