अखिलेश ने नोटबंदी पर राहत देने वाले फैसले लेकर बढ़ाई भाजपा की मुसीबत

  • नोटबंदी से परेशान प्रदेशवासियों के लिए राहत भरे ऐलान कर मुख्यमंत्री ने आमजन के दिलों में बनाई जगह
  • विधानसभा चुनाव में उल्टा न पड़ जाए नोटबंदी का फैसला, भाजपा को ढूंढ़े नहीं मिल रहा इसका जवाब

 सुनील शर्मा

captureलखनऊ। नोटबंदी का फैसला लेने के महीने भर बाद भी आम जनता की मुश्किलें खत्म होने का नाम नहीं ले रही हैं, जिससे भाजपाइयों को अपना ही दांव उल्टा पडऩे का डर सताने लगा है जबकि विपक्षी दल नोटबंदी की वजह से जनता को हो रही परेशानियों को मुद्दा बनाकर केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोले हुए हैं। कांग्रेस, बसपा और सपा तीनों दल मिलकर भाजपा को नोटबंदी का फैसला लागू करने में विफल साबित करने में जुटे हैं। दूसरी तरफ अखिलेश यादव ने नोटबंदी से आम जनता को राहत देने के लिए कई ऐसे फैसले लिए हैं, जिनसे जनता को काफी राहत मिली है। इन फैसलों से अखिलेश यादव की लोकप्रियता में इजाफा हुआ है जोकि विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा के लिए खतरे की घंटी माना जा रहा है। भाजपा के रणनीतिकार इसकी काट भी नहीं ढूंढ पा रहे हैं। ऐसे में अब उनकी निगाहें केंद्र सरकार की तरफ से जल्द घोषित होने वाली किसी बड़ी योजना पर टिकी हैं, जिसे मुद्दा बनाकर विपक्षियों पर चोट की जा सके।
केंद्र सरकार के नोटबंदी के फैसले का विपक्षी दल विरोध कर रहे हैं। सरकार के खिलाफ विपक्षियों ने मोर्चा खोल दिया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 8 नवंबर को जब नोटबंदी का फैसला लिया था, तो सबसे अधिक दिक्कत उन लोगों को हुई, जिनके घर में शादी विवाह का कार्यक्रम था। हालांकि केंद्र सरकार ने जनता को राहत देने के लिए ढाई लाख रुपए निकालने की इजाजत दी थी, लेकिन बैंकों में कैश उपलब्ध न हो पाने की वजह से लोगों को राहत नहीं मिल पाई। इसलिए मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने गरीब लड़कियों के विवाह के लिए बड़ी योजना की शुरुआत करते हुए बीस हजार रुपए की सहायता राशि देने का ऐलान किया, जिसका लाभ प्रदेश भर की करीब दो लाख लड़कियों को मिलेगा। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने नोटबंदी के बाद प्रदेश में प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री में भी बड़ी छूट दी। उत्तर प्रदेश में रजिस्ट्री कराने में लोगों को 500 के पुराने और हजार रुपए के नोट इस्तेमाल करने की छूट दे दी गई। इस फैसले से लोगों का काफी राहत मिली। नोटबंदी से परेशान जनता अखिलेश को आशीर्वाद देने लगी। जो भाजपा को बिल्कुल भी रास नहीं आ रहा है।

पीडि़तों को आर्थिक मदद

अखिलेश सरकार ने बैंकों और एटीएम से पैसा निकालने के लिए लाइन में लगने के दौरान लोगों की मौत होने के मामले पर भी बड़ा फैसला लिया है। उत्तर प्रदेश इकलौता ऐसा राज्य बना,जहां बैंक की लाइन या एटीएम की लाइन में मरने वालों के परिजनों को मुआवजा दिया जाएगा। अखिलेश यादव ने कैश निकालने के लिए बैंक और एटीएम की लाइन में लगे लोगों की मौत पर परिजनों को दो लाख रुपए मुआवजा देने का ऐलान कर दिया। इसके लिए सभी जिलों के डीएम को निर्देश दिए गए हैं कि वो ऐसे लोगों को चिन्हित कर सरकार को सूची उपलब्ध कराएं। अखिलेश यादव के इस फैसले को सियासी चश्मे से भी देखा जा रहा है। यूपी में विधानसभा चुनाव बेहद नजदीक है, ऐेसे में अखिलेश यादव के इस फैसले के पीछे राजनीतिक लाभ लेने का मकसद भी साफ दिखता है। नोटबंदी के फैसले को एक माह से अधिक का समय हो चुका है, लेकिन पैसे की किल्लत खत्म होने का नाम नहीं ले रही है। बैंकों व एटीएम के बाहर लगने वाली लाइनें कम होने का नाम ही नहीं ले रही हैं। प्रदेश भर में कैश निकालनेके लिए लाइन में खड़े लोगों के मौतों की संख्या बढ़ती जा रही है। ऐसे में अखिलेश यादव की इन योजनाओं का असर नोटबंदी से परेशान लोगों पर जरूर पड़ेगा।
गौरतलब है कि भाजपा यूपी चुनाव में नोटबंदी के फैसले को भुनाने की योजना बना रही थी लेकिन नोटबंदी के बाद जनता की मुश्किलें बढऩे से केन्द्र सरकार की मंशा पर पानी फिरता दिख रहा है। अखिलेश यादव ने यूपी में भाजपा के नोटबंदी की काट तलाश ली और उसकी जगह शादी के लिए 20 हजार और बैंक व एटीएम की लाइन में मरने वालों के परिजनों को दो लाख रुपये की आर्थिक मदद देकर भाजपा को चारों खाने चित कर दिया है। इससे निश्चित तौर पर नरेंद्र मोदी और भाजपा की मुश्किलें बढ़ गई हैं। हालांकि यह देखने वाली बात होगी कि यूपी चुनाव तक यह स्थिति बनी रहती है या फिर केंद्र सरकार फिर किसी बड़ी योजना को लाकर इस मुद्दे पर भी बड़ी चोट करती है।

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