‘अजगर’ की फरियाद!

“प्रदेश के सर्वोच्च कार्यालय एनेक्सी में भी जीव जन्तु अपनी समस्याएं लेकर पहुंचते रहते हैं। अब तक तीन से अधिक बार बिज्जू अपनी समस्याओं को लेकर पहुंच चुके हैं। शायद उनकी कहीं भी सुनवाई नहीं हो रही थी, इसलिए मजबूरन एनेक्सी आना पड़ा। उनकी एनेक्सी में मौजूदगी से ही वहां काम करने वाले अधिकारी और कर्मचारी अलर्ट हो गये थे।”

sanjay sharma editor5उत्तर प्रदेश में चुस्त-दुरुस्त कानून व्यवस्था और जन सुनवाई की सरल प्रक्रिया की जितनी भी तारीफ की जाय कम ही लगती है। यहां इंसान ही नहीं जानवरों को भी अपनी फरियाद लेकर उच्चाधिकारियों तक पहुंचने की पूरी छूट मिली हुई है। इसी वजह से एनेक्सी से लेकर जीजीपी आफिस तक में अक्सर कोई न कोई जीव-जन्तु अपनी फरियाद लेकर येन केन प्रकारेण पहुंचता ही रहता है। ऐसे में उच्चाधिकारियों की सुरक्षा में लगा खास दस्ता भी फरियादियों की आव भगत और उनकी शिकायतों को सुनने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ता है। इसी वजह से एनेक्सी में बिज्जू और जीडीपी आफिस में अजगर की फरियाद सुनने के लिए वन विभाग के लोगों को मजबूरन पहुंचना पड़ा। वन विभाग की टीम दोनों को अपने साथ ले गई।
प्रदेश के सर्वोच्च कार्यालय एनेक्सी में भी जीव जन्तु अपनी समस्याएं लेकर पहुंचते रहते हैं। अब तक तीन से अधिक बार बिज्जू अपनी समस्याओं को लेकर पहुंच चुके हैं। शायद उनकी कहीं भी सुनवाई नहीं हो रही थी, इसलिए मजबूरन एनेक्सी आना पड़ा। उनकी एनेक्सी में मौजूदगी से ही वहां काम करने वाले अधिकारी और कर्मचारी अलर्ट हो गये थे। वन विभाग के जो अधिकारी और कर्मचारी उनकी मांगों को गंभीरता से नहीं लेते थे। उन्हें एक फोन काल पर भागकर एनेक्सी पहुंचना पड़ा। वन विभाग के कर्मचारियों की काफी मशक्कत और तमाम आश्वासनों के बाद बिज्जू शांत हुआ। वन विभाग की टीम उसको अपने साथ ले गये। इसी प्रकार डीजीपी कार्यालय में तीन दिन पूर्व आफिस के समय से करीब एक घंटा पहले अजगर अपनी फरियाद लेकर पहुंच गया। ऐसा लगा प्रदेश की आम जनता की तरह वह भी अपनी सुरक्षा को लेकर चिन्तित है। वह ठीक दरवाजे के बाहर सिर झुकाकर डीजीपी साहब के आने का इंतजार कर रहा था। ऐन मौके पर किसी सिपाही की नजर अजगर पर पड़ी और कार्यालय में हडक़ंप मच गया। किसी भी वर्दीधारी को मंजूर नहीं था कि अजगर डीजीपी साहब से मिले। इसलिए एक बार फिर वन विभाग की टीम पहुंची और अजगर को अपने साथ ले गई।
दरअसल बिज्जू और अजगर प्रतीकात्मक रूप में समाज के उस तबके का प्रतिनिधित्व करते हैं, जिनकी सुनवाई कहीं भी नहीं होती है। सरकारी कार्यालयों में भ्रष्टाचार, शोषण, लूट-खसोट और असुरक्षा के मुद्दों को सुनने और कार्रवाई करने के बजाय शिकायत करने वालों को ही डांट फटकार कर भगा दिया जाता है। ऐसे में पुलिस और प्रशासनिक विभाग के अधिकारियों को अपने कर्तव्यों का ईमानदारी पूर्वक निर्वहन करना होगा। यदि ऐसा नहीं हुआ, तो अपनी समस्यायें लेकर लोग यूं ही डीजीपी कार्यालय और एनेक्सी पहुंचते रहेंगे।

Pin It