अब शक्ति प्रदर्शन को तैयार बसपा

  • कांशीराम की पुण्यतिथि पर होगी महारैली
  • मायावती के आदेश पर हर विधानसभा से 5 हजार की भीड़ जुटाने में जुटे पदाधिकारी
  • स्मृति स्थल पर कल 10 लाख से अधिक कार्यकर्ताओं के आने का दावा, होर्डिंग्स से अटा शहर

 प्रभात तिवारी
8-oct-page-11लखनऊ। बसपा के जनक कांशीराम की दसवीं पुण्यतिथि पर बहुजन समाज पार्टी ने शक्ति प्रदर्शन की तैयारी कर ली है। बसपा सुप्रीमो मायावती ने पदाधिकारियों को प्रदेश की हर विधानसभा क्षेत्र से कम से कम 5 हजार लोगों की भीड़ लेकर आने का फरमान सुनाया है। कांशीराम स्मृति स्थल व शहर के प्रमुख स्थानों में बड़े-बड़े होर्डिंग्स और बैनर लगा दिए गए हैं। रैली का मकसद विपक्षी दलों के सामने बसपा को सर्वाधिक जनाधार वाली पार्टी के रूप में प्रस्तुत करना माना जा रहा है। यदि बसपा ऐसा करने में कामयाब होती है तो निश्चित तौर पर पिछड़ी और दलित जातियों को साथ लेकर आगामी चुनाव में सरकार बनाने वाली अन्य पार्टियों की उम्मीदों पर पानी फिर सकता है।
कांशीराम ने 14 अप्रैल 1984 को बसपा का गठन किया था। कांशीराम की छवि दलित नेताओं में एक ऐसे लीडर के रूप में है, जिन्होंने दलितों को समाज की मुख्य धारा से जोडऩे का काम किया। कांशीराम ने अपने जीते जी 15 दिसंबर 2001 को मायावती को अपना उत्तराधिकारी घोषित किया था। दलितों के बीच मायावती की छवि लोकप्रिय दलित नेत्री के रूप में हैं। शायद यही वजह है कि मायावती खुद को दलितों और वंचितों की देवी मानती हैं। यह बयान कुछ महीने पहले पूर्व बीजेपी नेता दयाशंकर की माया पर टिप्पणी के बाद उपजे विवाद के दौरान उन्होंने खुद दिया था। फिलहाल बसपा प्रमुख 2017 के चुनाव में कोई कोर कसर नहीं छोडऩा चाहती हैं। उन्होंने 2007 में अपने परंपरागत वोट बैंक यानी दलितों के अलावा ब्राह्मणों को साथ लेकर यूपी में मुख्यमंत्री की कुर्सी हासिल की थी। इसी चुनावी मंत्र को वे फिर आजमाने जा रही हैं। यही वजह है कि उन्होंने अपने अधिकांश जोनल कोऑर्डिनेटर जातिगत समीकरणों को ध्यान में रखकर बनाए हैं। इनमें ब्राह्मणों की संख्या अधिक है।

ट्रेनों और बसों में भरकर आयेंगे समर्थक

रैली के लिए 20 ट्रेनों और सैकड़ों बसों से समर्थक राजधानी आएंगे। बसपा सूत्रों के मुताबिक पार्टी अब तक की सबसे बड़ी रैली करने की तैयारी में है ताकि जनता पर इसका सकारात्मक असर पड़ सके। रैली आयोजन स्थल पर तीन से चार करोड़ की होर्डिंग्स, बैनर, पोस्टर और झंडे लगे हैं। यदि रैली में भी उम्मीद के अनुसार भीड़ पहुंची तो निश्चित तौर पर मायावती विपक्षी दलों के नेताओं की मुश्किलें बढ़ाने में कामयाब हो जाएंगी। इसके अलावा बसपा प्रमुख संवेदनशील मुद्दों को भी भुनाने की कोशिश करेंगी। इससे भाजपा, कांग्रेस और सपा की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।

