अनियमित दिनचर्या की वजह से युवा हो रहे हैं बैक पेन का शिकार

30 से 35 साल के युवाओं में तेजी से बढ़ रही बैक पेन की बीमारी
हड्डियों में कैल्शियम की कमी बीमारी की प्रमुख वजह
गलत-तरीके से उठने-बैठने के कारण हो रही है समस्या
घंटों कुर्सी पर बैठने की वजह से हो रही दिक्कत
बैक पेन से आगे चलकर हो सकता है स्पाइनल फ्रैक्चर

Capture 4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। राजधानी में अनियमित दिनचर्या और भागदौड़ भरी जीवन शैली की वजह से युवाओं में बैक पेन की बीमारी तेजी से बढ़ रही है। इस बीमारी को गंभीरता से लेकर इलाज नहीं करवाना खतरनाक साबित हो सकता है। इसके साथ ही सामान्य सा लगने वाली बैक पेन की समस्या धीरे-धीरे स्लिप डिस्क या सियाटिका का मरीज बना सकता है। ऐसे में युवाओं को अपनी जीवन शैली में सुधार लाने की जरूरत है।
मेदान्ता अस्पताल के वरिष्ठ स्पाइन सर्जन डॉ. धर्मेन्द्र सिंह के मुताबिक बढ़ती उम्र के साथ इंसान की हड्डियों में कैल्शियम की कमी होना आम बात है। महिलाओं और पुरुषों में 50 से 55 की उम्र तक पहुंचते-पहुंचते हड्डियों में तेजी से क्षरण होने लगता है। इसमें व्यक्ति की हड्डियां हल्का झटका लगते ही टूटने और खिसकने का डर बना रहता है। इससे बचने के लिए 35 से 40 साल तक की उम्र के दौरान की हड्डियों में कैल्शियम की जांच करवा लेनी चाहिए। इसके बाद चिकित्सक की सलाह के अनुसार दवाओं और खान-पान के माध्यम से कैल्शियम की कमी को दूर किया जा सकता है। इसके अलावा युवाओं में उठने-बैठने के गलत तरीके, अनियमित खान-पान और भागदौड़ भरी दिनचर्या के कारण बैक पेन की बीमारी तेजी से फैल रही है। इसमें बढ़ती उम्र के साथ हड्डियों के कमजोर होने और शरीर में वसा की मात्रा बढऩे के कारण स्लिप डिस्क की बीमारी के लक्षण नजर आने लगते हैं। इंसान को गर्दन के पिछले हिस्से में और पीठ में दर्द होने लगता है। शुरुआती दौर में यह दर्द धीरे-धीरे होता है लेकिन बीमारी को नजर अंदाज करने पर दर्द भयंकर रूप लेने लगता है। ऐसे में इंसान के लिए कुर्सी पर घंटे भर तक सीधे बैठना और देर तक खड़े रहना भी मुश्किल हो जाता है। इंसान को झुककर काम करने में भी भयंकर पीठ दर्द होता है। यदि इंसान के अंदर कैल्शियम की मात्रा बहुत कम है, तो फ्रैक्चर का खतरा बढ़ जाता है।

हर पांचवा पुरुष हड्डी संबंधी बीमारी से पीडि़त
डॉ. धर्मेन्द्र सिंह के मुताबिक आंकड़ों पर गौर करें तो भारत देश में प्रत्येक तीसरी महिला और पांचवां पुरुष आस्टियो पोरोसिस की बीमारी से ग्रसित है। इसमें से 30 प्रतिशत लोगों में स्पाइनल फ्रैक्चर की आशंका रहती है। स्पाइनल की बीमारी बैक पैन से शुरू होती है, जो आगे चलकर स्पाइनल फैक्चर का कारण बन जाती है। बुजुर्गों में स्पाइनल फ्रैक्चर कमर दर्द का प्रमुख कारण है। यह बहुत ही पीड़ादायक होता है। आजकल युवाओं में बैक पेन की बीमारी तेजी से बढ़ रही है। अस्पताल में इलाज के लिए आने वाले अधिकांश लोग कामकाजी होते हैं। इसमें आफिसों में बैठकर काम करने वाले हर तीसरे इंसान को बैक पेन की समस्या होती है। इसकी वजह कुर्सी पर बैठने के सही तरीकों का इस्तेमाल करनी की बजाय, अपनी जरूरतों और सहूलियतों के मुताबिक उठने बैठने की आदतें इजाद कर लेना है। इसी आदत की वजह से साल दो साल में युवाओं को बैक पेन की बीमारी हो जाती है। जो साल-छह महीने बाद बहुत अधिक दर्द देने लगती है। इस बीमारी के बारे में समय से जानकारी मिलने पर अत्याधुनिक तकनीकों से सफल इलाज किया जा सकता है।

जीवन शैली में सुधार की जरूरत
इंसान को हड्डियों से जुड़ी विभिन्न प्रकार की बीमारियों से बचने के लिए अपनी जीवन शैली में सुधार लाने की आवश्यकता है। हमें अपने उठने बैठने और काम करने के तरीकों में बदलाव लाना होगा। इसके साथ ही खान-पान में भी ऐसी चीजों का इस्तेमाल करना होगा, जिनकी वजह से शरीर में कैल्शियम की भरपूर मात्रा मिले। इसमें खट्टे फलों आंवला, मौसमी, संतरा, अमरूद इत्यादि का सेवन करना चाहिए। इसके अलावा रोजाना दूध पीने से भी शरीर में कैल्शियम की मात्रा नियंत्रित रहती है। यदि हम आफिस में कुर्सी पर बैठकर काम करते हैं, तो हमें अपनी पीठ को सीधा करके बैठना चाहिए। इसमें 90 डिग्री कोण पर शरीर को रखना चाहिए। इसके अलावा लगातार कम्प्यूटर की तरफ देखने की बजाय 10-15 मिनट पर गर्दन को इधर-उधर घूमा लेना चाहिए। इसके अलावा देर तक झुककर काम करने से भी बचना चाहिए। यदि पीठ दर्द की शिकायत हो और जोड़ों में दर्द की शिकायत होने लगे तो कैल्शियम की जांच करवा लेनी चाहिए। इससे शुरुआती दौर में बीमारी का पता चल जाता है। इसके बाद चिकित्सकीय सलाह, दवाओं के सेवन और नियंत्रित खान-पान से हड्डी से जुड़ी बीमारी को खतरनाक रुप लेने से रोका जा सकता है।

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