अपाहिज भाई ने कराई थी अपनी दोनों बहनों की हत्या

लखनऊ में सनसनी फैल गई थी दो बहनों की हत्या से
पुलिस ने 24 घंटे के भीतर हत्या का किया खुलासा
पैसों के लिए भाई ने ही मरवा दिया अपनी बहनों को
रिश्तों की मर्यादा हुई तार-तार, नहीं रहा भरोसा अपनाों का

J14पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ । संतोष को इस बात का बहुत डर था कि उसकी बहनें उसके पिता की संपत्ति में से हिस्सा ले सकती हैं। इस संपत्ति को बचाने के लिए उसने जो ताना-बाना बुना उसने रिश्ते की मर्यादा को तार-तार कर दिया। संतोष ने सोच लिया कि संपत्ति बचाने का एक ही तरीका है कि बहनों को ही रास्ते से हटा दिया जाए। उसने अपने साले ज्ञान प्रकाश प्रजापति और उसके दोस्तों को लालच दिया कि अगर वह उसकी बहनों को रास्ते से हटा देंगे तो वह उन्हें भी संपत्ति में हिस्सा दे देगा। इसके बाद इन लोगों ने सोमवार की रात घर में घुसकर निर्दोष रेखा और उसकी बहन सविता की बेरहमी से गला रेत कर हत्या कर दी।
दो बहनों की हत्या से राजधानी में सनसनी फैल गई। आनन-फानन में मौके पर आला अफसर पहुंच गए। दो बहनों की हत्या का खुलासा होना पुलिस के लिए चुनौती भरा था। घटना के साक्ष्य बता रहे थे कि हत्यारे बिना किसी प्रतिरोध के अंदर घुसे थे। यह बात पुलिस के आला अफसरों के लिए हत्यारों तक पहुंचने का अहम सुराग बन गई।
एसएसपी ने तेज तर्रार लोगों को इस खुलासे के लिए लगाया। संतोष के साले और दोस्तों की लोकेशन जब घर के आस-पास दिखी तो पुलिस का शक गहराता चला गया। संतोष के साले ज्ञान प्रकाश प्रजापति से मामूली पूछताछ में पता चल गया कि हत्यारे कौन थे। और इसके बाद पुलिस ने संतोष व उनके चार साथियों को गिरफ्तार कर मामला का खुलासा कर दिया।

मैंने टीम बनाकर इस बात के निर्देश दिए थे किे 24 घंटे के भीतर इस हत्याकांड का खुलासा हो जाना चाहिए। पुलिस की टीम ने सघनता से सभी बिंदुओं पर काम शुरू किया और हत्या करने वालों को गिरफ्तार कर लिया।
-राजेश पांडे, एसएसपी, लखनऊ

तिहाड़ जेल की तर्ज पर जेलों की कैंटीनों में मिलेंगे लजीज व्यंजन

कैदियों को दी जाने वाली कूपन की धनराशि सीमा 75 फीसदी बढ़ी

तिहाड़ की तर्ज पर प्रदेश के कारागारों में अब चलेंगी कैंटीन
कैदियों को प्रति सप्ताह दी जाने वाली कूपन की सीमा बढ़ाकर 600 रूपये की गयी

लखनऊ। जेल में कैदियों को मिलने वाले भोजन को लेकर अक्सर सरकार की खिंचाई होती थी, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। सरकार कैदियों के खान-पान को लेकर सजग हो गई है। अब तिहाड़ जेल की तर्ज पर प्रदेश सरकार ने सूबे के सभी जेलों में कैंटीन चलाने का फैसला किया है। अब कैदी उबले अंडे, गरम-गरम जलेबी, हलवा और छोले-भूटरे का भी लुत्फ उठाएंगे। इसके लिए कैदियों को प्रति सप्ताह दी जाने वाली कूपन की राशि में भी 75 प्रतिशत की वृद्धि कर दी गई है।
अब यूपी की जेलों में बंद कैदियों को तिहाड़ की तर्ज पर खान-पान की सुविधा मिलेगी। अब तक उन्हें सिर्फ आलू पराठा, पूड़ी-सब्जी, बे्रड-पकौड़ा, समोसा और चाय ही उपलब्ध कराया जाता था, पर शासन के नये निर्णय के बाद अब कैदियों को उबला हुआ अण्डा, जलेबी, हलवा और छोला भटूरा भी मिल सकेगा। शासन ने बंदियों को प्रति सप्ताह दी जाने वाली कूपन की धनराशि की सीमा भी बढ़ाई है। पहले कैदियों को प्रति सप्ताह सिर्फ 150 रूपये का कूपन दिया जा सकता था, पर अब यह सीमा बढ़ाकर 600 रूपये की गयी है। कैदियों को दिए जाने वाले खाने को लेकर अक्सर जेल प्रशासन और सरकार की किरकिरी होती है। प्रदेश में कैदियों की सुरक्षा से लेकर उनकी अन्य समस्याएं हमेशा मुद्दा बनी रही हंै। खासकर खाना। अधिकांश कैदियों की शिकायत होती है कि उन्हें खाना अच्छा नहीं मिलता। प्रदेश शासन ने बंदियों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए जेलों की कैंटीनों में तिहाड़ जेल की तरह खाद्य वस्तुएं उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है। इसके तहत अब कारागारों की कैन्टीनों में 13 खाद्य सामग्रियां मिलेंगी। इनमें आलू पराठा, पूड़ी-सब्जी, ब्रेड पकौड़ा , समोसा, चाय के अलावा पकौड़ा (बेसन व कई तरह की सब्जियों की), उबला हुआ अण्डा, दही, लस्सी, जलेबी, दूध व म_ïा, पोहा, सूजी हलवा और छोला भटूरा शामिल होंगी। ऐसा बंदियों को दैनिक जरूरतों की चीजें सुलभ कराए जाने के उद्देश्य से किया गया है। इसकी गुणवत्ता की जांच के लिए कारागार स्तर पर भी तीन सदस्यीय कमेटी का गठन किया जायेगा। यह समिति खाने के चीजों की गुणवत्ता की समय-समय पर जांच करेगी। कैंटीनों में किसी भी तरह की मिलावट की संभावना से बचने के लिए जिला खाद्य निरीक्षक माह में कम से कम एक बार आकस्मिक निरीक्षण कर खाद्य वस्तुओं की गुणवत्ता की जांच करेंगे और यह सभी रिपोर्ट उच्चाधिकारियों के निरीक्षण के समय उनके समक्ष रखी जायेंगी। आपको बता दें कि तिहाड़ जेल के भीतर खान-पान की सामग्री जैसे अचार और बेकरी भी बनते हैं। इसके साथ ही यहां हैंडलूम व टेक्सटाइल, फर्नीचर, कपड़े, बैग, शुद्ध सरसों तेल, हस्तनिर्मित सामग्रियां, पेटिंग, जूट के बैग, हर्बल प्रोडक्ट और कैंडल व लाइटों के अलावा बहुत कुछ मिलता है। यहां का एक यूनीक ब्रांड है, तिहाड़ जेल के कैदियों द्वारा बनाई गईं वस्तुएं इस ब्रांड के नाम से बिकती हैं। इस संबंध में शासनादेश जारी कर दिया गया है।

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