दल-बदलुओं को जवाब देने का प्रयास

बसपा सुप्रीमो मायवती पार्टी छोडक़र जाने वाले नेताओं को करारा जवाब देने की कोशिश भी कर रही हैं। उनके निशाने पर स्वामी प्रसाद मौर्या, आरके चौधरी, ब्रजेश पाठक और पार्टी छोडक़र जाने वाले अन्य नेता हैं। पार्टी कार्यकर्ताओं की मानें तो बसपा से अलग होने के बाद पांच लाख लोगों की भीड़ लखनऊ में जुटाने का दम भरने वाले स्वामी प्रसाद मौर्या बीजेपी का दामन थामने के बाद 50 हजार की भीड़ भी नहीं जुटा पाये थे जबकि स्वामी के साथ बसपा से अलग होने वाले ब्रजेश पाठक और कई अन्य पूर्व बसपा नेता भी मौजूद थे। कार्यक्रम में बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह मुख्य अतिथि थे। आरके चौधरी के पास भी दलित वर्ग का जनाधार नहीं है। शायद इसी वजह से चौधरी की पार्टी बीएस-4 की तरफ से कांशीराम की पुण्यतिथि पर प्रेस क्लब लखनऊ में एक छोटा कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। कांशीराम के भाई दलबारा सिंह भी कांशीराम की पुण्यतिथि पर कार्यक्रम आयोजित कर रहे हैं लेकिन उनकी बहुजन संघर्ष पार्टी (कांशीराम) के पास भी समर्थकों की भीड़ नहीं है।

कश्मीर में फिर भडक़ी हिंसा, कर्फ्यू 

  • घर के बाहर खड़े 12 साल से बच्चे की पैलेट गन से मौत के बाद भडक़ा आक्रोश
  • गृहमंत्री के आश्वासन के बावजूद सेना ने किया पैलेट गन का इस्तेमाल

 4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
श्रीनगर। जम्मू एवं कश्मीर में एक बार फिर हिंसा भडक़ गई है। सुरक्षा बलों के साथ झड़प में गोलीबारी के दौरान पैलेट गन के छर्रों से घायल 12 साल के बच्चे की मौत हो गई है जबकि गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने सुरक्षा बलों को पैलेट गन का इस्तेमाल न करने और अन्य विकल्पों का इस्तेमाल किए जाने का भरोसा दिलाया था इसलिए बच्चे की मौत के बाद लोग बेकाबू होकर प्रदर्शन कर रहे हैं। वहीं प्रशासन ने मामले को नियंत्रित करने के लिए कफ्र्यू लगा दिया है।
श्रीनगर के सैदपोरा का रहना वाला 12 साल का जुनैद अहमद भट्ट अपने घर के बाहर खड़ा था और तभी पैलेट गन के छर्रे लगने से गंभीर रूप से घायल हो गया। पुलिस ने बताया कि इलाके में झड़प के बाद सुरक्षाबलों को पैलेट गन का इस्तेमाल करना पड़ा। हालांकि पुलिस सूत्रों ने साथ ही बताया कि जुनैद उस प्रदर्शन का हिस्सा नहीं था। एक अधिकारी ने नाम न जाहिर करने की शर्त पर बताया, वह शहर के सैदपोरा में अपने घर के मुख्य द्वार पर खड़ा था, तभी उसे कई छर्रे लगे। स्थानीय लोगों के मुताबिक सिर और छाती में दर्जनों छर्रे लगने की वजह से जुनैद गंभीर रूप से घायल हो गया था। स्थानीय लोगों ने उसे इलाज के लिए शेर-ए-कश्मीर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइसेंज (एसकेआईएमएस) में भर्ती कराया था, जहां उसने आज दम तोड़ दिया। जुनैद का शव जब उसके घर लाया गया, तो उसकी मौत से गुस्साए सैकड़ों लोग सडक़ों पर उतर आए और सरकार विरोधी नारे लगाने लगे। जुनैद का शव लेकर शहर में ईदगाह के करीब कब्रिस्तान की तरफ जा रहे लोगों को काबू में करने के लिए सुरक्षाबलों को आंसू गैस के गोले दागने पड़े। स्थानीय लोगों का कहना है कि सुरक्षाबलों ने जनाजे (शवयात्रा) को रोकने की कोशिश की। इससे स्थानीय लोगों और सुरक्षाबलों के बीच फिर झड़प शुरू हो गई और इस दौरान आंसू गैस और पैलेट फायरिंग में कई और लोग घायल हो गए। गौरतलब है कि 9 जुलाई को सुरक्षाबलों द्वारा हिज्बुल मुजाहिदीन के कमांडर बुरहान वानी को मार गिराए जाने के बाद से घाटी में अशांति का माहौल है, इस दौरान भडक़ी हिंसा में मृतकों की संख्या बढक़र 91 हो गई है।

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