अब याद आया राम मंदिर…

बिहार चुनाव ऐसे मुद्ïदों के सहारे लडऩे की कोशिश की गई जो कहीं से उचित नहीं था। यह कहें कि भाजपा अपने मुद्ïदों से भटक गई थी तो गलत नहीं होगा। अब, जबकि उत्तर प्रदेश में चुनावी माहौल बन रहा है तो फिर भाजपा पुराने मुद्ïदों के सहारे चुनावी वैतरणी पार करने की कोशिश करेगी।

sanjay sharma editor5उत्तर प्रदेश में 2017 में आगामी विधान सभा चुनाव होना है। सभी राजनैतिक पार्टियां इस मिशन को फतह करने की तैयारी में लगी हुई हैं। प्रत्येक पार्टी अपने-अपने वोट बैंक को सेट करने के प्रयास में है। यह सत्य है कि चुनावों में येन-केन-प्रकारेण हर पार्टी का एक ही उद्देश्य होता है कि उसे चुनाव जीतना है। चुनाव जीतने के लिए वह सारे हथकंडे अपनाते हैं। उन्हें इससे कोई सरोकार नहीं है कि जनता को इससे लाभ है या नुकसान। कुछ सप्ताह पहले ही बिहार विधान सभा चुनाव में ऐसा ही देखने को मिला। भाजपा ने बिहार में चुनाव जीतने के लिए उन सारे हथकंडों को अपनाया जो असलियत में समाज को बांटने का काम करते हैं।
बिहार चुनाव ऐसे मुद्दों के सहारे लडऩे की कोशिश की गई जो कहीं से उचित नहीं था। यह कहें कि भाजपा अपने मुद्दों से भटक गई थी तो गलत नहीं होगा। अब, जबकि उत्तर प्रदेश में चुनावी माहौल बन रहा है तो फिर भाजपा पुराने मुद्दों के सहारे चुनावी वैतरणी पार करने की कोशिश करेगी। उसकी एक बानगी आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत का बयान है। विश्व हिंदू परिषद के वरिष्ठï नेता व आरएसएस के आजीवन प्रचारक स्व. अशोक सिंघल के लिए आयोजित शोक सभा में आरएसएस के प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि श्रीराम मंदिर का निर्माण ही स्व. अशोक सिंघल को सच्ची श्रद्धांजलि होगी। उन्होंनेेेकहा कि इस हिंदुत्ववादी नेता के सपने को पूरा करने के लिए गंभीर प्रयास करना चाहिए। शोकसभा में आरएसएस प्रमुख ने लोगों से भावनात्मक स्तर पर अपील की कि राम मंदिर निर्माण का मुद्दा उठाएं।
आरएसएस और भाजपा का क्या संबंध है यह बताने की जरूरत नहीं है। अजीब विडंबना है कि हमारे देश में राजनीतिज्ञ हर परिस्थिति का राजनैतिक लाभ लेने की कोशिश में लगे रहते हैं। भाजपा अच्छे से जान गई है कि उत्तर प्रदेश में मोदी लहर काम नहीं करेगी, क्योंकि पंचायत चुनावों में जनता ने भाजपा को आइना दिखा दिया था। जिन मुद्दों और मोदी लहर के भरोसे पंचायत चुनाव में भाजपा ने ताल ठोकी थी, वह कामयाब नहीं हुई। उसके सारे दांव फेल हो गए थे। अब भाजपा आगामी विधानसभा चुनाव में राम मंदिर के भरोसे चुनावी वैतरणी पार करने की कोशिश में है। भाजपा अच्छे से जानती है कि यूपी में राम मंदिर हिंदुओं के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है। एक वक्त था कि भाजपा राम मंदिर के भरोसे चुनाव जीतकर दिल्ली के तख्त पर काबिज हुई थी। अब वह यूपी की सत्ता हासिल करने के लिए फिर राम मंदिर का सहारा लेने की कोशिश कर रही है।

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