अनोखा है एलयू का साइंस म्यूजियम

  • राजधानी के अन्य विश्वविद्यालयों में नहीं है ऐसा म्यूजियम

Captureहिना खान
लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय के प्राणि विज्ञान विभाग का म्यूजियम अनोखा, अद्भुत है। यहां सूक्ष्म से लेकर विशाल जीवों के नमूने है। बहुत से लोगों को नहीं पता है इस म्युजियम के बारे में। विश्वविद्यालय के ही अधिकांश छात्र इससे अनभिज्ञ है। राजधानी के अन्य यूनीवर्सिटी में ही नहीं बल्कि बीएचयू में भी ऐसा म्यूजियम नहीं है। इसका कारण है कि म्यूजियम में सिर्फ प्राणि विज्ञान के छात्रों को ही प्रवेश है।

लखनऊ विश्वविद्यालय में 1921 में प्राणि विज्ञान विभाग अस्तित्व में आया। विभाग का नाम डा. बाघ के नाम पर पड़ा। इस संग्रहालय में भारत से लेकर दुनिया के अन्य भागों से 1,800 नमूनों को संग्रहित किया गया है। यहां पर दुर्लभ प्रजाति के जीवों का जीवाश्म संग्रहित कर रखा है, जिसमें अजगर, खडख़ड़ सांप, हाथी, बाघ, और राइनो के मूल कंकाल, उडऩे वाली छिपकली, मगरमच्छ, शुतुरमुर्ग, गोरिल्ला, वनमानुष, सील, डॉल्फिन और पेंगुइन को उनकें प्राकृतिक रुप में संरक्षित करके रखा गया है। इस म्युजियम को बनाने का उद्देश्य छात्रों को इस विषय की बारीकियों को सिखाना है। यह म्युजियम चेन्नई और कोलकाता में बने प्राकृतिक म्युजियम को टक्कर देती है। यहां जानवरों के साथ-साथ समुद्री जीवों जैसे उड़ान भरने वाली अनोखी मछलियों को भी संग्रहित कर रखा है। यहां मनुष्य एवं आदिमानव के जीवाश्म का भी अनोखा संग्रह है।

इस संग्रहालय के बारे में बहुत कम लोग जानते है। इसका कारण विभागाध्यक्ष डा. मधु त्रिपाठी बताती  कि साधनों की कमी और हिफाजत की वजह से हम इसे सार्वजनिक नहीं कर सकते। म्यूजियम में सिर्फ इसी विषय के छात्रों को आने की अनुमति दी जाती है। यह केवल क्लास के समय ही खोला जाता है। शिक्षकों की देखरेख में ही इसमें क्लास करायी जाती है। उन्होंने कहा संग्रहालय विश्वविद्यालय के छात्रों के अलावा दूसरी यूनिवर्सिटी के शिक्षकों के आग्रह पर ही दूसरे छात्रों को इसे देखने की अनुमति मिलती है, जिसमें यह भी शर्त होती है कि छात्र प्राणि विज्ञान का छात्र हो।

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