अपनी ताकत दिखाकर सीएम ने छुए पिता के पैर, कहा आपके लिए जान हाजिर मगर पार्टी में नहीं सह सकता गुंडों और दलालों को

बेटे ने दी बाप को मात

200 से ज्यादा विधायक पहुंचे सीएम के समर्थन में, नेताजी के पास सिर्फ 22 विधायक

सीएम के जनसमर्थन से मुलायम कैंप में खलबली, मुलायम नहीं शुरू कर सके अपनी बैठक

नेताजी के आदेश पर खत्म हुआ सीएम और रामगोपाल का निष्कासन
बेटे ने पिता के घर जाकर रखी उनकी लाज, कहा आपके लिए सब कुछ कर सकता हूं कुर्बान

31-dec-page1-final1संजय शर्मा
लखनऊ। समाजवादी पार्टी के घमासान में आज जो कुछ हुआ उसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी। मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव दोनों ने आज सुबह विधायकों की बैठक बुलाई थी और यह माना जा रहा था कि यही बैठक तय कर देगी कि पिता पुत्र में किसकी हैसियत ज्यादा है। कल रात तक यह भी चर्चा चलती रही कि आज सुबह नेताजी किसी और को सीएम बना देंगे पर जब बैठक में सीएम के घर 200 से ज्यादा विधायक पहुंच गए तो मुलायम कैंप में मायूसी छा गई और मुलायम बैठक इसलिए नहीं कर पाए क्योंकि उनके समर्थन में सिर्फ 22 विधायक ही पहुंचे थे।
इसके बाद यह तय हो गया कि कल के सम्मेलन में पार्टी का राष्टï्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव को बना दिया जायेगा। जाहिर है ऐसा होता तो मुलायम सिंह यादव की जीवन की यह सबसे बड़ी हार होती और उनका राजनैतिक करियर खत्म हो जाता। सब कुछ जीतने के बाद बेटे अखिलेश को लगा कि अगर पिता का करियर खत्म हो गया तो इस सत्ता का उनके लिए कोई महत्व नहीं रह जायेगा, लिहाजा वह अपने पिता मुलायम सिंह के घर गए और उनके पैर छूते हुए कहा कि आपके लिए सब कुछ कुर्बान है पर पार्टी में आए दलालों और माफियाओं को मैं कैसे बर्दाश्त करूं।
इस पूरे घटनाक्रम के पीछे लालू यादव और आजम खां की खासी भूमिका रही। लालू ने पिता-पुत्र को फोन किया तो आजम खां पहले पिता और फिर पुत्र के घर आए और बेटे को लेकर मुलायम सिंह के घर पहुंचे। आजम ने कहा कि जिस दलाल अमर सिंह की वजह से सब कुछ हुआ है। उसको पार्टी से बाहर निकालिए। मुलायम ने भी भावुक होकर अखिलेश को गले लगाया और कहा मैं तुम्हारे खिलाफ कभी नहीं था। इसके बाद शिवपाल यादव को मुलायम सिंह ने अपने घर बुलाया और रामगोपाल और अखिलेश का निष्कासन समाप्त कर दिया। अखिलेश ने अपनी एक लिस्ट भी दे दी, जिसमें माफिया मुख्तार और अतीक का नाम नहीं है। जाहिर है अब पूरी पार्टी की कमान अखिलेश यादव के हाथ में आ गई है और यह माना जा रहा है कि अमर सिंह को बाहर निकालने के बाद पार्टी पूरी तरह से अखिलेश चलायेंगे।

दलाल अंकल की कहानी खत्म
अमर सिंह ने यादव परिवार में जंग कराने की स्क्रिप्ट तो बहुत सोच समझकर लिखी थी, मगर अखिलेश यादव के पक्ष में जब पूरी पार्टी खड़ी हो गई तो यह तय हो गया कि अब दलाल अंकल का पार्टी में कोई काम नहीं रह गया है। इस जंग के खत्म होने से अखिलेश यादव को फायदा पहुंचा है। जनता में संदेश गया है कि अखिलेश माफियाओं, गुंड़ों और दलालों को पार्टी से बाहर करने के लिए अपने पिता से भी मोर्चा ले सकते हैं। जिस तरह से सारी लड़ाई जीतने के बाद वह अपने पिता के पैर छूने गए उसने अखिलेश के व्यक्तित्व को और बड़ा कर दिया। अखिलेश की छवि इस जंग से और निखरी है। जाहिर है अब उसी से गठबंधन होगा जिससे अखिलेश चाहेंगे।

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