अब भिखारी भी झाड़ रहे अंग्रेजी का ‘रौब’

  • शहर के मशहूर मार्केट और पिकनिक स्पॉट भीख मांगने वालों के निशाने पर

 ऐश्वर्या गुप्ता
2लखनऊ। जिले में भीख मांगने वालों ने पश्चिमी सभ्यता की नकल करने में जुटे लोगों को इमोशनली ब्लैकमेल करने का हुनर सीख लिया है। आजकल मशहूर मार्केट, भीड़-भाड़ वाले इलाकों, धार्मिक स्थलों और पिकनिक स्पॉट पर लोगों से इंग्लिस में बोलकर भीख मांगने वालों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। इंग्लिश बोलकर भीख मांगने वालों की उम्र पांच साल से 10 साल के बीच होती है। हैरत की बात है कि ये लोग स्कूल भी नहीं जाते हैं। इन लोगों को सरकार की तरफ से भीख मांगने वालों को जीवन स्तर सुधारने के लिए चलाई जाने वाली योजनाओं का लाभ भी नहीं मिल पा रहा है। इसलिए लोगों को जगह-जगह रोक कर भीख मांगने वाले मुसीबत बनते जा रहे हैं।
सरकार के स्कूल चलो अभियान ने शुरुआत में तो रफ्तार पकड़ी लेकिन धीरे-धीरे इसकी गति धीमी होती चली गई। गरीब मां-बाप अपने बच्चों को स्कूल भेजने की बजाय छोटे-मोटे काम धंधे में व्यस्त रखने या फिर भीख मांगने में व्यस्त कर देते हैं। इससे रोज शाम तक अच्छी खासी कमाई हो जाती है, जो उनके परिवार का पालन पोषण करने में सहायक होती है। आजकल शहर के भीड़-भाड़ वाले इलाकों, पापुलर मार्केट, धार्मिक स्थल और पिकनिक स्पॉट पर मटमैले-कुचैले कपड़े पहने सैकड़ों की संख्या में 5 से 15 साल तक के बच्चे भीख मांगते नजर आ जाते हैं। ये बच्चे यूथ को इमोशनली ब्लैकमेल करने के लिए इंग्लिश के टूटे-फूटे वाक्य बोलकर भीख मांगते हैं। इनका चेहरा, पहनावा-ओढ़ावा और अपनी बात कहने का अंदाज ऐसा होता है कि इंसान खुद-बखुद अपनी जेब से कुछ न कुछ रुपये निकालकर दे ही देता है। शहर में भीख मांगने वाले बच्चों में लड़कियों की संख्या अधिक होती है।

आर्थिक स्थिति खराब होने की वजह से मांगते हैं भीख

शहर की कुछ बच्चियां अपनी खराब आर्थिक स्थिति के चलते पढ़ाई के साथ-साथ भीख मांगकर गुजारा करने को मजबूर हैं। ये बच्चियां मॉल्स, पार्क, पिकनिक स्पॉट, सिनेमाघर तो कभी सडक़ों पर लगे जाम के दौरान भीख मांगती नजर आती हैं। इन्हें पढ़ाई का शौक तो है लेकिन पढ़ाई-लिखाई इनसे कोसों दूर है। खास बात यह है कि भीख मांगने के लिए कुछ बच्चियां टूटी-फूटी अंग्रेजी बोलकर लोगों को प्रभावित करती हैं। जब लोग उनकी अंग्रेजी में कही बातों को ध्यान से सुनते हैं, तो उन्हें अच्छा लगता है। इसी अंग्रेजी की वजह से उन्हें भीख भी अच्छी मिल जाती है। वहीं अपना पेट पालने के लिए भीख मांगने वाले बच्चों को सरकारी स्कूलों में मिलने वाली मुफ्त शिक्षा का लाभ भी नहीं मिल पा रहा है।

भीख मांगते समय बोले जाने वाले अंग्रेजी शब्द

दीदी यू आर स्वीट गिव में समथिंग, ऐ भईया प्लीज गिव मी सम रुपीज , माई लिटिल सिस्टर इज हंगरी। प्लीज गिव मी सम मनी। हजरतगंज में रहने वाले आशीष सिन्हा बताते हैं कि एक बार मेरे पास करीब छह साल की दो बच्चियां भीख मांगने आईं। उन्होंने भीख भी अंग्रेजी मांगने के लिए अंग्रेजी वाक्यों का इस्तेमाल किया। लड़कियों ने अपनी टूटी-फूटी भाषा में कहा कि भईया गिव मी मनी। मैं यह सुनकर शॉक्ड हो गया था। मैंने उनका नाम पूछा और उन्हें पास की दुकान से स्नैक्स लेकर खिला दिया।
ऐसे ही अक्सर मॉल्स के आस पासस तो कभी ट्रैफिक जाम के वक्त, ऐसे ही कई बच्चे अंग्रेजी में भीख मांगते दिख जायेंगे। मरीन ड्राइव पर भीख मांगने वाली नीलम से पूछने पर पता चला कि वह एक सरकारी स्कूल में पढऩे जाती हैं। स्कूल की वजह से टूटी फूटी अंग्रेजी में अपनी बात कह लेती हैं और आसानी से भीख भी मिल जाती है। ऐसा करने की वजह पर दूसरी बच्ची लक्ष्मी ने बताया कि हमारे ऐसा करने से लोग हमें पैसे आसानी से दे देते हैं। साथ ही हम अंग्रेजी के उन शब्दों को अच्छी तरह रट लेते हैं। जो हमें सिखाये जाते हैं। हम अंग्रेजी के कुछ शब्दों का हिन्दी के साथ इस्तेमाल कर लोगों को अपनी तरफ देखने और अपनी बात सुनने के लिए मजबूर कर देते हैं।

कभी-कभी जाते हैं स्कूल

गोमतीनगर स्थित माल के बाहर भीख मांगने वाले बच्चों के कई झुंड अक्सर देखने को मिल जाते हैं। उन्ही में से एक बच्ची मुस्कान, जो महज 7 साल की है। वह अपने दोस्तों के साथ माल के आस-पास के एरिया में, तो कभी लोगों के गाड़ी से उतरते वक्त रोककर, कभी पैसे, तो कभी कुछ खाने की चीजें मांगती है। मुस्कान बताती है कि मैं सरकारी स्कूल में जाती हूं लेकिन पढ़ाई कभी-कभी ही हो पाती है क्योंकि बाकी के दिन मुझे भीख मांगने जाना पड़ता है। स्कूल में हमे भीख मांगने के लिए डांट भी पड़ती है लेकिन हमें अपना परिवार चलाने के लिए मजबूरन ऐसा करना पड़ता है। क्योंकि घर पर पैसे देने पड़ते हैं। तब जाकर कुछ खाने को मिलता है। वहीं इंदिरानगर इलाके में भीख मांगने वाली बच्चियों ने बताया कि वह सरकारी स्कूल में पढ़ाई करती हैं। हफ्ते में दो से तीन दिन ही वह स्कूल जाती हैं और बाकी के दिन वह जगह-जगह जा कर लोगों से पैसे मांगती हैं। इन बच्चियों का कहना है कि हमें बचपन से ही भीख मांगकर खाना सिखाया गया है। हमारे घर की हालत खराब होने के चलते भीख मांगते हैं। स्कूल जाने की बात पर बच्चियों ने बताया कि हमें स्कूल जाना पसंद है, क्योंकि वहां काफी अच्छी बातें सिखाई जाती हैं।

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