अधिकारियों के लचर रवैये की वजह से एक बार फिर बच जाएगी ज्योति इन्वायरोटेक

  • तय समय में निर्माण कार्य पूरा न कर पाने के बावजूद कार्यदायी संस्था को बचाने में जुटे सीएनडीएस के अधिकारी
  • कंपनी की निगम प्रशासन से लेकर उच्च स्तर के अधिकारियों तक में है अच्छी पकड़

अंकुश जायसवाल
Captureलखनऊ। राजधानी को स्वच्छ रखने के लिए नगर निगम क्षेत्र में डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन का कार्य कर रही कार्यदायी संस्था ज्योति इन्वायरोटेक को कुछ दिन पहले सीएनडीएस की ओर से अल्टीमेटम दिया गया था। उसमें कहा गया था कि यदि डेड लाइन तक सभी निर्माण कार्य पूरे नहीं हुए तो संस्था के साथ अनुबंध खत्म कर दिया जाएगा। इसके बावजूद सीएनडीएस के अधिकारी कंपनी के खिलाफ ढुलमुल रवैया अपना रहे हैं। कंपनी का ठेका निरस्त करने को लेकर गोल-मोल जवाब दे रहे हैं। इतना ही नहीं ज्योति इन्वायरोटेक को अपनी मर्जी के हिसाब से काम करने की पूरी छूट मिल रही है। उसका अनुबंध कुछ दिनों के लिए और बढाने की भी गुपचुप तैयारी चल रही है। वहीं जनता को कूड़े की समस्या से निजात मिल पाना मुश्किल हो गया है।
दरअसल नगर निगम के सफाई कर्मचारियों की ओर से वार्डों में सफाई की जाती है लेकिन कर्मचारियों के वार्डों में न पहुंचने तथा अन्य कारणों से विभाग को प्राइवेट संस्थान को इसका जिम्मा देना पड़ा। कंपनी की ओर से टेण्डर के माध्यम से पिछले कई वर्षों पहले दुबग्गा में कूड़ा डंप करने के लिए डंपिंग स्टेशन बनाया गया, जिसकी देख-रेख उक्त कंपनी को करनी थी लेकिन हैरानी की बात यह है कि डंपिंग स्टेशन खुलने के बाद कई वर्षों तक चालू ही नहीं हो सका। शिवरी प्लांट न चलने की वजह संसाधनों की कमी बताई गई, जिसके बाद विभाग की ओर से कंपनी को टिपिंग फीस भी सैंक्शन की गई, लेकिन शहर में सभी निर्धारित जोनों में कूड़े की स्थिति जस की तस बनी रही। घरों से कूड़ा बटोरने का कार्य भी उक्त कंपनी के माध्यम से ही किया जाता है, लेकिन घरों से कूड़ा उठाने का कार्य आठ जोनों में नहीं हो पाया। ढेरों शिकायतों के बाद भी नगर निगम ने कार्रवाई के नाम पर सिर्फ नोटिस पर नोटिस ही भेजा।
नहीं हो रहा डोर-टू-डोर कलेक्शन
शहर के जोन-5 व जोन-2 से कूड़ा उठान के नाम पर प्राइवेट संस्थान की ओर से केवल खानापूर्ति ही की जा रही है। टेण्डर के अनुसार कूड़ा उठाने के लिए संस्था को टारगेट भी मुहैया किया गया लेकिन अपने टारगेट से पीछे चल रही ज्योति इन्वायरोटेक बीते चार साल में भी कूड़ा उठाने को लेकर अपने टारगेट से पीछे ही रही।
फिसड्ïडïी साबित हुई कम्पनी फिर भी ठेका बरकरार
स्वच्छ भारत मिशन एवं अमृत योजना के बाद स्मार्ट सिटी के प्रथम चरण में न आने की अहम वजह शिवरी प्लांट को भी माना गया। जानकारों की मानें तो शहर में फैली गंदगी को साफ करने का जिम्मा लेने वाली कार्यदायी संस्था के द्वारा अपना काम ईमानदारी से नहीं किया जा रहा है। इसका खामियाजा शहर को स्मार्ट सिटी की पहली सूची से बाहर रहकर भुगतना पड़ा। निगम की ओर से कई डेडलाइन और नोटिस के बाद भी सभी जोनों से न तो कूड़ा उठाया गया और न ही प्लांट सुचारू रूप से चलता मिला। ज्योति इन्वायरोटेक के अधिकारी और नगर निगम प्रशासन के कुछ अधिकारी एक के बाद एक बहाने और वजहें गिनाने में लगे हुए थे। आखिरकार पानी सिर से ऊपर निकलते देख केन्द्र सरकार की एजेन्सी सीएनडीएस ने इस पर संज्ञान लेते हुए ज्योति इन्वायरोटेक को फाइनल नोटिस दिया था। नोटिस में स्पष्टï है कि यदि 21 अगस्त तक कंपनी की ओर से कार्य में तीव्रता नहीं आयी तो सख्त कार्रवाई करते हुए एग्रीमेंट निरस्त करने की कार्रवाई की जाएगी। हाल ही में जिलाधिकारी की ओर से हुए निरीक्षण में भी प्लांट में बनी चार यूनिटों में से केवल दो यूनिट ही चलती पाई गई। ऐसे में हजारों टन कूड़ा शहर में अलग-अलग जगह और प्लांट में इकट्ठा हो रहा है।

एनओसी के बिना ही चार सालों से कार्यरत

जानकारों की मानें तो कूड़ा निस्तारण प्लांट चलाने के लिए प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड से एनओसी लेनी पड़ती है। ज्योति इन्वायरोटेक का रवैया कुछ ऐसा है कि अभी तक कंपनी ने कोर्ई एनओसी नहीं ली है। प्लांट का कार्य 2012 से ऐसे ही चल रहा है। यह हाल तब है जब कंपनी लगभग 100 करोड़ रुपए प्लांट के संचालन के लिए ले चुकी है। उधर सीएनडीएस की ओर से एग्रीमेंट रद्द करने के लिए ज्योति इन्वायरोटेक प्राइवेट लिमिटेड को नोटिस जारी किया जा चुका है। इसकी सूचना जिला प्रशासन और नगर आयुक्त को भी दी गयी है। करीब तीन महीने पहले कंपनी को काम पूरा करने के लिए प्रोविजनल सर्टिफिकेट भी जारी किया गया था।

अधिकारियों का गोलमोल जवाब

पर्यावरण अधिकारी से जब यह पूछा गया कि क्या इस बार निर्माण कार्य के मामले में दोषी पाए जाने पर ज्योति इन्वायरोटेक का ठेका निरस्त होगा, तो उन्होंने कहा कि अब निगम इस पर कोई निर्णय नहीं लेगी। यह सीएनडीएस पर निर्भर करता है कि वह क्या कार्रवाई करता है।
पंकज भूषण
पर्यावरण अधिकारी, नगर निगम

कंपनी के अधिकारियों की ओर से निर्माण कार्य खत्म कराने की तारीख 20 अगस्त आखिरी दी गई थी। यदि 20 अगस्त तक कार्यप्रणाली में कोई बदलाव नहीं दिखा तो दिये गये अल्टीमेटम के अनुसार सीएनडीएस के उच्च अधिकारियों और नगर निगम के अधिकारियों से बातचीत करके कार्रवार्ई की जाएगी।
एनके भट्ïटï
प्रोजेक्ट मैनेजर, सीएनडीएस

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