अजन्ता हॉस्पिटल में युवक की मौत की जांच का पता नहीं, न्याय के लिए भटक रही मां

जवान बेटे को खोने वाली मां ने मंत्री से मुख्य सचिव तक लगाई गुहार
सीएमओ को नहीं है जांच रिपोर्ट की जानकारी

capture 4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। राजधानी के ठाकुरगंज स्थित अजन्ता हॉस्पिटल में इलाज के दौरान युवक के मौत के मामले में दो महीने बाद भी पीडि़त परिजनों को जांच एवं कार्रवाई का पता नहीं है। वहीं शहर के स्वास्थ्य विभाग के मुखिया डॉ.एसएनएस.यादव से जब इस मुद्दे पर बात करने की कोशिश की गयी तो उनका कहना था कि जांच तो हो गयी है। लेकिन जांच का क्या नतीजा आया उसका डॉ.एसएनएस.यादव को पता नहीं है। उनका कहना था कि आये दिन ढेरों जांच करते हैं,सबकी जानकारी रखना आवश्यक नहीं है। ऐसे में सवाल उठना लाजमी है कि जब मरीज के मौत के मामले में नतीजे की जानकारी नहीं तो जांच कितनी सजगता से की गई होगी। वहीं पीडि़त की मां मिथिलेश सिंह का आरोप है कि स्वास्थ्य महकमे तथा अजन्ता हॉस्पिटल प्रशासन की मिलीभगत के चलते उनको न्याय नहीं मिल पा रहा है। पीडि़त परिजनों ने इस मामले की जांच के लिए परिवाण कल्याण मंत्री तथा मुख्य सचिव तक से गुहार लगायी है।
परिजनों ने युवक की इलाज को लेकर अस्पताल प्रशासन तथा चिकित्सकों पर कई आरोप लगाये हैं। उनका कहना है कि पिछले दो महीने से उनके द्वारा उठाए गए कई बिन्दुओं पर स्वास्थ्य विभाग द्वारा जांच ही नहीं की गयी। परिजनों ने आरोप लगाते हुए कहा कि जिस सेमी प्राइवेट वार्ड में सौरभ को रखा गया था। वहां का स्टाफ अनटें्रड था।
ऑक्सीजन मशीन बार-बार गलत रीडिंग दे रही थी। मरीज के इलाज की जिम्मेदारी डॉ.दीपक दीवान तथा डॉ.एके.अवस्थी की थी। उसके बाद भी मरीज को 24 घंटे में सिर्फ एक बार देखा जाता था। जब मरीज की हालत ज्यादा बिगड़ी तो दोनों चिकित्सक एक दूसरे पर मरीज को देखने की जिम्मेदारी डाल रहे थे। साथ ही परिजनों ने यह भी कहा है कि मरीज की हालत लगातार बिगड़ रही थी। उसके बाद भी यहां के चिकित्सक मरीज की हालत को ठीक बता रहे थे। उसके बाद मरीज की मौैत हो गयी। अस्पताल प्रशासन तथा पुलिस ने जांच कराने का वादा करके पोस्टमार्टम नहीं कराने दिया। जिससे लापरवाही से मौत का मामला दबाया जा सके । गौरतलब है कि राजधानी के आलमबाग स्थित अजन्ता हॉस्पिटल में 19 वर्षीय वैैभव को परिजनों ने भर्ती कराया था। जहां जांच के बाद चिकित्सकों ने मरीज को निमोनिया तथा किडनी में समस्या बताई गयी थी। इसके बाद इलाज शुरू हुआ। लगभग एक हप्ते बाद मरीज की इलाज के दौरान मौत हो गयी थी।

दलाल के माध्यम से पहुंचे थे अस्पताल

शहर के कुछ अस्पताल दलालों के बलबूते पर चल रहे हैं। अजन्ता हॉस्पिटल में मरीज की मौत के मामले में एक नया खुलासा हुआ है। परिजनों ने बताया है कि अक्टूबर माह के आखिरी सप्ताह में मरीज को उल्टी तथा खांसी की समस्या होने पर ट्रामा में भर्ती कराया था। उसके बाद ट्रामा में एक व्यक्ति ने उनसे आकर मुलाकात की और कहा कि यहां पर मरीज का इलाज ठीक से नहीं हो पायेगा। कोई यहां ध्यान नहीं देता है। अजन्ता अस्पताल में मरीज को भर्ती कराइये। उसके बाद मरीज को ट्रामा से अजन्ता अस्पताल लाया गया था। इससे पहले भी ट्रामा पर मौजूद दलालों द्वारा मरीजों को बहला-फुसलाकर निजी अस्पतालों में ले जाने के मामले प्रकाश में आते रहे हैं। परिवार कल्याण मंत्री रविदास मेहरोत्रा ने इस संबंध में जांच के आदेश भी दिये थे।

Pin It