अफसर भी खड़े हो जाते हैं अपराधियों के साथ..

सीबीआई पर पहले भी कम आरोप नहीं लगते रहे हैं। उस पर आरोप है कि सीबीआई अपराधियों के दबाव में और सत्ता की चरणवंदना में कुछ भी कर देती है। यह संदेश आम आदमी तक चला गया है और यह बात साफ हो गई है कि अब निष्पक्ष जांच करना मुश्किल होता जा रहा है। यह देश का दुर्भाग्य है कि तंत्र लगातार ऐसे ही चल रहा है और इसपे सुधार की कोई आशा नजर भी नहीं आ रही।

SANJAY SHARMA - EDITOR

संजय शर्मा – संपादक

सुप्रीम कोर्ट ने अपने महत्वपूर्ण फैसले में सीबीआई के पूर्व डायरेक्टर रंजीत सिन्हा को फटकारते हुये कहा है कि उन्हें अपराधियों से मुलाकात नहीं करनी चाहिये थी। उन्होंने कहा कि इस बात की भी जांच की जानी चाहिये कि इस मुलाकात से जांच पर तो कोई फर्क नहीं पड़ा। सुप्रीम कोर्ट ने यह आदेश उस शख्स के लिये दिया है जो शख्स देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी का मुखिया रहा। उसके जिम्मे ही सभी वह जांचें करनी थीं जो देश की सबसे महत्वपूर्ण जांचें थीं। अफसोस सीबीआई का यह प्रमुख उन्हीं अपरधियों के साथ खड़ा हुआ नजर आने लगा जिनके खिलाफ यह जांच कर रहा था। उसके इस फैसले से देश भर में यह संदेश गया कि हमारे यह बड़े लोग किस तरह अपराधियों के साथ खड़े रहते हैं। साथ ही आम आदमी को भी समझ में आ गया कि अगर जेब में पैसा है तो कानून उसके लिये मायने नहीं रखता।
सीबीआई पर पहले भी कम आरोप नहीं लगते रहे हैं। उस पर आरोप है कि सीबीआई अपराधियों के दबाव में और सत्ता की चरणवंदना में कुछ भी कर देती है। यह संदेश आम आदमी तक चला गया है और यह बात साफ हो गई है कि अब निष्पक्ष जांच करना मुश्किल होता जा रहा है। यह देश का दुर्भाग्य है कि तंत्र लगातार ऐसे ही चल रहा है और इसमेें सुधार की कोई आशा नजर भी नहीं आ रही।
सुप्रीम कोर्ट में यह मामला बहुत लम्बे समय से चल रहा था। प्रशांत भूषण ने न्यायालय में कई बार कहा कि सीबीआई प्रमुख ने अपराधियों के साथ अपने घर पर कई बार मुलाकात की। उन्होंने अपने पक्ष में सीबीआई प्रमुख का आगंतुक रजिस्टर भी पेश किया जिसमें विस्तार से इस बात का जिक्र है कि किस तरह किस अपराधी ने उनसे मुलाकात की। जाहिर है यह बात बेहद शर्मिंदा करने वाली है। होना तो यह चाहिये था कि जिस दिन यह बात सामने आई उसी दिन सीबीआई प्रमुख को उनके पद से हटा देना चाहिये था। मगर सत्ता को ऐसे ही लोग पसंद आते हैं जो उनके इशारे पर कुछ भी करने को तैयार हों। जब यूपीए सरकार की विदाई की तैयारी हो गई थी तब रातों-रात रंजीत सिन्हा ने अमित शाह को क्लीन चिट दे दी थी। जाहिर है एनडीए सरकार के लिये इससे बेहतर बात कोई दूसरी नहीं हो सकती थी कि इस तरह उनके एक बड़े नेता को सीबीआई क्लीन चिट दे दे। इस एहसान का बदला एनडीए सरकार ने भी उतारा और जिस समय रंजीत सिन्हा विवादों में घिर गये थे उस समय उनका पूरा बचाव किया।
यह निराशा और हताशा की बात है कि इतने बड़े अफसर अपराधियों के साथ इस तरह का आचरण करते हैं। अब भी वक्त है उन्हें अपने आचरण में सुधार लाना चाहिये।

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